आज दिल्ली दौरे पर रहेंगे सीएम मोहन यादव, राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर हो सकती है चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज यानी 03 जून को दिल्ली के दौरे पर रहेंगे। यहां वे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरे में राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर बड़ा फैसला हो सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार के कामकाज और संगठन के आगामी रोडमैप पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। राज्य की सियासत के लिहाज से यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
किस पार्टी को कितनी सीटें?
तीन सीटों में से भाजपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है और कांग्रेस एक सीट पर दावा करती है। विधानसभा में सदस्य संख्या के आधार पर यह समीकरण बनता है। लेकिन असली दिलचस्पी उम्मीदवारों के नामों को लेकर है। दोनों दलों में टिकट पाने की होड़ मची हुई है।
भाजपा के दावेदार कौन-कौन?
भाजपा में कई बड़े नामों की चर्चा है। इनमें लाल सिंह आर्य, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और रंजना बघेल के नाम सबसे आगे हैं। इनमें से कई नेता पिछले कुछ दिनों में दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व से मिल चुके हैं। संगठन पदाधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं से मुलाकात का दौर जारी है।
राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल
मध्य प्रदेश में 21 जून को रिक्त होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों के लिए अधिसूचना जारी हो गई है। नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है। नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को और नाम वापसी 11 जून तक होगी।
मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। यानी 18 जून की शाम तक यह साफ हो जाएगा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा कौन जाएगा।
2028 का समीकरण भी असर डालेगा
भाजपा नेतृत्व सिर्फ अभी की राजनीति नहीं देख रहा। नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव में कौन सा चेहरा ज्यादा फायदा दे सकता है, इस पर भी मंथन हो रहा है। जातीय, क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरण उम्मीदवार चुनने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि पार्टी अंतिम समय तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं करना चाहती।
सरप्राइज नाम का दांव भी संभव
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा और कांग्रेस दोनों अंतिम वक्त में किसी अप्रत्याशित नाम पर दांव लगा सकती हैं। ऐसा पहले भी हो चुका है जब चर्चित नामों की जगह किसी अनजान चेहरे को टिकट मिला हो। इसलिए दिल्ली में जो बैठकें हो रही हैं, उनका नतीजा ही असली तस्वीर साफ करेगा।
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