एमपी में अतिथि शिक्षकों की आउटसोर्सिंग पर हाईकोर्ट का ब्रेक, कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को HC से राहत

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को आउटसोर्सिंग में भेजने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुरानी व्यवस्था बरकरार रखने का आदेश दिया है।

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Neel Tiwari
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High Courts break on outsourcing of guest teachers in MP

Photograph: (the sootr)

NEWS IN SHORT

  • प्रदेश के लगभग 92,000 सरकारी स्कूलों से जुड़ा मामला।
  • हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिंग आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।
  • राज्य शासन और DPI सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी।
  • अतिथि शिक्षकों से जुड़ा बड़ा मामला।
  • 17 फरवरी को होगी अगली अहम सुनवाई।

INTRO 

मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को लेकर हाई कोर्ट ने बड़ा और अहम हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने अतिथि शिक्षकों को आउटसोर्स व्यवस्था में डालने के राज्य शासन के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। करीब 92 हजार स्कूलों से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 17 फरवरी तय की है।

NEWS IN DETAIL

मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स के पद स्वीकृत किए गए थे। इन पदों पर नियुक्तियां भारत सरकार और मध्यप्रदेश शासन की संयुक्त नीति के तहत की गईं। वर्षों से इन स्कूलों में गेस्ट टीचर फैकल्टी सिस्टम के माध्यम से कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स की सेवाएं ली जा रही थीं। यह इंस्ट्रक्टर्स छात्रों को कंप्यूटर और तकनीकी शिक्षा ज्ञान दे रहे है। 

नवंबर में अचानक बदली नीति

नवंबर माह में शासन स्तर पर एक आदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि दो सत्र पूरे होने के बाद अब कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को अतिथि शिक्षक के रूप में नहीं रखा जाएगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया कि अब इन पदों पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति की जाएगी। गेस्ट टीचर फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम से इन्हें बाहर कर दिया जाएगा। इस फैसले ने हजारों शिक्षकों के सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा कर दिया।

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92 हजार स्कूलों पर पड़ने वाला सीधा असर

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमालिया ने कोर्ट को बताया गया कि मध्यप्रदेश में लगभग 92 हजार शासकीय स्कूल संचालित हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों में एक या दो कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स कार्यरत हैं, जो वर्षों से छात्रों को तकनीकी शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे में नीति में अचानक बदलाव से न केवल शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होंगी, बल्कि स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की निरंतरता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

आरक्षण और भविष्य की भर्ती से जुड़ा अहम मुद्दा

याचिका में एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य कोर्ट के सामने रखा गया। राज्य शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, यदि कोई अतिथि शिक्षक तीन सत्र या कुल 200 दिन की सेवा पूरी करता है, तो उसे भविष्य में होने वाली शिक्षक भर्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि उन्हें ढाई साल बाद आउटसोर्सिंग में डाल दिया गया, तो वे यह आवश्यक अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे और वैधानिक रूप से मिलने वाले इस लाभ से वंचित हो जाएंगे।

कोर्ट ने दिया यथास्थिति बनाये रखने का आदेश

मामले की सुनवाई के बाद जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मनिंदर एस भट्टी की सिंगल बेंच ने प्रथम दृष्टया यह माना कि शासन का यह आदेश अतिथि शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करता है।

अदालत ने इस आधार पर अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी किया। स्पष्ट निर्देश दिए कि अगला प्रभावी आदेश पारित होने तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए। इसका मतलब है कि फिलहाल अतिथि कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार और DPI को जवाब देने नोटिस जारी कर दिया है।

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119 याचिकाकर्ताओं को सीधा लाभ, अंतिम फैसले पर नजर

इस मामले में कुल 119 याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिन्हें हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से तत्काल राहत मिली है। हालांकि, इस फैसले का असर प्रदेशभर के हजारों कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर्स पर पड़ेगा। अब सभी की निगाहें 17 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अतिथि शिक्षक व्यवस्था बनी रहेगी या आउटसोर्सिंग को अंतिम मंजूरी मिलेगी।

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