एमपी में जल्द होंगे पटवारियों के प्रमोशन, सर्विस रिकॉर्ड की हो रही है जांच
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में 1050 पटवारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
- पटवारियों को राजस्व निरीक्षक यानी आरआई पद पर पदोन्नति मिलेगी।
- सभी कलेक्टरों से पटवारियों का सर्विस रिकॉर्ड मांगा गया है।
- 50 साल से कम उम्र वाले पटवारियों की सूची बनाई गई है।
- स्वामित्व योजना में रजिस्ट्रीकर्ता बनाए जाने पर पटवारी नाराज हैं।
मध्य प्रदेश के पटवारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार अब उन्हें प्रमोशन देने की तैयारी में जुट गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के काम में कई पटवारी आनाकानी कर रहे थे। सरकार ने अब उनकी मांग को गंभीरता से लिया है।
क्यों शुरू हुई प्रमोशन की प्रक्रिया
मध्यप्रदेश राजस्व विभाग ने पटवारियों को राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए भू-संसाधन प्रबंधन कमिश्नर ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजा है। इस पत्र में पटवारियों की सेवा संबंधी पूरी जानकारी मांगी गई है। साथ ही विभाग ने 1050 पटवारियों की एक सूची भी जारी कर दी है। सूत्रों के मुताबिक यह पूरी कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग के पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर की जाएगी।
किन पटवारियों को मिलेगा फायदा
इस प्रमोशन का फायदा जून 2007 या इससे पहले नियुक्त हुए पटवारियों को मिलेगा। पदोन्नति की कार्रवाई मध्य प्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी सेवा भर्ती नियम 2012 के आधार पर होगी। इसमें 18 जून 2018 को किया गया संशोधन लागू होगा। इसी प्रावधान के तहत 01 जनवरी 2026 को 50 साल से कम उम्र वाले पटवारियों की सूची तैयार की गई है।
विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि जिस पटवारी की उम्र 01 जनवरी 2026 को 50 साल से कम है और नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले हुई है, उसका नाम सूची में जोड़ा जाए। इससे पुराने और वरिष्ठ पटवारियों को प्रमोशन में प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
30 सितंबर की तय की गई समय सीमा
विभाग ने पूरी जानकारी जुटाने के लिए सख्त समय सीमा तय की है। कलेक्टरों के माध्यम से यह जानकारी संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार से मांगी गई है। सभी जिलों को कहा गया है कि 30 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे तक यह जानकारी अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई है।
जिलों से मांगी गई चार अहम जानकारी
विभाग ने कलेक्टरों से चार तरह की जानकारी मांगी है। पहली जानकारी यूआर, एससी, एसटी और ओबीसी यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class) श्रेणी के अनुसार पटवारियों की चयन श्रेणी से जुड़ी है। दूसरी जानकारी में सूची में शामिल पटवारियों के निधन, सेवानिवृत्ति, बर्खास्तगी और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस (Voluntary Retirement Scheme) की डिटेल मांगी गई है।
तीसरी जानकारी वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन की मूल प्रति से जुड़ी है। चौथी और आखिरी जानकारी में संबंधित पटवारियों के खिलाफ दर्ज अनुशासनात्मक और आपराधिक प्रकरण के साथ दंड की जानकारी मांगी गई है। इन सभी बिंदुओं के आधार पर ही अंतिम पदोन्नति सूची तैयार होगी।
स्वामित्व योजना पर क्यों नाराज हैं पटवारी
वहीं, दूसरी ओर स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता बनाया गया है। इस फैसले पर पटवारियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जमीन का स्वामित्व तय करना लाभार्थी और शासन के बीच का दस्तावेजी विषय है। ऐसे में पटवारी को रजिस्ट्रीकर्ता यानी निष्पादक बनाना सही नहीं है।
पटवारियों का सवाल है कि यदि भविष्य में स्वामित्व, कब्जे या सीमांकन को लेकर कोई विवाद होता है, तो इसकी जिम्मेदारी पटवारी की क्यों तय की जाएगी। उनका मानना है कि यह व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही उनके लिए ठीक नहीं है।
कई तरह के विवाद की जताई आशंका
पटवारियों के मुताबिक आबादी भूमि के मामलों में सिर्फ नक्शा और खसरा देखना काफी नहीं होता। इसमें वास्तविक कब्जा, वारिस, सह-स्वामित्व और चतुर्सीमा जैसे कई पहलू भी जुड़े होते हैं। इसके अलावा पुराने दावे और कोर्ट में लंबित विवाद भी सामने आ सकते हैं। पटवारियों को डर है कि अगर बाद में किसी ने स्वामित्व को चुनौती दी, तो निष्पादक होने के नाते उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया में घसीटा जा सकता है।
पटवारियों ने उठाए पांच बड़े सवाल
पटवारी संगठनों ने इस मामले में पांच अहम सवाल उठाए हैं। पहला सवाल है कि पंजीयन दस्तावेज में पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में क्यों शामिल किया जा रहा है। दूसरा सवाल है कि भविष्य में स्वामित्व विवाद होने पर पटवारी की व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी कौन लेगा।
तीसरा सवाल ड्रोन सर्वे या अधिकार अभिलेख में गलती निकलने पर जवाबदेही को लेकर है। चौथा सवाल है कि रजिस्ट्री से पहले ग्रामीणों को आपत्ति और सुधार का पर्याप्त मौका क्यों नहीं दिया जाए। पांचवां और आखिरी सवाल है कि अगर पटवारी की भूमिका सिर्फ सत्यापन और प्रतिवेदन तक सीमित है, तो उसे निष्पादक क्यों बनाया जा रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल विभाग ने सभी जिलों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 30 सितंबर के बाद यह डेटा राजस्व विभाग के पास पहुंचेगा। इसके आधार पर पदोन्नति की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। वहीं स्वामित्व योजना को लेकर पटवारियों की आपत्तियों पर सरकार का क्या रुख रहेगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।
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