100% सैलरी का मामला: कर्मचारियों के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
News in Short
- मध्य प्रदेश सरकार ने 100% वेतन मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती।
- परिवीक्षा नियमों में बदलाव के कारण कर्मचारियों को पहले तीन साल नहीं मिलता पूरा वेतन।
- कर्मचारी हाईकोर्ट से जीतने के बाद लगाए थे नियुक्ति के बाद से पूरा वेतन मिलने की आस।
- बीजेपी सरकार ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार द्वारा लागू परिवीक्षा नियमों को रखा बरकरार।
- सुप्रीम कोर्ट में 100 फीसदी वेतन मामले में सरकार की अपील से कर्मचारियों में नाराजगी है।
News in Detail
मध्य प्रदेश के हजारों परिवीक्षाधीन कर्मचारियों का भाग्य फिर से अधर में लटका है। वेतन में कटौती पर मिली हाईकोर्ट की जीत के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इससे कर्मचारियों को 100 फीसदी सैलरी मिलने का रास्ता बंद हो गया है।
मध्य प्रदेश में तीन साल तक कर्मचारियों को 100 फीसदी सैलरी नहीं मिलती। पहले साल 70%, दूसरे साल 80%, और तीसरे साल 90% वेतन मिलता है। फिर चौथे साल पूरा वेतन मिलता है।
कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। 2022 में इंदौर बेंच ने कर्मचारियों को शत प्रतिशत सैलरी देने का फैसला लिया। ग्वालियर में सरकार की अपील भी खारिज हो गई थी।
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के परिवीक्षा नियमों को गलत माना। कोर्ट ने कर्मचारियों को 100% वेतन देने का आदेश दिया था। अब सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। सरकार ने 5 कर्मचारियों और 5 न्यायाधीशों को प्रतिवादी बनाया है।
बीजेपी सरकार ने नहीं बदला नियम
2019 में कांग्रेस सरकार ने परिवीक्षा नियमों में बदलाव किया था। पहले परिवीक्षा 2 साल की होती थी। नए नियमों के तहत पहले साल 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90% सैलरी मिलती है।
चौथे साल से ही पूरा वेतन मिलता है। कमलनाथ सरकार ने माली हालत को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए थे। शिवराज सरकार ने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का वादा किया था, लेकिन नियम नहीं बदले।
क्यों भायी कांग्रेस की वेतन कटौती
बीजेपी ने कांग्रेस की कई योजनाएं बंद की। 2020 में कई नियम बदले गए, लेकिन परिवीक्षा नियमों को नहीं बदला गया। सरकार काम तो बराबरी का करा रही है, लेकिन पूरा वेतन नहीं दे रही। बीजेपी को यह नियम क्यों पसंद आया, यह सवाल है।
कर्मचारी विरोधी छवि न बना दे अपील
2020 से 2025 के बीच 90 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति हुई। 2026 में यह संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट में अपील सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील का टिकना मुश्किल
हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान कहते हैं कि हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया। हाईकोर्ट ने समान काम समान वेतन का सिद्धांत लागू किया। सुप्रीम कोर्ट में अपील का टिकना मुश्किल है।
हाईकोर्ट में सुनवाई की टाइमलाइन...
- 31 अक्टूबर 2022
- 28 अप्रैल 2025
- 18 अगस्त 2025
- 31 अक्टूबर 2025
- 6 जनवरी 2026
- 6 जनवरी 2026
- 6 जनवरी 2026
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की। कोर्ट ने कहा कि 12 दिसंबर 2019 को सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र जारी किया था। इसमें कहा गया था कि लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती किए गए कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता।
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