एमपी PM एक्सीलेंस कॉलेजों में अटके 2,232 पद, छात्र यूट्यूब के सहारे कर रहे पढ़ाई
मध्य प्रदेश के 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस दो साल पहले खुले थे। इनका मकसद छात्रों को रोजगारपरक हाईटेक शिक्षा देना था। लेकिन आज भी इन कॉलेजों को कोई स्थायी स्टाफ नहीं मिला है।
प्रदेशभर में दो हजार 232 पदों की भर्ती अटकी है। छात्र अतिथि विद्वानों (गेस्ट फैकल्टी) और कई बार यूट्यूब के सहारे प्रैक्टिकल कर रहे हैं।
एक्सीलेंस कॉलेज क्यों खोले गए थे
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020 के तहत उच्च शिक्षा की तस्वीर बदलने का दावा किया गया था। इसी के तहत प्रदेश के 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोले गए। दो साल पहले शुभारंभ के समय नए शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद बनाने की घोषणा हुई थी।
लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग से पद बनाने की मंजूरी नहीं मिली। नतीजा यह हुआ कि प्रदेशभर में दो हजार 232 पदों पर भर्ती अटक गई। ये कॉलेज अब अतिथि विद्वानों के सहारे किसी तरह चल रहे हैं।
मुरैना कॉलेज की जमीनी हकीकत
पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस मुरैना के प्राचार्य ऋषिपाल सिंह का कहना है कि कॉलेज में 26 शैक्षणिक और 5 गैर-शैक्षणिक पदों को मंजूरी देने की घोषणा की गई थी। लेकिन अभी तक इन पदों को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है।
कॉलेज के पोर्टल पर भी ये पद दर्ज नहीं हुए हैं। इसके कारण इन पदों पर न तो नियमित भर्ती हो पा रही है और न ही भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा सकता है। फिलहाल पुराने स्वीकृत खाली पदों के आधार पर अतिथि विद्वानों की मदद से कॉलेज का काम चलाया जा रहा है।
हाईटेक कोर्स सिर्फ कागजों में
पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने का मकसद छात्रों को ऐसी पढ़ाई से जोड़ना था, जिससे उन्हें सीधे रोजगार के मौके मिल सकें। इसके लिए बीसीसी (कृषि), Artificial Intelligence, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, एविएशन मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस और जैविक खेती जैसे नए जमाने के कोर्स शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
इन कोर्स के लिए 1,845 शैक्षणिक पदों की जरूरत बताई गई थी, लेकिन ये पद अभी तक सिर्फ कागजों में ही हैं। कॉलेजों में न तो इन विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक आए और न ही जरूरी आधुनिक सुविधाएं विकसित हो पाईं। ऐसे में रोजगार से जोड़ने का यह बड़ा सपना फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है।
छात्रों का भरोसा घटा, सीटें खाली
स्थायी फैकल्टी न होने से छात्रों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। अकेले मुरैना एक्सीलेंस कॉलेज की एक हजार 400 सीटों में से तकनीकी कोर्स की करीब 300 सीटें इस सत्र में खाली रह गईं।
इन संस्थानों को चलाने के लिए सामान्य कॉलेजों के प्रोफेसरों को अटैच किया गया। इससे मूल कॉलेजों की नियमित व्यवस्था भी बिगड़ गई। वे कॉलेज भी अब पूरी तरह अतिथि शिक्षकों पर निर्भर हो गए हैं।
भर्ती में तीन साल का गैप
दो हजार 232 पदों की फाइल अभी भी शासन स्तर पर लंबित है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर आज मंजूरी मिल भी जाए, तो एमपीपीएससी (Madhya Pradesh Public Service Commission) की चयन प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम 2 से 3 साल और लगेंगे।
यानी इन कॉलेजों का पहला बैच बिना नियमित प्रोफेसर के ही डिग्री लेकर निकल जाएगा। यह पूरे मॉडल की सबसे बड़ी कमजोरी बताई जा रही है।
घोषणा के उलट बने परीक्षा केंद्र
शुरुआत में कहा गया था कि इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। लेकिन मुरैना सहित ज्यादातर कॉलेजों में अब बीएड, एमएड और एमबीए जैसी परीक्षाएं कराई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन कॉलेजों का ज्यादातर समय परीक्षाएं कराने में ही बीत जाता है।
सरकार का क्या कहना है
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के मुताबिक पीएम एक्सीलेंस महाविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। उनका कहना है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए दूसरे कॉलेजों से प्रोफेसर अटैच किए गए हैं। मंत्री के मुताबिक नए पदों के सृजन और भर्ती की प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाएगी।
फिलहाल जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के 55 जिलों में खुले ये महत्वाकांक्षी कॉलेज अभी भी स्थायी तंत्र और पर्याप्त स्टाफ का इंतजार कर रहे हैं।
FAQ
- मध्यप्रदेश के एक्सीलेंस कॉलेजों में कितने पद अटके हैं?
प्रदेशभर के 55 जिलों में कुल दो हजार 232 पदों की भर्ती अटकी है। इनमें से 1,845 पद सिर्फ शैक्षणिक कोर्स से जुड़े हैं। - मुरैना एक्सीलेंस कॉलेज की कितनी सीटें खाली रहीं?
कॉलेज की कुल 1,400 सीटों में से तकनीकी कोर्स की करीब 300 सीटें इस सत्र में खाली रह गईं। स्थायी फैकल्टी न होना इसकी बड़ी वजह बताई गई है। - भर्ती पूरी होने में कितना समय लगेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक मंजूरी मिलने के बाद भी एमपीपीएससी की चयन प्रक्रिया में कम से कम 2 से 3 साल लगेंगे। इससे पहला बैच बिना नियमित प्रोफेसर के ही निकल सकता है।
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