शिक्षकों की शॉर्ट अटेंडेंस प्राचार्यों को पड़ेगी भारी, भुगतान किया तो जाएगी कुर्सी
समझें क्या है पूरा मामला...
- MP में ई-अटेंडेंस को लेकर विभाग ने सख्ती बढ़ाई है।
- 90% से कम अटेंडेंस पर वेतन कटौती का नियम है।
- कई प्राचार्यों ने फिर भी वेतन निकाल दिया।
- अब ऐसे 1500 संकुल प्राचार्यों पर सस्पेंशन होगा।
- लापरवाही पर DEO और संयुक्त संचालक भी जवाबदेह होंगे।
मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब 90 प्रतिशत से कम ई-अटेंडेंस (e-Attendance) वाले शिक्षकों का वेतन निकालने वाले संकुल प्राचार्यों पर निलंबन की कार्रवाई होगी। यह आदेश लोक शिक्षण आयुक्त की तरफ से जारी हुआ है। प्रदेश में करीब 1500 संकुल प्राचार्य हैं। इस आदेश का असर पूरे स्कूल शिक्षा तंत्र पर पड़ने वाला है।
क्यों बढ़ी सख्ती
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने साफ कहा है कि जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस कम है, उनका वेतन कटना ही चाहिए। वहीं, कई संकुल प्राचार्यों ने इस नियम को नहीं माना। उन्होंने कम अटेंडेंस वाले शिक्षकों का भी पूरा वेतन निकाल दिया। यह सीधे तौर पर शासन के आदेश का उल्लंघन माना गया। इसी वजह से अब ऐसे प्राचार्यों पर निलंबन की तलवार लटक गई है। आयुक्त ने सभी जिलों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
95 प्रतिशत शिक्षक ही नियमित
लोक शिक्षण संचालनालय के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल करीब 95 प्रतिशत शिक्षक ही नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। यानी अब भी कुछ शिक्षक तय मानकों का पालन नहीं कर रहे। विभाग का मानना है कि ऐसे शिक्षकों को वेतन देना गलत परंपरा को बढ़ावा देगा। इसलिए अब सख्ती से नियम लागू करने की तैयारी है। एक संकुल के तहत औसतन 40 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल आते हैं। इसलिए एक भी लापरवाही का असर कई स्कूलों पर पड़ सकता है।
शैडो एरिया में मिलेगी राहत
आयुक्त ने यह भी साफ किया है कि नेटवर्क समस्या वाले इलाकों में राहत दी जाएगी। ऐसे इलाकों को शैडो एरिया कहा जाता है। इन मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी यानी DEO (District Education Officer) को फैसला लेने का अधिकार होगा। यानी वास्तविक तकनीकी दिक्कत वाले मामलों में शिक्षकों को परेशान नहीं किया जाएगा। वहीं, जानबूझकर नियम तोड़ने वालों पर कोई छूट नहीं मिलेगी।
पहले वेतन कटौती, अब सीधी कार्रवाई
विभाग ने पहले चरण में ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों का वेतन काटने का आदेश दिया था। वहीं, इसके बावजूद पूरी तरह पालन नहीं हुआ। इसी वजह से अब कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया गया है। जिन संकुल प्राचार्यों ने नियम तोड़कर वेतन निकाला, उन पर अब सीधे सस्पेंशन की कार्रवाई होगी। यह विभाग का साफ संदेश है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
अफसरों पर भी गिरेगी गाज
आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर संकुल प्राचार्यों पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदारी अफसरों की भी तय होगी। ऐसे मामलों में संबंधित DEO और संभागीय संयुक्त संचालक के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होगी। यानी अब सिर्फ प्राचार्य ही नहीं, ऊपर के अधिकारी भी जवाबदेह रहेंगे। इससे पूरे तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
शिक्षक संगठनों का लगातार विरोध
शिक्षक संगठन ई-अटेंडेंस की 90 प्रतिशत शर्त का लगातार विरोध कर रहे हैं। पिछले महीने भी कई संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा था। संगठनों ने इस शर्त में राहत देने की मांग की थी। वहीं, विभाग ने अभी तक कोई ढील नहीं दी है। साफ है कि विभाग सख्त रुख पर कायम है।
कैसे काम करता है ई-अटेंडेंस सिस्टम
मध्यप्रदेश में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू है। शिक्षक को स्कूल पहुंचकर मोबाइल ऐप से हाजिरी लगानी होती है। यह उपस्थिति जीपीएस यानी GPS (Global Positioning System) लोकेशन के आधार पर दर्ज होती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि शिक्षक स्कूल परिसर से ही अटेंडेंस लगाए।
विभागीय पोर्टल पर सभी स्कूलों का डेटा रियल टाइम में मॉनिटर किया जाता है। पहले सिर्फ वेतन कटौती का नियम था। अब निलंबन तक की कार्रवाई जोड़ दी गई है। विभाग ने 1 जुलाई 2026 से सभी शिक्षकों और शैक्षणिक अमले के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य कर दी है।
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