रिटायरमेंट से पहले ‘कुर्सियों की बिसात’: PWD में पोस्टिंग का खेल तेज, सीनियरिटी किनारे सेटिंग हावी

Ramanand Tiwari | Apr 24, 2026, 22:35 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश के PWD में पोस्टिंग पर सीनियरिटी की बजाय ‘सेटिंग’ हावी हो रही है। कई अधिकारी रिटायरमेंट से पहले अहम पदों पर काबिज होने की दौड़ में हैं।

News In Short

  • PWD में पोस्टिंग अब सीनियरिटी से नहीं, ‘सेटिंग’ से तय हो रही है।
  • कई अधिकारी एक साथ दो या तीन पद संभाल रहे हैं।
  • इंदौर और जबलपुर में रिटायरमेंट से पहले दावेदार सक्रिय हो गए।
  • विवादित अफसर भी अहम पदों के लिए दौड़ में शामिल हैं।
  • PWD में ‘जुगाड़’ से पदों पर नियुक्तियां होने से गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

News In Detail

मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में इस समय एक अलग ही ‘इनसाइड गेम’ चल रहा है। कई वरिष्ठ अफसर महीने के अंत तक रिटायर होने वाले हैं, लेकिन उनकी कुर्सियां खाली होने से पहले ही दावेदारों ने अपनी-अपनी बिसात बिछा ली है।



पोस्टिंग अब योग्यता या सीनियरिटी से कम, और ‘सेटिंग’ से ज्यादा तय होती दिख रही है। हालात ऐसे हैं कि कुछ अफसर एक साथ दो-दो या तीन-तीन पद संभाल रहे हैं, जबकि जांच झेल रहे नाम भी मलाईदार सीटों के करीब पहुंच रहे हैं।



क्या है पूरा मामला?

कई बड़े अफसर 30 तारीख को रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह कौन बैठेगा, यह लगभग पहले ही तय बताया जा रहा है। विभाग में डबल और ट्रिपल चार्ज देने का चलन बढ़ गया है, जिससे नियमों पर सवाल उठ रहे हैं।



सीनियरिटी को नजरअंदाज कर ‘सेटिंग’ के आधार पर पोस्टिंग की चर्चाएं तेज हैं। जिन अधिकारियों पर पहले से जांच या आरोप हैं, वे भी अहम पदों की दौड़ में शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टिंग के नाम पर सेवा लिए जाने की चर्चा भी लंबे समय से अंदरखाने चल रही है।



इंदौर: रिटायरमेंट से पहले ही दावेदार तैयार

इंदौर में चीफ इंजीनियर सीएस खराते 30 तारीख को रिटायर होने वाले हैं। उनकी कुर्सी के लिए अभी से दावेदारी शुरू हो चुकी है। जीपी पटेल को प्रभारी सीई बनाने की चर्चा है, जबकि एनएस रावत और संजय ढेहरिया भी इस पद की रेस में बताए जा रहे हैं। अंदरखाने ये भी कहा जा रहा है कि फैसले से पहले ही ‘मैनेजमेंट’ का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है।



जबलपुर: एक सीट, कई दावेदार, चार्ज का खेल

जबलपुर में संजय ढेहरिया के रिटायरमेंट के बाद उनकी सीट पर नजरें टिकी हैं। योगेंद्र कुमार, जो पहले से ही दो-दो चार्ज संभाल रहे हैं, इस कुर्सी के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वे कार्यपालन यंत्री के साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर का चार्ज भी संभाल रहे हैं और अब चीफ इंजीनियर पद की दौड़ में हैं।



सतना-कटनी: ‘मलाईदार पोस्ट’ के लिए खींचतान

सतना में बीआर सिंह की सीट पर भी हलचल तेज है। कटनी में पदस्थ शारदा सिंह और जबलपुर NH में तैनात शंकरलाल, दोनों इस पोस्टिंग के लिए जोर लगा रहे हैं। विभाग के भीतर इसे ‘मलाईदार पोस्ट’ माना जा रहा है, इसलिए प्रतिस्पर्धा भी ज्यादा है।



भोपाल-सागर-रीवा: डबल चार्ज से बना संतुलन या दबाव?

भोपाल में सोमकुंवर के रिटायरमेंट से पहले ही उनकी सीट के लिए नाम सामने आने लगे हैं। वहीं अनिल कुमार आठिया दमोह में रहते हुए सागर और नौगांव का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। रीवा में भी एक अधिकारी के पास कार्यपालन यंत्री से लेकर चीफ इंजीनियर तक का जिम्मा है। ऐसे उदाहरण यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या विभाग में संसाधनों की कमी है या फिर यह ‘पावर बैलेंस’ का तरीका बन गया है।



जांच के बीच भी पोस्टिंग: सिस्टम पर सवाल

PWD में कई ऐसे अफसर हैं जिन पर अनियमितताओं की जांच चल रही है, लेकिन इसके बावजूद वे अहम पदों पर बने हुए हैं या नई पोस्टिंग की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग में 1 मई के आसपास कुछ प्रभारी अधिकारियों को चीफ इंजीनियर बनाने की तैयारी है—जिसमें इंदौर और जबलपुर शामिल हैं।



पोस्टिंग के नाम पर सेटिंग की चर्चा

बताया जाता है कि कई इंजीनियरों से कथित तौर पर रकम ली गई। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन यह मुद्दा विभाग के भीतर लंबे समय से फुसफुसाहट में मौजूद है। इससे कई इंजीनियर असमंजस में हैं कि किससे ‘सेटिंग’ करें और किससे नहीं।



सबसे बड़ा सवाल: गुणवत्ता कैसे आएगी?

जब पोस्टिंग का आधार योग्यता की जगह ‘जुगाड़’ बन जाए, तो असर सीधे काम की गुणवत्ता पर पड़ता है। सड़क निर्माण और अन्य प्रोजेक्ट्स में पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अगर सिस्टम इसी तरह चलता रहा, तो जिम्मेदारी तय करना और मुश्किल हो जाएगा।



आगे क्या? अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में पोस्टिंग सीनियरिटी और योग्यता के आधार पर होती है या फिर ‘सेटिंग’ ही अंतिम फैसला करती है। फिलहाल, PWD में कुर्सियां खाली होने से पहले ही भरने की तैयारी अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है।



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