अब आधार से लिंक होंगी हाईकोर्ट में याचिकाएं , बेवजह पेंडिंग याचिकाओं के निपटारे होंगे आसान

हाईकोर्ट में सालों से लंबित मामलों का बोझ कम करने के लिए एक बड़ी पहल हुई है। जबलपुर के एक वकील ने तकनीकी सुधारों को लेकर याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर विचार करने के लिए मंजूर कर लिया। याचिकाओं को आधार से जोड़ने की मांग की गई है।

author-image
Neel Tiwari
New Update
high court pending cases aadhar linking technical improvements

News In short

  • हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ने की मांग की गई है।

  • इससे लंबित मुकदमों का बढ़ता बोझ कम होगा।

  • रजिस्ट्रार जनरल को प्रशासनिक कमेटी के सामने अभ्यावेदन रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को उचित मानते हुए याचिका का निराकरण किया है।

News in detail

जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को गंभीर माना। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए माना कि यदि समय रहते तकनीकी सुधार नहीं हुए तो न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

आधार से लिंक हों याचिकाएं

याचिकाकर्ता, जबलपुर के अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने अपनी बात रखते हुए एक सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में दायर की गई हर याचिका को आधार कार्ड से जोड़ दिया जाए। सुरेंद्र वर्मा का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा डिजिटाइजेशन को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह कदम बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

मृत्यु और समझौते के बाद भी लंबित याचिकाएं

याचिका में बताया गया कि कई मामलों में याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के बावजूद याचिकाएं वर्षों तक हाईकोर्ट में लंबित रहती हैं। इसी तरह जिला न्यायालय में आपसी समझौता हो जाने के बाद भी उससे संबंधित याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित बनी रहती हैं। इससे अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है।

नेशनल प्रिजनर्स पोर्टल जोड़ने की मांग

अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने याचिका में यह भी सुझाव दिया था। कहा था कि नेशनल प्रिजनर्स पोर्टल को हाईकोर्ट की प्रणाली से जोड़ा जाए। इससे जेल में सजा काट रहे कैदियों की स्थिति, सजा अवधि और रिहाई की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। कई मामलों में कैदियों की सजा पूरी होने के बावजूद उनकी अपील हाईकोर्ट में लंबित पाई जाती है।

रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के सुझावों को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए। कहा कि इन सुझावों को अभ्यावेदन मानकर प्रशासनिक कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर फैसला लिया जाना आवश्यक है।

ई गेट पास का भी निवेदन, चीफ जस्टिस बोले शुरू हो चुका 

अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा के जरिए कोर्ट के संज्ञान में एक और बात लाई गई। वो ये कि हाईकोर्ट का गेट नंबर पांच तो काफी भव्य बनाया गया है लेकिन इसके साथ ही पास की सुविधा भी शुरू करनी चाहिए। इससे मावा किलो के साथ-साथ वकीलों से मिलने वाले व्यक्तियों एवं आगंतुकों को भी आसानी हो सके। 

हालांकि जबलपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बताया कि नए गेट के उद्घाटन के साथ ही ई पास सर्विस का भी उद्घाटन कर दिया गया है। आपको बता दें कि ई पास सर्विस इलाहाबाद, पंजाब हरियाणा और कोलकाता जैसे कई हाईकोर्ट में पहले से ही लागू है। इसके जरिए कोर्ट में आने वाले व्यक्ति पहले से ही अपना पास बनवा सकते हैं। अंतिम के समय केवल उन्हें आईडी कार्ड दिखाना होता है।

दिशा-निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण

हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों को उचित करार देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत का मानना है कि तकनीक के बेहतर उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाया जा सकता है।

ये खबरें भी पढ़िए...

याचिकाकर्ताओं के लिए NTA फिर से करायेगा NEET UG, हाइकोर्ट के आदेश

जबलपुर न्यूज : जबलपुर हाईकोर्ट को समय पर नहीं दिया जवाब, संयुक्त संचालक को किया निलंबित

BRTS पर एलिवेटेड कॉरिडोर की तैयारी, उधर लग गई याचिका, दो सर्वे में नहीं मिली थी यूटिलिटी

प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025, 46 याचिकाएं, 15 सुनवाई - DPC के इंतजार में कर्मचारी

जबलपुर न्यूज जस्टिस विनय सराफ चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा जबलपुर हाई कोर्ट चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट
Advertisment