MP में पदोन्नति नियम पर क्यों भड़के अफसर? हर वर्ग में भारी नाराजगी!
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में दस साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुई थी।
- अब इस पर विवाद खड़ा हो गया है।
- गृह विभाग के अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
- हजारों कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए हैं।
- अधिकारी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
मध्य प्रदेश में करीब दस साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बावजूद यह प्रक्रिया अब विवादों में घिरती जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी (General Administration Department) के नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं।
पहले कमर्शियल टैक्स विभाग में शिकायत सामने आई थी। अब गृह विभाग के अधिकारियों ने भी यही आरोप लगाया है। उन्होंने गृह विभाग की सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की है। अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति नियम-2025 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है।
शिकायतकर्ता अधिकारियों के मुताबिक इससे सामान्य वर्ग को नुकसान हुआ है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं। हजारों की संख्या में पात्र कर्मचारी और अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए हैं। यह मामला अब सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं है। धीरे-धीरे कई विभागों के कर्मचारी इसमें शामिल हो रहे हैं।
पुलिस विभाग में सबसे ज्यादा विवाद
प्रदेश में सबसे अधिक पदोन्नति पुलिस विभाग में हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पुलिस महकमे में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं। सीएम मोहन यादव खुद इस उपलब्धि की सार्वजनिक रूप से तारीफ कर चुके हैं। वहीं, अब यही प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
पदोन्नति से वंचित रह गए अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि विभाग ने गलती स्वीकार भी कर ली है। इसके बावजूद कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे नाराज अधिकारी अब न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या है नियम-2025 की शर्त
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नियमों की सही व्याख्या नहीं की गई। लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 की कंडिका-6 में साफ प्रावधान है। इसके मुताबिक यदि किसी चयन वर्ष में विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की बैठक समय पर नहीं होती है, तो अगली बैठक में पहले उसी लंबित वर्ष की अलग चयन सूची बनानी होती है।
इसके बाद ही वर्तमान और आगामी रिक्तियों के लिए नई चयन सूची तैयार की जानी चाहिए। यह प्रक्रिया दो चरणों में होनी थी। पहले पुराने लंबित मामले निपटाए जाने थे। उसके बाद ही नई भर्तियों पर विचार होना था।
आरोप है कि ज्यादातर विभागों ने इस प्रावधान को नजरअंदाज कर दिया। साल 2025 की रिक्तियों के लिए तय प्रक्रिया अपनाने की बजाय बाद के वर्षों के आधार पर सीधे पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए। इससे 2025 में पात्र हुए कई कर्मचारी सूची से बाहर हो गए। यही बात सबसे ज्यादा विवाद की वजह बनी है।
जीएडी का स्पष्टीकरण
सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 जारी किए थे। इसके कुछ दिन बाद यानी 30 जून 2025 को विभाग ने एक स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें साफ बताया गया कि किस डीपीसी के लिए किस साल की गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर (Confidential Report) को आधार बनाया जाएगा।
स्पष्टीकरण के अनुसार साल 2026 में होने वाली डीपीसी के लिए वित्त वर्ष 2024-25 से 2020-21 तक की सीआर देखी जानी थी। वहीं 2025 में सितंबर से नवंबर के बीच होने वाली डीपीसी के लिए 2023-24 से 2019-20 तक की सीआर पर विचार होना था। इस डीपीसी में दिसंबर 2026 तक के रिक्त पद शामिल किए जाने थे।
इसके अलावा 2025 की विशेष डीपीसी भी तय की गई थी। इसमें दिसंबर 2025 तक के पद शामिल हैं। इसके लिए 2022-23 से 2018-19 तक की सीआर के आधार पर पात्रता तय होनी थी। यानी हर डीपीसी के लिए साफ तौर पर अलग-अलग सीआर वर्ष तय किए गए थे। इसके बावजूद विभागों ने इसका पालन नहीं किया।
अधिकारियों की मांग और चेतावनी
शिकायतकर्ता अधिकारियों का कहना है कि जीएडी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभागों ने मनमानी की। इससे बड़ी संख्या में पात्र अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए। उन्होंने पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही नियमों के मुताबिक संशोधित आदेश जारी करने को कहा है।
अगर विभाग इस मांग को नहीं मानता है तो अधिकारी न्यायालय का रुख करेंगे। यह चेतावनी सीधे तौर पर सरकार को दी गई है। मामला अब सिर्फ प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा। इसके कानूनी लड़ाई में बदलने की पूरी संभावना है।
इस पूरे विवाद ने प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। कई विभागों के कर्मचारी संगठन भी अब इस मुद्दे पर मुखर हो रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और शिकायतें सामने आ सकती हैं। सरकार की ओर से अभी इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर हजारों सरकारी कर्मचारियों के करियर और अधिकारों से जुड़ी है। पदोन्नति में पारदर्शिता और नियमों का पालन प्रशासनिक न्याय का आधार है। अगर नियमों की गलत व्याख्या होती है, तो यह समानता के संवैधानिक सिद्धांत पर सवाल खड़ा करता है।
सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग दोनों के हितों की रक्षा जरूरी है। सरकारी तंत्र में जवाबदेही और सुधार की मांग समाज के लिए जरूरी है। यह खबर आम जनता को यह समझने में मदद करती है कि प्रशासनिक फैसले किस तरह लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। पारदर्शी और नियम आधारित व्यवस्था हर लोकतांत्रिक ढांचे की जरूरत है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में पदोन्नति विवाद क्यों हुआ है?
गृह विभाग के अधिकारियों का आरोप है कि पदोन्नति नियम-2025 के प्रावधानों का सही पालन नहीं हुआ। इससे कई पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। कमर्शियल टैक्स विभाग के बाद अब गृह विभाग में भी यह शिकायत सामने आई है। - पदोन्नति नियम-2025 की कंडिका-6 में क्या प्रावधान है?
इसके अनुसार अगर किसी चयन वर्ष की डीपीसी बैठक समय पर नहीं होती, तो अगली बैठक में पहले उसी लंबित वर्ष की अलग चयन सूची बनानी होती है। इसके बाद ही नई रिक्तियों के लिए सूची तैयार होनी चाहिए।
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