MP में शक्कर की जमाखोरी को लेकर सरकार सख्त, डीलर का स्टॉक किया तय
समझें क्या है पूरा मामला...
- राशन दुकान पर अब नहीं मिलेगी शक्कर, जानें वजह।
- डीलरों के लिए तय हुई 4000 क्विंटल की स्टॉक सीमा।
- जमाखोरी रोकने केंद्र सरकार का बड़ा फैसला।
- त्योहारी सीजन में शक्कर की कीमत पर सरकार सख्त।
- MP में अप्रैल से ही बंद है पीडीएस शक्कर वितरण।
केंद्र सरकार ने शक्कर डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय कर दी है। अब कोई भी डीलर 4000 क्विंटल से ज्यादा शक्कर नहीं रख सकेगा। यह नियम 30 नवंबर तक लागू रहेगा। मध्य प्रदेश में भी यह व्यवस्था लागू होगी। इसका मकसद जमाखोरी रोकना और कीमतें काबू में रखना है।
त्योहारी सीजन में शक्कर की मांग हर साल बढ़ जाती है। इसी के साथ कीमतों में उछाल की आशंका भी रहती है। इस बार केंद्र सरकार ने पहले ही सख्त कदम उठाया है।
सरकार ने देशभर के शक्कर डीलरों के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा तय कर दी है। यह सीमा 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कोई भी डीलर 4000 क्विंटल से ज्यादा शक्कर का भंडारण नहीं कर सकेगा।
30 दिन में बेचना होगा स्टॉक
नए नियम के तहत शक्कर डीलर पर एक और शर्त लागू होगी। शक्कर मिलने के 30 दिन के भीतर उसे बेचना अनिवार्य होगा। यानी डीलर लंबे समय तक शक्कर को स्टोर करके नहीं रख सकेंगे।
मध्य प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू की जा रही है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग इसके लिए जल्द अधिसूचना जारी करेगा। सरकार का मकसद बाजार में शक्कर की सप्लाई बनाए रखना है।
थोक और फुटकर भाव में अंतर
फिलहाल शक्कर का थोक भाव करीब 55 रुपए प्रति किलो है। फुटकर बाजार में यह करीब 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इसी आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले ही स्टॉक लिमिट लागू कर दी है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह निर्देश सभी राज्यों के लिए है। मध्य प्रदेश में भी इसी के तहत कार्रवाई होगी।
पीडीएस में पहले से बंद है शक्कर
एक तरफ नई स्टॉक सीमा लागू हो रही है। वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में सरकारी राशन दुकानों से शक्कर मिलना पहले से बंद है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू है।
पहले अंत्योदय परिवारों को हर महीने 20 रुपए प्रति किलो की दर से शक्कर मिलती थी। यह उचित मूल्य की दुकानों के जरिए दी जाती थी।
केंद्र सरकार ने शक्कर पर मिलने वाला अनुदान बंद कर दिया था। इसके बाद यह योजना बंद कर दी गई। सरकार का कहना है कि सब्सिडी हटने से बाजार भाव और राशन दुकान के दाम में कोई खास फर्क नहीं रह गया था।
जमाखोरी पर सीधी नजर
नई स्टॉक सीमा का मुख्य मकसद जमाखोरी रोकना है। कई बार डीलर कृत्रिम कमी दिखाकर कीमतें बढ़ा देते हैं। नए नियम से इस पर लगाम लगेगी।
स्टॉक सीमा और 30 दिन में बिक्री की शर्त से बाजार में सप्लाई बनी रहेगी। इससे त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
FAQ
- शकर डीलरों के लिए स्टॉक सीमा क्यों तय की गई?
त्योहारी सीजन में जमाखोरी और कीमत वृद्धि रोकने के लिए यह सीमा तय की गई है। कोई भी डीलर अब 4000 क्विंटल से ज्यादा शकर नहीं रख सकेगा। यह नियम 30 नवंबर तक लागू रहेगा। - डीलरों को शकर कितने दिन में बेचनी होगी?
नए नियम के तहत डीलरों को शकर मिलने के 30 दिन के भीतर उसे बेचना अनिवार्य है। इससे बाजार में शकर की लगातार आपूर्ति बनी रहेगी। यह नियम जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है।
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