ठेका प्रथा के शोषण पर सरकार के सामने आउटसोर्सकर्मियों ने बुलंद की आवाज
News in short
- राज्य मंत्रालय पहुंचकर सौंपा गया मांग पत्र।
- ठेका प्रथा समाप्त कर सीधे वेतन भुगतान की मांग।
- हर साल मानदेय वृद्धि सुनिश्चित करने की अपील।
- 62 वर्ष तक सेवा, सुरक्षा व ग्रेच्युटी का लाभ मांगा।
- आउटसोर्स को मिले EPF, ESI, बोनस और बीमा।
News in Detail
आउटसोर्स कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अब और ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। युवा आउटसोर्सिंग सामाजिक कल्याण समिति के आव्हान पर प्रदेश के सभी जिलों से 400 से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी प्रतिनिधियों ने राज्य मंत्रालय के सामने पानी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव श्रम विभाग ने नाम 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। प्रदेश अध्यक्ष दीपक सिंह, संगठन मंत्री आशीष सिंह सिसोदिया सहित अन्य ने सरकार को प्रदेश के करीब 10 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों की मुश्किलें बताकर उनके समाधान की मांग की।
मंत्रालय के सामने बुलंद की मांग
आउटसोर्स कर्मचारी पर्यावास भवन के सामने जमा हुए। वे रैली के रूप राज्य मंत्रालय यानी वल्लभ भवन पहुंचे। यहां प्रशासनिक अधिकारी को संगठन के प्रतिनिधि अनिल बाजपेयी ने मांग पत्र सौंपा।
लंबे समय बाद ये मौका था जब किसी कर्मचारी संगठन को प्रदर्शन या रैली के रूप में ज्ञापन देने के लिए मंत्रालय के गेट तक पहुंचने की अनुमति मिली हो। इस मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने भी समर्थन में दिया।
सरकार की बेरुखी से नाराज
आउटसोर्स कर्मचारियों में अपनी मांगों पर सरकारी बेरुखी नाराजगी बढ़ा रही है। बार–बार धरना प्रदर्शन से मिली निराशा के चलते ही वे मध्य प्रदेश मंत्रालय पहुंचे थे। इस दौरान प्रदेश के कई जिलों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने ज्ञापन के जरिए सरकार तक अपनी बात रखी।
समस्याओं से घिरी आउटसोर्स व्यवस्था
कर्मचारियों के प्रतिनिधि आशीष सिंह सिसौदिया ने बताया विभागों में ज्यादातर काम आउटसोर्स है। इसके बावजूद इन कर्मचारियों से पक्षपात किया जा रहा है। मानदेय में भारी असमानता बनी हुई है। समय पर वेतन भुगतान नहीं होता है। सेवा में स्थायित्व का पूरी तरह अभाव है। कभी भी बिना पूर्व सूचना के भगा दिया जाता है। उन्हें ईएसआई, ईपीएफ और बोनस में भी भेदभाव झेलना पड़ रहा है।
EPF, ESI, बोनस जैसी सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती
आउटसोर्स कर्मचारियों ने शासन से बिचौलिया प्रथा समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है विभाग उनसे काम लेता है। उन्हें जो वेतन निर्धारित है उसमें से ठेकेदार के लोग एक हिस्सा काट लेते हैं।
पूरे प्रदेश में किसी आउटसोर्स कर्मचारी को पूरा वेतन नहीं मिल रहा।इसके लिए विभाग स्तर पर भुगतान की व्यवस्था होनी चाहिए। नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी सालाना वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाना तय हो। आउटसोर्स कर्मचारियों को कभी भी सेवा से बाहर कर दिया जाता है। बिना कारण ऐसा करने की प्रथा पर पाबंदी लगनी चाहिए।
सरकार के सामने ये भी रखी मांग
- ग्रेच्युटी का लाभ देने की है।
- दुर्घटना बीमा सुविधा की है।
- कार्य स्थल पर हादसे होने पर मदद।
- न्यूनतम वेतन की है।
- सामान काम के लिए नियमित कर्मचारी के समकक्ष वेतन।
- आश्रित परिजन को अनुकंपा नियुक्ति।
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