AI और सैटेलाइट से तय होंगे मध्यप्रदेश में जमीन के नए रेट्स, 1 अप्रेल से लागू होगी नई गाइडलाइन

Amresh Kushwaha | Feb 08, 2026, 15:46 IST
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मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से जमीन की नई दरें लागू होंगी। सरकार AI और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से नई गाइडलाइन तैयार कर रही है। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति इस गाइडलाइन की समीक्षा कर इन्हें अंतिम रूप देगी।

BHOPAL. मध्यप्रदेश में अब जमीन खरीदने और बेचने का काम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी की कीमतें तय करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए जमीन की नई कलेक्टर गाइडलाइन बनाई जा रही है। ये



नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी। इसका मुख्य मकसद बाजार की असली कीयॉमतों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क खत्म करना है।



पंजीयन विभाग ने अपनाया नया तरीका

पंजीयन विभाग ने इस बार एक नया तरीका अपनाया है। मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) की मदद से पुराने और नए सैटेलाइट तस्वीरें मंगवाई गई हैं। इन तस्वीरों की तुलना की जाएगी, ताकि यह पता चल सके कि पिछले 12 महीनों में कहां जमीन पर प्लॉटिंग हुई है या कहां नई कॉलोनियां बन गई हैं। अक्सर जो जमीन कागजों पर कृषि भूमि दिखाई जाती है, असल में वहां ऊंची इमारतें खड़ी हो जाती हैं। सैटेलाइट डेटा इस तरह की गलतियों को ठीक करेगा।



जमीन के डायवर्सन का लिया गया डेटा

विभाग ने नई गाइडलाइन को वैज्ञानिक बनाने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) से मदद ली है। यहां से जमीन के डायवर्सन (बदलाव) का पूरा डेटा लिया गया है, ताकि यह पता चल सके कि कितनी कृषि भूमि अब आवासीय (Residential) या व्यावसायिक (Commercial) उपयोग में बदल चुकी है। अब इन जमीनों पर खेती के रेट नहीं, बल्कि विकसित प्लॉट के रेट लागू होंगे। इसके अलावा, कृषि विभाग से भी उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता का डेटा लिया गया है।



जमीनी सर्वे के लिए बनाई गई समिति

जमीनी सर्वे के लिए उप जिला मूल्यांकन समिति (Sub-District Valuation Committee) बनाई गई है। इसका नेतृत्व एसडीएम (SDM) करेंगे। यह समिति एआइ (AI) की मदद से उन इलाकों को पहचान रही है। जहां कलेक्टर रेट से ज्यादा कीमतों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। एआइ का इस्तेमाल ऐसे ट्रांजेक्शन पैटर्न्स को पकड़ने के लिए हो रहा है, जो सामान्य आंखों से छूट जाते हैं। इससे अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर रोक लगेगी और सरकारी खजाने में राजस्व (Revenue) की बढ़ोतरी होगी।



कलेक्टर से केंद्रीय बोर्ड तक होगी मंजूरी की प्रक्रिया

फिलहाल सभी जिलों में प्रस्ताव तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति इन प्रस्तावों की समीक्षा कर इन्हें अंतिम रूप देगी। इसके बाद प्रस्तावों को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड (Central Valuation Board) के पास भेजा जाएगा। बोर्ड की मुहर लगते ही, 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में जमीन की नई कीमतें प्रभावी हो जाएंगी। महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर के अनुसार, इस वैज्ञानिक पद्धति से दरों में पारदर्शिता (Transparency) आएगी।



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