MP में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, भोपाल-इंदौर में ₹110 के पार, जानें आपके शहर के रेट
समझें क्या है पूरा मामला
- आज से पेट्रोल और डीजल 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है।
- सिर्फ 5 दिन में यह दूसरी बार ईंधन की कीमत बढ़ी है।
- 15 मई को पेट्रोल-डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल पार हो गया है।
- तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था।
आपके शहर में अब कितना है रेट
Petrol Diesel Price Today: मध्यप्रदेश में रहने वाले लोगों की जेब पर आज से नया बोझ पड़ा है। भोपाल में अब एक लीटर पेट्रोल 110.75 रुपए का हो गया है और डीजल 95.91 रुपए में मिलेगा। इंदौर और जबलपुर में पेट्रोल 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
डीजल की बात करें तो उज्जैन में यह 96.40 रुपए पर पहुंच गया है। इंदौर में 95.97 रुपए, जबलपुर में 95.98 रुपए और ग्वालियर में 95.86 रुपए प्रति लीटर डीजल मिलेगा।
5 दिन में दो बार बढ़ी कीमत
इससे पहले 15 मई को ही पेट्रोल डीजल रेट 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ था। अब महज पांच दिन के भीतर फिर 90 पैसे की बढ़ोतरी हो गई है। यानी (एमपी पेट्रोल डीजल रेट) बहुत कम समय में आम आदमी पर ईंधन का दोहरा बोझ पड़ा है।
मार्च 2024 से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर थे। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने दो रुपए प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी। उसके बाद लंबे समय तक कीमतें नहीं बदलीं।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल के दाम
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (diesel-petrol price) यानी क्रूड ऑयल के दाम में तेज उछाल। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से पहले क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल पर था। अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा चुका है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम चढ़ते हैं तो यहां की सरकारी तेल कंपनियों पर सीधा दबाव पड़ता है।
कंपनियों को हर माह 30 हजार करोड़ का नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय (petrol price hike) की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (petrol price bhopal) की बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था। इसी घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने यह कदम उठाया है।
पहले सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर दाम थामे थे
एक वक्त सरकार ने पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर 10 रुपए से शून्य कर दी थी। इससे पेट्रोल पर कुल एक्साइज ड्यूटी 21.90 रुपए से घटकर 11.90 रुपए।
डीजल पर 17.80 रुपए से घटकर 7.80 रुपए प्रति लीटर रह गई थी। इस फैसले की वजह से काफी समय तक दाम नहीं बढ़े। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय दबाव (पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतें) इतना बढ़ गया कि कंपनियों के पास बढ़ोतरी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
ऐसे तय होती है आपके पंप पर कीमत
पेट्रोल पंप पर जो कीमत आप चुकाते हैं वह सिर्फ कच्चे तेल की कीमत नहीं होती। उसमें कई परतें जुड़ी होती हैं। पहले आता है कच्चे तेल का आयात मूल्य। फिर रिफाइनरी में साफ करने की लागत और कंपनी का मुनाफा जुड़ता है।
इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है जो पूरे देश में एक जैसी होती है। फिर पेट्रोल पंप मालिक यानी डीलर का कमीशन जुड़ता है।
सबसे आखिर में राज्य सरकार अपना वैट (VAT) यानी वैल्यू एडेड टैक्स लगाती है। हर राज्य में वैट अलग होने की वजह से ही दिल्ली, मुंबई और भोपाल में पेट्रोल की कीमत अलग-अलग होती है। इन सब जोड़-तोड़ के बाद उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते बेस प्राइस लगभग चार गुना तक हो जाती है।
पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़ चुके थे दाम
पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईंधन की कीमतें 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गई थीं। सरकार का कहना था कि भारत में उपभोक्ताओं पर यह बोझ नहीं डाला गया। लेकिन अब बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों और कंपनियों के घाटे को देखते हुए यह राहत आगे बनाए रखना मुश्किल हो गया।
सरकारी तेल कंपनियां डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम यानी डेली प्राइस रिवीजन के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। अगर क्रूड की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आगे और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
महंगाई की मार आम जीवन पर
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ी भरवाने तक नहीं रहता। ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ेगा जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन भी महंगे होंगे।
किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने पर ज्यादा खर्च करना होगा जिससे अनाज की उत्पादन लागत बढ़ेगी। बस और ऑटो का किराया भी बढ़ सकता है जिसका सीधा असर रोज दफ्तर या स्कूल जाने वालों पर पड़ेगा।
पीएम मोदी ने पहले ही दे दिया था संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत सोच-समझकर किया जाए।
आयातित पेट्रो उत्पादों का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत के हिसाब से हो। इससे विदेशी मुद्रा बचेगी और युद्ध के बुरे असर भी कम होंगे। पीएम के इस बयान के कुछ ही दिन बाद कीमतें बढ़ा दी गई हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
पेट्रोल-डीजल की कीमत सिर्फ एक ईंधन की कीमत नहीं है। यह आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ा मुद्दा है। जब ईंधन महंगा होता है तो सब्जी से लेकर दवाई तक हर चीज के दाम बढ़ते हैं क्योंकि माल ढुलाई महंगी हो जाती है।
पांच दिन में दो बार हुई यह बढ़ोतरी आम परिवारों के मासिक बजट पर भारी असर डालेगी। किसान, छोटे व्यापारी और मजदूर वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह खबर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार और उपभोक्ता संरक्षण के नजरिए से भी अहम है।
पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से नागरिकों को यह जानना जरूरी है कि उनकी जेब पर बोझ क्यों और कैसे बढ़ रहा है। डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के पैमाने पर यह खबर तथ्यों पर आधारित है और किसी समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह से मुक्त है।
FAQ
- आज पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ और भोपाल में नया रेट क्या है?
आज यानी मंगलवार से देशभर में पेट्रोल और डीजल 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। भोपाल में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए हो गई है। इंदौर और जबलपुर में पेट्रोल 110.79 रुपए, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में सबसे महंगा 111.27 रुपए प्रति लीटर है। यह 5 दिन में दूसरी बार हुई बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को 3 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। - पेट्रोल-डीजल की कीमत बार-बार क्यों बढ़ रही है?
इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल है। ईरान-अमेरिका तनाव से पहले क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल था जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इस वजह से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था। घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने कीमत बढ़ाई है। - पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा?
ट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहता। मालभाड़ा यानी ट्रक-टेम्पो का किराया बढ़ेगा जिससे सब्जी, फल और राशन सभी महंगे हो सकते हैं। किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा खर्च करना होगा जिससे खेती की लागत और फिर अनाज के दाम बढ़ सकते हैं। बस और ऑटो का किराया भी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर यह बढ़ोतरी आम परिवारों की मासिक जेब पर सीधा असर डालेगी।
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