हर्ष रोडलाइंस का करोड़ों का ठेका हाईकोर्ट ने छीना, MSE बनने की चाल नाकाम!

हर्ष रोडलाइंस को कोयला परिवहन का बड़ा ठेका मिला था। कंपनी ने खुद को माइक्रो एंटरप्राइज बताकर फायदा लिया था। जबलपुर हाईकोर्ट ने अब इस ठेके को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इस पूरे काम को गैरकानूनी करार दिया है।

author-image
Neel Tiwari
New Update
harsh roadlines ncl coal tender high court verdict mse scam

News in short

  • बड़ी कंपनी को MSE का फायदा दे दिया था।

  • हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड को माइक्रो बताकर पूरा ठेका सौंपा गया था।

  • पात्रता दिखाने के लिए हर्ष एंटरप्राइजेज के टर्नओवर और अनुभव का सहारा लिया गया था।

  • हाईकोर्ट ने माइक्रो नीति के दुरुपयोग को गंभीर माना है।

  • एनसीएल को टेंडर दोबारा पारदर्शी तरीके से करने के आदेश दिए हैं।

News in detail

एनसीएल के कोयला परिवहन टेंडर से जुड़ा पूरा मामला

नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने कोयला माइनिंग के लिए बड़ा ई-टेंडर टेंडर निकाला था। इसमें दो साल तक कोयला ढोने का काम होना था। ट्रकों और वैगनों से कुल 62.05 लाख मीट्रिक टन कोयला जाना था।

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 96 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। बोलियां लगने के बाद कंपनियों की वित्तीय जांच की गई। गेरा ग्रीन इनोवेशन कंपनी ने सबसे कम रेट भरे थे। सबसे कम रेट होने के कारण उसे L-1 चुना गया था।

हर्ष रोडलाइंस को माइक्रो बताकर पूरा ठेका देने का फैसला

सबसे कम रेट न होने पर भी काम हर्ष रोडलाइंस को सौंप दिया गया था। एनसीएल ने कहा कि यह कंपनी माइक्रो एंटरप्राइज की श्रेणी में आती है। साथ ही, कंपनी का रेट असली L-1 से 15 प्रतिशत के दायरे में है। कंपनी से L-1 दर मैच कराए गए थे। एनसीएल ने तर्क दिया कि टेंडर नॉन-स्प्लिटेबल है। इसलिए पूरा ठेका अकेले हर्ष रोडलाइंस को दे दिया जाएगा।

गेरा ग्रीन इनोवेशन की हाईकोर्ट में चुनौती

इस फैसले से असंतुष्ट होकर गेरा ग्रीन इनोवेशन ने हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड वास्तव में माइक्रो एंटरप्राइज नहीं है। साथ ही, उसने माइक्रो नीति का लाभ पाने के लिए तथ्यों को छिपाया है। याचिकाकर्ता ने बताया कि कंपनी का वास्तविक कारोबार और अनुभव माइक्रो की सीमा से कहीं अधिक है।

हर्ष एंटरप्राइजेज के टर्नओवर पर आधारित थी पात्रता

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सामने यह बात आई कि हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड हाल ही में गठित कंपनी है। इसने अपनी पुरानी फर्म के दस्तावेज दिखाए थे। पुराना अनुभव दिखाकर कंपनी ने टेंडर में हिस्सा लिया था। उनका टर्नओवर 47 करोड़ से 145 करोड़ रुपए तक था। यह कमाई माइक्रो बिजनेस की सीमा से बहुत ज्यादा है। इतनी बड़ी कमाई वाली कंपनी छोटी नहीं हो सकती है।

माइक्रो दर्जा लेते समय बड़े कारोबार को किया गया नजरअंदाज

कोर्ट ने पाया कि रजिस्ट्रेशन के वक्त चालाकी की गई थी। कंपनी ने नए पैन कार्ड पर जीरो टर्नओवर दिखाया था। वहीं, ठेका पाने के लिए पुरानी फर्म का सहारा लिया गया था। पात्रता के लिए उन्होंने जीएसटी के आधार पर जिरो या नाम मात्र का टर्नओवर दिखाया था। कोर्ट ने इस हरकत को आधा सच करार दिया है। कंपनी ने सुविधानुसार सच छिपाकर नीति का गलत लाभ लिया था।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी कंपनी एक ही समय पर दो विपरीत दावे नहीं कर सकती है। यदि हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड माइक्रो एंटरप्राइज होने का लाभ लेना चाहती है, तो उसे बड़े व्यवसाय हर्ष एंटरप्राइजेज के अनुभव और टर्नओवर से दूरी बनानी होगी। नीति का मकसद असली छोटे उद्योगों को आगे बढ़ाना है। बड़े व्यवसायों को फायदा पहुंचाना इस कानून का उद्देश्य नहीं है।

MSE का फायदा सिर्फ उसे जो सच में माइक्रो एंटरप्राइज

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने माना कि रेट मैच करने का मौका देना गलत था। हर्ष रोडलाइंस को मिला यह विशेष मौका नियम के खिलाफ था। सरकारी नीति का लाभ केवल असली छोटी कंपनियों को मिलना चाहिए। यह फायदा उन व्यवसायों के लिए है जो सच में माइक्रो हैं।

ठेका रद्द, एनसीएल को टेंडर दोबारा करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में जारी लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस को रद्द कर दिया है। साथ ही नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड को निर्देश दिए गए कि वह पूरे टेंडर को दोबारा प्रक्रिया में ले। इस बार हर्ष रोडलाइंस प्राइवेट लिमिटेड को माइक्रो एंटरप्राइज मानकर किसी भी प्रकार की प्राथमिकता न दी जाए।

सरकारी टेंडरों में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा संदेश

यह फैसला सरकारी टेंडरों में ईमानदारी और पारदर्शिता बढ़ाएगा। इससे निष्पक्ष कॉम्पिटिशन को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। कोर्ट ने साफ कर दिया कि नियम सबके लिए समान हैं। सिर्फ कागजों पर छोटा बनकर बड़े ठेके नहीं मिलेंगे। अब चालाकी करके सरकारी पैसा हड़पना मुश्किल होगा। माइक्रो नीति का गलत इस्तेमाल अब बिल्कुल नहीं चलेगा।

ये खबर भी पढ़िए...

मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से, 18 को पेश होगा बजट

MP News: मध्यप्रदेश में आधा दर्जन जिलों के बदलेंगे एसपी

जबलपुर न्यूज: हाईकोर्ट को समय पर नहीं दिया जवाब, संयुक्त संचालक को किया निलंबित

जबलपुर में बरगी बांध की नहर टूटी, आधा दर्जन गांवों में घुसा पानी; कई एकड़ की फसल जलमग्न

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर न्यूज MP News मध्यप्रदेश एनसीएल जबलपुर हाईकोर्ट हर्ष रोडलाइंस
Advertisment