इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने की राह फिर अटकी, पीएचक्यू ने रोकी प्रक्रिया

Sourabh Bhatnagar | Jul 03, 2026, 11:26 IST
इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने की राह फिर अटकी
मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने कार्यवाहक उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया फिर रोक दी है। 95 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद का प्रभार नहीं मिलेगा। एसएएफ के 92 सब इंस्पेक्टरों का आदेश भी वापस होगा। जीएडी के नए निर्देश के बाद यह फैसला लिया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पुलिस मुख्यालय ने कार्यवाहक उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया फिर रोक दी है।
  • 95 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद का कार्यवाहक प्रभार अब नहीं मिलेगा।
  • एसएएफ (Special Armed Force) के 92 सब इंस्पेक्टरों का प्रभार आदेश भी वापस होगा।
  • जीएडी (General Administration Department) ने 30 जून को नए पदोन्नति निर्देश जारी किए थे।
  • अब पदोन्नति नियम 2025 के तहत ही आगे की कार्रवाई होगी।

मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में एक बार फिर कार्यवाहक उच्च पद प्रभार की व्यवस्था रोक दी गई है। पिछले महीने ही पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने इसे दोबारा शुरू करने का फैसला लिया था। अब यह फैसला वापस लेना पड़ा है। इससे 95 इंस्पेक्टरों की डीएसपी पद पर पदोन्नति में देरी होना तय है। ये सभी अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।



क्या है पूरा विवाद

पुलिस मुख्यालय भोपाल ने प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को नया आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कार्यवाहक रूप से उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। इसका मतलब है कि अब किसी भी अधिकारी को अस्थायी तौर पर बड़ा पद नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था पहले भी कई बार रुकी और शुरू हुई है।



इससे पहले 10 फरवरी 2021 को एक निर्देश जारी हुआ था। इसी के आधार पर अधिकारियों को कार्यवाहक प्रभार दिया जाता था। पिछले साल जून में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 लागू हुआ। इसके बाद यह व्यवस्था फिर रोक दी गई थी। एमपी हाईकोर्ट से इस मामले में कोई आदेश नहीं आया है। इसलिए पिछले महीने कार्यवाहक पदोन्नति फिर शुरू करने का फैसला हुआ था।



जीएडी के आदेश का असर

अब मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी ने 30 जून 2026 को नया निर्देश जारी किया था। इसमें साफ कहा गया था कि पदोन्नति नियम 2025 के तहत ही आगे पदोन्नति की जाए। शासन ने बताया कि महाधिवक्ता के विधिक परामर्श के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय को फिर अपना फैसला बदलना पड़ा।



पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों को निर्देश दिया है कि कार्यवाहक प्रभार से जुड़ी हर प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। आगे की कार्रवाई अब जीएडी के नए निर्देशों के अनुसार ही होगी। इससे साफ है कि पदोन्नति अब नियमित प्रक्रिया से ही होगी। पहले जैसी अस्थायी व्यवस्था फिलहाल संभव नहीं है।



95 इंस्पेक्टरों की स्थिति

मध्यप्रदेश पुलिस विभाग ने पहले 95 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद का कार्यवाहक प्रभार देने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा था। यह प्रस्ताव (डीजीपी मध्यप्रदेश पुलिस) अब बेअसर हो गया है। शासन ने नियमित पदोन्नति नियम के तहत काम करने का आदेश दिया है। इसलिए कार्यवाहक प्रभार की कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है।



अब गृह विभाग नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करेगा। सबसे पहले सभी इंस्पेक्टरों (police promotion) की सीआर यानी गोपनीय चरित्रावली मंगाई जाएगी। इसके बाद एमपीपीएससी (Madhya Pradesh Public Service Commission) को प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिर डीपीसी यानी डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की बैठक होगी। इसी बैठक के बाद इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद पर नियमित पदोन्नति मिल सकेगी। यह पूरी प्रक्रिया समय लेने वाली है।



एसएएफ में भी असर

इस फैसले का असर विशेष सशस्त्र बल यानी एसएएफ पर भी पड़ा है। एसएएफ के आईजी इरशाद वली ने एक जुलाई को आदेश जारी किया था। इसमें 92 सब इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर पद का कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। यह आदेश पुलिस मुख्यालय के पुराने निर्देशों के आधार पर जारी हुआ था।



अब पीएचक्यू का नया आदेश आने के बाद यह प्रभार भी रुक जाएगा। एसएएफ के 92 सब इंस्पेक्टरों को फिलहाल इंस्पेक्टर पद का प्रभार नहीं मिलेगा। उनका आदेश भी वापस लिया जा सकता है। यह स्थिति उन सभी अधिकारियों के लिए निराशाजनक है जो लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।



आगे क्या होगा

फिलहाल पुलिस महकमे में पदोन्नति को लेकर असमंजस बना हुआ है। कार्यवाहक व्यवस्था और नियमित पदोन्नति नियम के बीच लगातार बदलाव हो रहा है। इससे कई अधिकारियों का करियर प्रभावित हो रहा है। अब सबकी नजर गृह विभाग और एमपीपीएससी की आगे की प्रक्रिया पर टिकी है। नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने में अभी और समय लग सकता है।



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