MP में कर्मचारियों की पेंशन फाइल अटकाई तो जिम्मेदारों की खैर नहीं, नई डेडलाइन तय
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकारी कर्मचारियों की पेंशन फाइल अटकाई तो तय होगी जिम्मेदारी।
- रिटायरमेंट के बाद नहीं रुकेगी पेंशन, नई डेडलाइन लागू।
- हर स्तर पर सिर्फ 5 दिन, वरना जवाबदेही तय।
- पुनरीक्षित पेंशन अब सिर्फ 10 दिन में होगी मंजूर।
- वेतन निर्धारण और पेंशन के लिए नई समय-सीमा तय।
मध्य प्रदेश में अब पेंशन फाइल अटकाना आसान नहीं होगा। वित्त विभाग ने हर स्तर के लिए समय-सीमा तय की है। सामान्य पेंशन प्रकरण अधिकतम 15 दिन में निपटेगा। पुनरीक्षित पेंशन 10 दिन और वेतन निर्धारण 11 दिन में होगा। देरी होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए महीनों इंतजार करना अब पुरानी बात होने वाली है। मध्यप्रदेश के वित्त विभाग ने एक नई व्यवस्था लागू की है।
इसके तहत ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निपटारे के लिए हर स्तर पर समय तय कर दिया गया है। अब फाइल क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर किसी भी स्तर पर अनिश्चित समय तक फाइल रोक नहीं सकेंगे।
सामान्य पेंशन में 15 दिन की सीमा
नई व्यवस्था के तहत सामान्य पेंशन प्रकरण को तीन स्तरों से गुजरना होगा। क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर, हर स्तर को अधिकतम पांच कार्य दिवस मिलेंगे। इस तरह पूरी प्रक्रिया अधिकतम 15 कार्य दिवस में पूरी करनी होगी।
हर चरण के लिए समय तय होने से यह पता लगाना आसान होगा कि फाइल किस स्तर पर पहुंची है। इससे जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। पेंशन प्रक्रिया भी समयबद्ध बनेगी।
पुनरीक्षित पेंशन: सिर्फ 10 दिन
पेंशन में संशोधन या पुनरीक्षण से जुड़े मामलों की समय-सीमा और भी कम रखी गई है। ऐसे प्रकरण में क्रियेटर को चार दिन मिलेंगे। वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन दिन दिए गए हैं। यानी पूरा मामला अधिकतम 10 दिन में निपटाना होगा।
वेतन निर्धारण के लिए 11 दिन
वेतन निर्धारण से जुड़े प्रकरणों के लिए कुल 11 कार्य दिवस तय किए गए हैं। इसमें क्रियेटर को पांच दिन मिलेंगे। वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन दिन दिए गए हैं।
समीक्षा में मिली थी देरी
वित्त विभाग की समीक्षा में एक बड़ी समस्या सामने आई थी। कई संभागीय और जिला कार्यालयों में पेंशन प्रकरण अलग-अलग स्तरों पर लंबे समय तक लंबित रह रहे थे। कहीं क्रियेटर के पास फाइल रुकी थी तो कहीं वेरीफायर या एप्रूवर के स्तर पर।
इसकी वजह से पेंशन स्वीकृति में अनावश्यक देरी हो रही थी। अब सभी स्तरों पर समय-सीमा का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद यह पता लगाना भी है कि देरी होने पर फाइल किस स्तर पर अटकी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
रिटायरमेंट से पहले शुरुआत
आने वाले महीनों में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के मामलों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। ऐसे अग्रिम पेंशन मामलों में जरूरी कार्रवाई पहले ही पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मकसद यह है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन शुरू होने में देरी न हो।
इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए पेंशन पर निर्भर रहते हैं। समय पर पेंशन शुरू होने से उन्हें आर्थिक परेशानी नहीं होगी।
2025 में बना पेंशन सेल
पेंशन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए वित्त विभाग ने पहले ही एक कदम उठाया था। 9 जून 2025 को राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल यानी एससीपीपीसी (SCPPC – State Centralized Pension Processing Cell) का गठन किया गया था।
1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण की यह नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। एससीपीपीसी को नई पेंशन के साथ-साथ पुनरीक्षित पेंशन की स्वीकृति की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अलावा रिटायरमेंट से दो साल पहले तक के वेतन निर्धारण के अनुमोदन का काम भी इसी सेल को सौंपा गया है।
इस नई व्यवस्था से रिटायर हो चुके और रिटायर होने वाले, दोनों तरह के कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। समय पर पेंशन मिलने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।
FAQ
- मध्य प्रदेश में सामान्य पेंशन प्रकरण कितने दिन में निपटेगा?
सामान्य पेंशन प्रकरण अधिकतम 15 कार्य दिवस में निपटाना होगा। इसमें क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर को पांच-पांच दिन मिलेंगे। - पुनरीक्षित पेंशन के लिए कितनी समय-सीमा तय की गई है?
पुनरीक्षित पेंशन के मामले अधिकतम 10 कार्य दिवस में निपटाने होंगे। क्रियेटर को चार और वेरीफायर, एप्रूवर को तीन-तीन दिन मिलेंगे। - यह नई व्यवस्था कब से लागू हुई है?
यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू की गई है। इसे राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल के जरिए लागू किया जा रहा है।
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