MP में 20 हजार तक बढ़ेगी शिक्षकों की सैलरी: पहली नियुक्ति से मिलेगा सर्विस का लाभ
Neel Tiwari | Sept 24, 2026, 16:22 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के सेवा लाभ का मामला फिर चर्चा में है। जबलपुर हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार सप्ताह दिए हैं। पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने पर वेतन, एरियर और दूसरे लाभ मिल सकते हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मामला शिक्षकों की पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने से जुड़ा है।
- 497 शिक्षकों ने सेवा लाभ नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का रुख किया था।
- सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
- 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज की।
- अब हाई कोर्ट ने चार हफ्ते में आदेश लागू करने को कहा है।
मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए यह मामला अहम है। शिक्षकों का कहना है कि पुरानी सेवा को नहीं जोड़ा गया। इससे उन्हें कई सेवा लाभ कम मिलने की बात सामने आई। मामले में 497 शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। इनमें राजेश कुमार पांडेय समेत अन्य शिक्षक शामिल थे।
सरकार को दिया चार हफ्ते का समय
सरकार ने आदेश लागू करने के लिए समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने चार सप्ताह की मोहलत दी। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
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सरकार ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
शिक्षकों की सैलरी में कितना बदलाव?
10 साल के एरियर का भी दावा
प्रति शिक्षक सात से आठ लाख रुपए तक का अनुमान है। इस राशि का अंतिम निर्धारण विभागीय गणना से होगा। बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज का दावा भी है। इस दावे की अंतिम स्थिति आदेश पालन के बाद साफ होगी।
किस शिक्षक को कितना होगा फायदा?
बढ़कर यह करीब 1.10 लाख रुपए तक हो सकता है। उच्च माध्यमिक शिक्षकों की संख्या करीब 15 हजार बताई गई है। उनका वेतन करीब एक लाख रुपये बताया गया है। बढ़कर यह करीब 1.20 लाख रुपये तक बताया गया है। ये आंकड़े शिक्षक संगठनों की ओर से बताए गए हैं।
करीब 70 हजार शिक्षकों को होगा लाभ
सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर
क्या था हाई कोर्ट का पिछला आदेश
उच्च न्यायालय ने मामले के गुणों (merits) पर कोई टिप्पणी या अंतिम विचार व्यक्त किए बिना इस याचिका का निपटारा कर दिया था। अदालत ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता आज से 30 दिनों के भीतर प्रतिवादी संख्या 1 यानि स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं, तो प्राधिकारी को कानून के अनुसार 90 दिनों की अवधि के भीतर एक स्पष्ट और कारण सहित (well-reasoned and speaking order) निर्णय पारित करना होगा। इन याचिकाओं के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी जहां पर शिक्षकों की ही जीत हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन न किए जाने पर यह अवमानना याचिका दायर हुई
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