OMR शीट में दो काले गोले किए तो क्या होगी माइनस मार्किंग? हाईकोर्ट में उठा सवाल
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की अलग-अलग परीक्षाओं में हर साल करीब पांच लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं। वहीं एमपी कर्मचारी चयन मंडल यानी ESB की परीक्षाओं में यह संख्या 15 लाख से भी ज्यादा रहती है।
इन परीक्षाओं में किसी न किसी चरण पर उम्मीदवारों को OMR शीट पर जवाब देना होता है। इसमें सही विकल्प के सामने बने गोले को बॉल पेन से पूरी तरह काला करना पड़ता है। लेकिन अब इसी काले गोले को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है।
साल 2022 की इस भर्ती से उठा विवाद
यह मामला इंदौर हाईकोर्ट में साल 2021 में निकली लोक स्वास्थ्य विभाग की असिस्टेंट मैनेजर के 63 पदों की भर्ती से जुड़ा है। इंदौर की दिशा मुखर्जी ने इस भर्ती को लेकर साल 2022 में रिट पिटीशन दायर की थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई।
इसके बाद मामला रिट अपील के जरिए डिवीजन बेंच में पहुंचा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अहम सवाल उठाया कि अगर किसी उम्मीदवार ने OMR शीट में एक सवाल के दो गोले काले कर दिए, तो ऐसी स्थिति में उस जवाब का क्या होगा।
हुआ क्या इस केस में
दरअसल, याचिकाकर्ता दिशा मुखर्जी ईडब्ल्यूएस कैटेगरी से थीं। भर्ती के 63 पदों में से 6 पद ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित थे। नियम के मुताबिक आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को क्वालिफाई करने के लिए 30 फीसदी अंक और अन्य वर्ग के उम्मीदवारों को 40 फीसदी अंक लाना जरूरी था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि सवाल नंबर 41 और 50 में उन्होंने पहले एक विकल्प का गोला काला किया था। बाद में उसे इरेजर से मिटाकर दूसरे विकल्प का गोला काला कर दिया। लेकिन OMR स्कैनर ने उनके बाद में भरे सही जवाब को नहीं पढ़ा, बल्कि पहले वाले मिटाए गए गोले को ही पढ़ लिया। इससे दोनों सवाल गलत माने गए और नेगेटिव मार्किंग के तौर पर उनके दो अंक काट लिए गए।
इसी वजह से वह क्वालिफाई नहीं कर पाईं। उनका तर्क है कि अगर स्कैनर सही गोले पढ़ता तो उन्हें इन दोनों सवालों के 6 अंक मिलते। सवाल यह भी है कि जब पहला गोला इरेजर से मिटा दिया गया था, तो स्कैनर ने उसे कैसे पढ़ लिया और सही जवाब को क्यों नहीं पढ़ा।
हाईकोर्ट ने मंगाए मूल दस्तावेज
इस मामले की सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच कर रही है। हाईकोर्ट ने MPPSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता से जुड़े मूल दस्तावेज भी कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
अपीलकर्ता ने आंसर में दो गोलों को काला किया था, इसलिए उन्हें गलत आंसर मानने की जगह अनदेखा किया जाना चाहिए था। इसमें आगे फिर सुनवाई की जाएगी।
क्या है नियम
साल 2022 की इस परीक्षा में उम्मीदवारों को पहले भरे गए गोले को इरेजर से मिटाकर दूसरा गोला काला करने की छूट थी। लेकिन बाद में ऐसे विवाद सामने आने के बाद MPPSC ने नियम (OMR शीट ऑनलाइन) बदल दिए। अब परीक्षा में इरेजर या व्हाइटनर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है। इतना ही नहीं, उम्मीदवार इन्हें परीक्षा केंद्र पर लेकर आता है तो उसके खिलाफ नकल का प्रकरण (OMR Sheet Instructions) भी बनाया जा सकता है।
मौजूदा नियम के मुताबिक अगर OMR sheet examमें किसी सवाल के दो गोले काले पाए जाते हैं, तो स्कैनर उस जवाब को नहीं पढ़ता। यानी उस सवाल को न सही माना जाता है और न गलत।
यही बात इस केस को उलझाती है। सवाल यह है कि स्कैनर ने सही जवाब वाले काले गोले को क्यों नहीं पढ़ा। अगर पहला गोला पूरी तरह इरेज नहीं हुआ था और दो गोले दिखाई दे रहे थे, तो उस सवाल को अनदेखा किया जाना चाहिए था। और अगर दूसरा गोला साफ तौर पर काला किया गया था, तो उसे सही जवाब मानकर अंक मिलने चाहिए थे। लेकिन यहां स्कैनर ने मिटाए गए पुराने गोले को पढ़ लिया और उसी आधार पर नेगेटिव मार्किंग कर दी। यही इस विवाद का सबसे अहम मुद्दा है।
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