इंदौर नगर निगम में 30 साल पहले 89 सफाई मित्रों की भर्ती में घोटाला, पेंशन मांगी तो हुआ खुलासा
Sanjay Gupta | Aug 21, 2026, 15:10 IST
indore municipal corporation safai mitra recruitment scam
इंदौर नगर निगम में जो कांड हो जाए, कम है। नगर निगम में 89 सफाई मित्र (हरिजन बेलदार) से 30 साल तक सेवाएं ली गईं। जब यह रिटायर हुए और पेंशन मांगी तो निगम को याद आया कि इनकी भर्ती में घोटाला हुआ था। पेंशन देने से मना कर दिया गया।
इंदौर नगर निगम में 89 सफाई मित्रों की पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़ी एक फाइल करीब एक साल से चल रही है। इन सफाई मित्रों की भर्ती अगस्त 1997 में हुई थी और वे साल 2025 तक नगर निगम में काम करते रहे।
रिटायरमेंट के बाद जब उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की तो मामला अधिकारियों के पास पहुंचा। इसके बाद पुरानी भर्ती की फाइल निकाली गई। जांच में अधिकारियों ने दावा किया कि इनकी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी और इसे अवैध बताया गया।
इसके बाद इन कर्मचारियों की पेंशन रोक दी गई। अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां इस पर सुनवाई हो रही है।
नगर निगम के हेल्थ विभाग के जोन-18 में हरिजन बेलदार की सीधी भर्ती के लिए अगस्त 1994 में विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें 77 पदों पर भर्ती निकाली गई थी।
लेकिन बाद में चयन समिति ने इंटरव्यू के जरिए 77 की जगह 89 लोगों को भर्ती दे दी। इन सभी को अगस्त 1997 में नियुक्ति मिली। कर्मचारियों को फिक्स पे पर रखा गया और इन्हें सफाई मित्र का नाम दिया गया।
इस भर्ती को लेकर कमल सधवानी नाम के व्यक्ति ने लोकायुक्त में शिकायत की। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को गलत बताते हुए सवाल उठाए।
शिकायत में तत्कालीन पार्षद छोटू शुक्ला, रामलाल यादव और अनिल शुक्ला की चयन समिति पर आरोप लगाए गए। इसके अलावा तत्कालीन निगम उपायुक्त विजय शंकर उपाध्याय, चीफ हेल्थ ऑफिसर अरविंद पुराणिक और निगम सचिव बंशीला जोशी का नाम भी सामने आया।
आरोप है कि ये सभी लोग चयन समिति और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े हुए थे।
नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर लोकायुक्त ने इन सभी को आरोपी बनाया है। साल 2007 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था और 2009 में कोर्ट में चालान पेश किया गया था।
जांच में सामने आया कि 77 पदों के लिए निकली भर्ती में 89 लोगों को नियुक्ति दे दी गई। इनमें 23 उम्मीदवार तय उम्र सीमा के दायरे में नहीं थे। वहीं 39 उम्मीदवारों के पास न्यूनतम पांचवीं पास की योग्यता भी नहीं थी। इसके अलावा 63 लोगों का रोजगार कार्यालय में पंजीयन नहीं मिला।
जांच एजेंसी ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और इसमें गड़बड़ी की गई।
इस मामले में साल 2015 में तत्कालीन पार्षदों और चयन समिति के सदस्य छोटू शुक्ला, रामलाल यादव और अनिल शुक्ला ने लोकायुक्त की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य नियमों की जांच करना निगम अधिकारियों की चयन समिति की जिम्मेदारी थी। उनका काम सिर्फ इंटरव्यू लेना था।
हाईकोर्ट ने उनकी दलील को मानते हुए तीनों पार्षदों को मामले से बाहर कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने तत्कालीन उपायुक्त विजय शंकर उपाध्याय और सचिव बंशीला जोशी की भूमिका को संदिग्ध माना।
दिलचस्प बात यह है कि लोकायुक्त में मामला सामने आने के बाद भी ये सभी 89 कर्मचारी नगर निगम में लगातार काम करते रहे। उनका वेतन भी निगम की ओर से जारी होता रहा।
साल 2007 में मामला दर्ज होने के बावजूद न तो किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच बैठाई गई और न ही किसी को नोटिस देकर सेवा से हटाया गया।
करीब 30 साल तक नौकरी करने के बाद साल 2025 में ये कर्मचारी रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की।
कर्मचारियों का कहना है कि निगम ने उन्हें कभी कोई नोटिस नहीं दिया। उन्होंने पूरी ईमानदारी से 30 साल तक काम किया है। उनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई भी नहीं हुई है, इसलिए उन्हें रिटायरमेंट के सभी लाभ दिए जाने चाहिए।
तत्कालीन निगमायुक्त
इन सभी कर्मचारियों ने मई 2025 में तत्कालीन निगमायुक्त आईएएस शिवम वर्मा को आवेदन दिया था। इस पर निगम की ओर से स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया गया।
आदेश में कहा गया कि लोकायुक्त ने इस भर्ती को गलत मानते हुए चालान पेश किया है और मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। इसके अलावा इस मामले से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है।
निगम ने कहा कि अगर भविष्य में कोर्ट भर्ती को अवैध घोषित कर शून्य कर देता है, तो ऐसी स्थिति में पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ देना उचित नहीं होगा।
इस मामले में कर्मचारियों ने एमपी हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। वहीं, Indore Nagar Migam प्रशासन की ओर से निगमायुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल ने भी बचाव में रिट अपील लगाई है।
दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिए हैं और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।
![6547d60d-35f]()
इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ के बिल घोटाले में ED ने इन 32 के खिलाफ किया चालान
इंदौर नगर निगम 103 करोड़ घोटाले में ED कोर्ट से अभय राठौर, बड़ेरा की जमानत खारिज
इंदौर नगर निगम का विवादित प्रस्ताव- अतिक्रमणकारियों से वसूलेंगे संपत्तिकर, होगा रद्द
इंदौर नगर निगम अब 1 लाख राशि तक के चेक नहीं लेगा, वजह 15 रुपए के भी चेक बाउंस
रिटायरमेंट के बाद जब उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की तो मामला अधिकारियों के पास पहुंचा। इसके बाद पुरानी भर्ती की फाइल निकाली गई। जांच में अधिकारियों ने दावा किया कि इनकी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी और इसे अवैध बताया गया।
इसके बाद इन कर्मचारियों की पेंशन रोक दी गई। अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां इस पर सुनवाई हो रही है।
कब, कैसे हुई भर्ती
लेकिन बाद में चयन समिति ने इंटरव्यू के जरिए 77 की जगह 89 लोगों को भर्ती दे दी। इन सभी को अगस्त 1997 में नियुक्ति मिली। कर्मचारियों को फिक्स पे पर रखा गया और इन्हें सफाई मित्र का नाम दिया गया।
लोकायुक्त में हुई शिकायत, इन पार्षदों, अधिकारियों के नाम
शिकायत में तत्कालीन पार्षद छोटू शुक्ला, रामलाल यादव और अनिल शुक्ला की चयन समिति पर आरोप लगाए गए। इसके अलावा तत्कालीन निगम उपायुक्त विजय शंकर उपाध्याय, चीफ हेल्थ ऑफिसर अरविंद पुराणिक और निगम सचिव बंशीला जोशी का नाम भी सामने आया।
आरोप है कि ये सभी लोग चयन समिति और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े हुए थे।
नियुक्ति में यह घोटाला लोकायुक्त ने पाया
जांच में सामने आया कि 77 पदों के लिए निकली भर्ती में 89 लोगों को नियुक्ति दे दी गई। इनमें 23 उम्मीदवार तय उम्र सीमा के दायरे में नहीं थे। वहीं 39 उम्मीदवारों के पास न्यूनतम पांचवीं पास की योग्यता भी नहीं थी। इसके अलावा 63 लोगों का रोजगार कार्यालय में पंजीयन नहीं मिला।
जांच एजेंसी ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और इसमें गड़बड़ी की गई।
हाईकोर्ट ने पार्षदों को बरी किया
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य नियमों की जांच करना निगम अधिकारियों की चयन समिति की जिम्मेदारी थी। उनका काम सिर्फ इंटरव्यू लेना था।
हाईकोर्ट ने उनकी दलील को मानते हुए तीनों पार्षदों को मामले से बाहर कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने तत्कालीन उपायुक्त विजय शंकर उपाध्याय और सचिव बंशीला जोशी की भूमिका को संदिग्ध माना।
लेकिन निगम में यह काम करते रहे
साल 2007 में मामला दर्ज होने के बावजूद न तो किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच बैठाई गई और न ही किसी को नोटिस देकर सेवा से हटाया गया।
करीब 30 साल तक नौकरी करने के बाद साल 2025 में ये कर्मचारी रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की।
कर्मचारियों का कहना है कि निगम ने उन्हें कभी कोई नोटिस नहीं दिया। उन्होंने पूरी ईमानदारी से 30 साल तक काम किया है। उनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई भी नहीं हुई है, इसलिए उन्हें रिटायरमेंट के सभी लाभ दिए जाने चाहिए।
तत्कालीन निगमायुक्त शिवम वर्मा ने यह दिया आदेश
आदेश में कहा गया कि लोकायुक्त ने इस भर्ती को गलत मानते हुए चालान पेश किया है और मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। इसके अलावा इस मामले से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है।
निगम ने कहा कि अगर भविष्य में कोर्ट भर्ती को अवैध घोषित कर शून्य कर देता है, तो ऐसी स्थिति में पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ देना उचित नहीं होगा।
अब हाईकोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता
दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिए हैं और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है।
खबर से जुड़े सारे दस्तावेज यहां देखें...
indore municipal corporation
6547d60d-35f
2d087585-e3e
47d6395a-6bf
ये खबरें भी पढ़ें...
इंदौर नगर निगम 103 करोड़ घोटाले में ED कोर्ट से अभय राठौर, बड़ेरा की जमानत खारिज
इंदौर नगर निगम का विवादित प्रस्ताव- अतिक्रमणकारियों से वसूलेंगे संपत्तिकर, होगा रद्द
इंदौर नगर निगम अब 1 लाख राशि तक के चेक नहीं लेगा, वजह 15 रुपए के भी चेक बाउंस
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari