अब दागी अफसरों पर होगी सख्ती, प्रमोशन के साथ छिन सकता है प्रभार

Ramanand Tiwari | Jul 12, 2026, 22:56 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया के बीच कर्मचारियों के रिकॉर्ड जांचे जा रहे हैं। दागी सेवा रिकॉर्ड वालों की प्रमोशन और कार्यवाहक जिम्मेदारी प्रभावित हो सकती है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • प्रदेश में नियमित पदोन्नति प्रक्रिया चल रही है।
  • दागी और विवादित कर्मचारियों पर सरकार करेगी सख्ती।
  • विभागीय-लोकायुक्त जांच वालों की अटक सकती है पदोन्नति।
  • कार्यवाहक प्रभार भी लिया जा सकता है वापस।
  • सभी विभागों में सेवा रिकॉर्ड और एसीआर की दोबारा जांच।
  • पुलिस समेत कई विभागों के हजारों कर्मचारी समीक्षा के दायरे में।

मध्य प्रदेश में वर्षों बाद नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होते ही हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की दोबारा जांच शुरू हो गई है। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि केवल बेदाग सेवा रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों को ही प्रमोशन मिलेगा।



इन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच, लोकायुक्त जांच, आपराधिक मामला या गंभीर शिकायत लंबित है, उनकी पदोन्नति रुक सकती है। इतना ही नहीं, ऐसे अधिकारियों का मौजूदा कार्यवाहक प्रभार भी वापस लिया जा सकता है।



क्या है सरकार का नया फोकस?

सरकार का उद्देश्य सिर्फ पदोन्नति देना नहीं, बल्कि प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना भी है। इसी वजह से पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद सभी विभागों में पात्र कर्मचारियों की नए सिरे से स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।



mp Promotion में इन पर ज्यादा असर

जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ...

  • विभागीय जांच लंबित है।
  • आपराधिक प्रकरण दर्ज है।
  • लोकायुक्त या अन्य एजेंसियों की जांच चल रही है।
  • एसीआर (वार्षिक गोपनीय चरित्रावली) में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज है।
  • अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप हैं।
  • ऐसे कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति सूची से बाहर रखा जा सकता है।

कार्यवाहक प्रभार भी खतरे में

सरकार ने विभागों से कहा है कि समीक्षा के दौरान यदि कोई अधिकारी नियमों के अनुसार अयोग्य पाया जाता है, तो उसका वर्तमान कार्यवाहक प्रभार भी वापस लेने पर विचार किया जाए। यानी केवल प्रमोशन ही नहीं, पहले से मिला अतिरिक्त दायित्व भी छिन सकता है।



क्यों करनी पड़ रही है दोबारा जांच?

2002 के एमपी प्रमोशन नियम न्यायालय में निरस्त होने के बाद नियमित पदोन्नतियां लंबे समय तक रुकी रहीं। इसके बाद 2021 में अंतरिम व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। अब नए नियम लागू होने के बाद सरकार स्थायी पदोन्नति से पहले हर रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर रही है, ताकि भविष्य में कानूनी विवाद न हो।



इन विभागों में सबसे ज्यादा असर

पुलिस, राजस्व, सहकारिता, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा समेत कई विभागों में समीक्षा चल रही है। सबसे ज्यादा प्रभाव पुलिस विभाग पर पड़ सकता है, जहां विभागीय जानकारी के अनुसार करीब 15 हजार पुलिसकर्मी विभिन्न उच्च पदों का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब इनके सेवा रिकॉर्ड और पात्रता की फिर से जांच की जा रही है।



साफ रिकॉर्ड वालों के लिए बड़ा मौका

जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड अच्छा है और जिनके खिलाफ कोई गंभीर मामला लंबित नहीं है, उनके लिए नियमित पदोन्नति का रास्ता साफ माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियम आधारित और पारदर्शी होगी, ताकि योग्य कर्मचारियों को बिना विवाद पदोन्नति मिल सके।



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