MP प्रमोशन की हड़बड़ी: दागी अफसरों की सजा माफ, ताक पर रखा पुलिस मैनुअल
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- पदोन्नति में पुलिस विभागीय मैनुअल के नियमों की अनदेखी का आरोप।
- एक दर्जन से ज्यादा SI और TI को नियमों के खिलाफ प्रमोशन।
- कुछ अधिकारियों पर विभागीय जांच या सजा पहले से लंबित थी।
- भोपाल-इंदौर जोन में प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद दिया प्रमोशन।
- जल्दबाजी में हुई प्रक्रिया पर अब विभाग में ही उठ रहे सवाल।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा हाल ही में की गई SI से TI और TI से DSP पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विभागीय पदोन्नति मैनुअल में साफ लिखा है कि जिस अधिकारी पर विभागीय जांच, सजा या प्रतिकूल सीआर दर्ज हो उसे प्रमोशन नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद मुख्यालय ने जल्दबाजी में लिस्ट जारी कर दागियों को भी पदोन्नति दे डाली।
मैनुअल को किनारे रखकर दी पदोन्नति
पुलिस विभाग के मैनुअल के पैरा 5.2 के अनुसार पदोन्नति से पहले अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय चरित्रावली और लंबित विभागीय जांच की स्क्रीनिंग जरूरी है।
इस बार स्क्रीनिंग कमेटी ने कई फाइलों को बिना पूरी जांच के पास कर दिया। सूत्रों का कहना है कि रिक्त पद भरने के दबाव में यह जल्दबाजी की गई।
लंबित जांच, खराब सीआर भी नजरअंदाज
भोपाल जोन के एक टीआई पर पिछले साल अनुशासनहीनता का मामला दर्ज था और उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि भी मिली थी। इसके बावजूद उनका नाम प्रमोशन लिस्ट में शामिल कर दिया गया।
इसी तरह इंदौर रेंज के एक एसआई के खिलाफ विभागीय जांच लंबित थी, लेकिन उन्हें भी SI से TI पद पर पदोन्नत कर दिया गया। ग्वालियर के एक अन्य अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी थी, फिर भी उनका नाम प्रमोशन सूची में आ गया। सागर संभाग में भी आरोपों में घिरे और जांच का सामना करने वाले अफसर प्रमोशन पाने में कामयाब हो गए।
विभाग में ही नाराजगी
इस फैसले से उन अधिकारियों में नाराजगी है जो सालों से क्लीन रिकॉर्ड के साथ प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। कई अफसरों ने लिखित शिकायत भी की है कि नियमों से हटकर प्रमोशन देने से विभाग का मनोबल गिरेगा। उनका कहना है कि अगर सजा पाए लोगों को भी तरक्की मिलेगी तो अनुशासन कैसे बचेगा।
अफसरों की कमजोर दलील
पुलिस मुख्यालय भोपाल का कहना है कि कुछ मामलों में मानवीय आधार और सेवा अवधि को देखते हुए छूट दी गई है। हालांकि शिकायतें सामने आने के बाद ऐसे अधिकारियों की पदोन्नति सूची की समीक्षा कराई जा रही है। यदि आरोप गंभीर और तथ्यात्मक पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के प्रमोशन पर रोक लग सकती है।
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