MP की बिजली कंपनियों का डिजिटल सिस्टम, चोरी रोकने के लिए ऐप, फिर भी शिकायतों पर एरर!

Atul Dwivedi | Oct 19, 2026, 17:54 IST
मध्यप्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए बनाए गए ऐप और पोर्टल की द सूत्र ने पड़ताल की।
द सूत्र के खुलासे के बाद मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों के होश उड़े हुए हैं। ग्वालियर में मौजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया के जयविलास पैलेस का जीरो या कम बिल पूरे देश में बहस का मुद्दा बना हुआ है। जनता को समझ नहीं आ रहा कि 400 कमरों वाले महल का बिल नाममात्र या फिर जीरो कैसे आ सकता है?
The Sootr's investigation Madhya Pradesh's electricity theft reporting system reveals complaints pending for three months and technical errors on power company's portal.

दूसरी तरफ द सूत्र ने एक और पड़ताल की। हमने पता किया कि क्या बिजली चोरी रोकने या पकड़ने के लिए बिजली कंपनियों ने कोई व्यवस्था की है? क्या कोई ऐप या पोर्टल लॉन्च किया है? हमें इसका जवाब भी मिला।



सबसे बड़ी व्यवस्था तो पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने की थी। कंपनी ने बिजली चोरी रोकने और शिकायत दर्ज करने के लिए अलग ऐप ही लॉन्च कर दिया। लेकिन क्या इससे बिजली चोरी रुकी?



दावा किया गया कि जो बिजली चोरी पकड़ने में मदद करेगा, उसे 50 हजार रुपए का इनाम मिलेगा। वहीं, बिल जमा करने और दूसरी शिकायतों के लिए भी बिजली कंपनियों ने पोर्टल और ऐप तैयार किए हैं।



सबसे पहले आपको बता दें कि इस खबर में तीन बिजली कंपनियों की पड़ताल की गई है। पहली है मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड। दूसरी है पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और तीसरी है पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड। तीनों ही कंपनियां अपने नाम के अनुरूप प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली सप्लाई करती हैं।



मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का मोबाइल ऐप Upay नाम से प्ले स्टोर पर मिल जाएगा। कंपनी का वेब पोर्टल portal.mpcz.in है।



वहीं, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का मोबाइल ऐप V Mitra नाम से मौजूद है। यही ऐप बिजली चोरी पकड़ने के लिए बनाया गया था। कंपनी का वेब पोर्टल http://www.mpez.co.in है। रही बात पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की, तो इसका ऐप Urjas 2.0 नाम से दर्ज है। इसका वेब पोर्टल mpwz.co.in है।



अब आपको बताते हैं कि हमारी पड़ताल में क्या पता चला ?



V Mitra App (पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड)

इस ऐप को पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बनाया है। ऐप को सिर्फ बिजली चोरी पकड़ने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। शिकायत दर्ज करने के लिए आपको पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का ग्राहक होना जरूरी है।



V Mitra App सिर्फ बिजली चोरी पकड़ने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।

यानी आप जबलपुर, रीवा या फिर सागर संभाग में रहते हैं, तो ही आप इस ऐप के जरिए शिकायत कर सकते हैं। लेकिन आलम ये है कि पूर्व क्षेत्र के ग्राहक जो बिजली चोरी की शिकायत कर रहे हैं, वो दूर नहीं हो रही है।



द सूत्र को मिली शिकायतें

मामले की पड़ताल के दौरान द सूत्र को जुलाई 2026 की भी शिकायतें मिलीं जो पेंडिंग हैं।



बिजली चोरी की शिकायत पोर्टल पर पेंडिंग

शिकायत करने के लिए आपको बिजली चोरी (Electricity Theft) करने वाले का IVRS नंबर डालना होता है, ताकि सटीक जानकारी मिल सके। हालांकि अगर बिजली चोरी करने वाले का IVRS नंबर आप नहीं जानते तो भी शिकायत दर्ज हो सकती है। इसके लिए ऐप आपके फोन के GPS का इस्तेमाल करेगा, ताकि लोकेशन पता चल सके।



लेकिन आलम ये है कि शिकायत दर्ज किए 3-3 महीने बीत जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि लाइव लोकेशन, फोटो और वीडियो देखकर विजिलेंस टीम तुरंत वहां पहुंच सकती है। लेकिन लाइव मॉनिटरिंग के बाद भी बिजली कंपनी की विजिलेंस टीम न जानें किस इंतजार में है।



दावा किया गया था कि बिजली चोरी पकड़वाने वाले को 50 हजार तक का ईनाम दिया जाएगा। लेकिन जब शिकायत पर एक्शन हो नहीं रहा तो ईनाम किस बात का। यानी पैसा भी बचा लिया, काम भी नहीं किया।



पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं का स्टेटस

कंपनी ने क्या कहा ?

मामले में द सूत्र ने बिजली कंपनी से बात की। कंपनी का कहना है कि बिजली चोरी की काफी सारी शिकायतें हैं। कर्मचारियों के ऊपर लोड ज्यादा है। कभी कभी देर हो जाती है।



ऐप बनाने में कितना खर्च आया, इसके जवाब में कंपनी ने कहा कि ऐप बिल्कुल फ्री में बना है। ऐप को कंपनी के ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ने तैयार किया है।



Upay (मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड)

मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी रोकने के लिए अलग से ऐप नहीं बनाया है। उपभोक्ता इसके Upay ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। इसी ऐप में शिकायत दर्ज कराने का ऑप्शन मिलता है। यहां सीधे बिजली चोरी की शिकायत का अलग से ऑप्शन नहीं मिलता। आपको कॉल करके या फिर व्हॉट्सएप के जरिए शिकायत दर्ज करनी पड़ती है।



हालांकि मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का ऐप ठीक तरीके से रिस्पॉन्स करते पाया गया। ऐप को इस्तेमाल करना भी ज्यादा कठिन नहीं है।



Urjas 2.0 (पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी)

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने इस ऐप को बनाया है। कंपनी का दावा है कि बिजली चोरी रोकने के लिए ऐप में Information of Electricity Theft का ऑप्शन है।



दूसरी तरफ कंपनी का जो वेब पोर्टल है mpwz.co.in इसमें भी रिपोर्ट थैफ्ट का विकल्प दिया गया है, लेकिन ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद स्क्रीन पर शिकायत दर्ज करने का विकल्प नहीं आता। मोबाइल में तो रिपोर्ट थैफ्ट ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद एरर मैसेज शो होता है।



FAQs:

  1. बिजली चोरी रोकने के लिए कौन-कौन से ऐप उपलब्ध हैं?
    बिजली चोरी रोकने के लिए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का ऐप V Mitra, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का ऐप Upay, और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का ऐप Urjas 2.0 उपलब्ध हैं।
  2. क्या V Mitra ऐप से बिजली चोरी की शिकायत दर्ज करने में कोई समस्या आ रही है?
    जी हां, V Mitra ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करने पर कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायतें की हैं कि उनकी शिकायतें पेंडिंग हैं और कार्रवाई में काफी समय लग रहा है।
  3. बिजली कंपनियों का बिजली चोरी के मामलों में जवाब क्या है?
    बिजली कंपनियों का कहना है कि शिकायतों की संख्या अधिक है और कर्मचारियों पर लोड ज्यादा होने के कारण कार्रवाई में देर होती है।
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