10 साल का इंतजार, 12 घंटे में खत्म: स्कूल शिक्षा विभाग ने रातों-रात हुई 400 अनुकंपा नियुक्ति

Amresh Kushwaha | Sept 23, 2026, 09:51 IST
MP स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने 1100 से ज्यादा लंबित अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में तेजी दिखाई है। विभाग ने 12 घंटे में 400 नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। साथ ही, दो दिन में करीब 590 मामलों के समाधान की तैयारी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में 1100 से ज्यादा अनुकंपा नियुक्ति के मामले अटके थे।
  • सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को अचानक भोपाल बुलाया गया था।
  • मंगलवार, 22 सितंबर को सिर्फ 12 घंटे में 400 नियुक्ति आदेश जारी हुए हैं।
  • बुधवार यानी आज करीब 190 और आदेश जारी होंगे।
  • सबसे ज्यादा लंबित मामले भोपाल-इंदौर संभाग में मिले हैं।

12 घंटे में 400 आदेश जारी

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। यह कार्रवाई अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों को लेकर है। विभाग में पिछले करीब एक दशक से 1100 से ज्यादा मामले अटके थे। इन मामलों को निपटाने के लिए विभाग ने बड़ा कदम उठाया है।



पहली बार प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को भोपाल बुलाया गया था। मंगलवार, 22 सितंबर को सिर्फ 12 घंटे के अंदर 400 नियुक्ति आदेश जारी हुए हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।



रातोंरात भोपाल बुलाए अधिकारी

लोक शिक्षण संचालनालय ने सोमवार, 21 सितंबर को सख्त निर्देश दिए थे। सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को अचानक भोपाल पहुंचने को कहा गया था। इस निर्देश के बाद अधिकारी रातोंरात भोपाल के लिए रवाना हुए थे। मंगलवार सुबह तक सभी अधिकारी भोपाल पहुंच चुके थे। इसके बाद पूरे दिन बैठक चलती रही। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह खुद इस बैठक में मौजूद रहे। वे पूरे समय संयुक्त संचालकों के साथ बैठे रहे। उन्होंने खुद निगरानी करते हुए आदेश जारी करवाए।



साथ मंगाया पूरा रिकॉर्ड

बैठक में सिर्फ अधिकारियों को ही नहीं बुलाया गया था। अनुकंपा नियुक्ति पर फैसला लेने का अधिकार संयुक्त संचालकों के पास होता है। इसी वजह से उन्हें जरूरी दस्तावेज भी साथ लाने को कहा गया था। उन्हें अनुकंपा नियुक्ति की वरिष्ठता सूची साथ लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा विभाग में खाली पदों की जानकारी भी मंगाई गई थी।



यह जानकारी प्रवर्गवार यानी श्रेणी के हिसाब से मांगी गई थी। अनुकंपा नियुक्ति के प्रभारी अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए थे। साथ ही डेटा एंट्री ऑपरेटर और कंप्यूटर ऑपरेटर को भी बुलाया गया था। वे अपने साथ पूरा रिकॉर्ड लेकर पहुंचे थे। इससे बैठक में तुरंत फैसले लेना आसान हो गया।



ग्रेड-3 के पद क्यों खाली

जांच में सामने आया कि ज्यादातर मामले ग्रेड-3 स्तर के हैं। हाल ही में कई ग्रेड-3 कर्मचारियों का प्रमोशन हुआ है। वे प्रमोशन के बाद ग्रेड-2 में चले गए। इस वजह से ग्रेड-3 के कई पद खाली हो गए। यही खाली पद अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए रास्ता खोल रहे हैं। समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई।



इसी दौरान यह भी पता चला कि प्रदेशभर में 1100 मामले लंबित हैं। अनुकंपा नियुक्ति के लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती। सिर्फ दस्तावेजों की जांच के बाद ही आदेश जारी हो सकते हैं। इसी वजह से एक दिन में इतने आदेश जारी करना संभव हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले भोपाल और इंदौर संभाग में मिले हैं।



दो दिन में निपटेंगे 590 केस

मंगलवार को जारी हुए 400 आदेशों के बाद भी काम रुका नहीं है। बुधवार को करीब 190 और आदेश जारी किए जाएंगे। इस तरह सिर्फ दो दिन में करीब 590 मामलों का निपटारा हो जाएगा। यह पिछले कई सालों में सबसे तेज कार्रवाई मानी जा रही है।



बाकी बचे मामलों पर भी जल्द फैसला होने की उम्मीद है। विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में और आदेश जारी होंगे। इससे परिवारों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी।



पहले भी दिए थे निर्देश

यह पहला मौका नहीं है जब निपटाने के निर्देश दिए गए हों। इससे पहले 9 मई 2023 को भी ऐसे निर्देश जारी हुए थे। उस समय सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी। संभागीय संयुक्त संचालकों को भी मामले तुरंत निपटाने को कहा गया था। वहीं, तब मामलों के निपटारे की रफ्तार बहुत धीमी रही। इससे पहले जुलाई 2021 में भी एक प्रयास हुआ था। उस समय भी लंबित मामलों को कम करने की कोशिश की गई थी। लेकिन नतीजे उतने बड़े नहीं आए थे।



विधानसभा में भी कई बार उठ चुका मामला

यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा है। यह मामला विधानसभा में भी कई बार उठ चुका है। विधायकों ने इस देरी पर सवाल उठाए थे। परिवारों की तरफ से भी लगातार शिकायतें आती रही हैं। कई परिवार सालों से अपने परिजन की नौकरी का इंतजार कर रहे थे। अनुकंपा नियुक्ति ऐसे परिवारों के लिए बड़ा सहारा मानी जाती है। यह नियुक्ति किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को मिलती है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति संभलने में मदद मिलती है।



पुराने तरीके से हटकर किया काम

इस बार विभाग ने पुराने तरीके से हटकर काम किया है। अधिकारियों को सीधे भोपाल बुलाकर एक ही जगह फैसला कराया गया। इससे फाइलें इधर-उधर भेजने में लगने वाला समय बच गया। सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड पहले से ही मौजूद थे। इसी वजह से 12 घंटे में इतने आदेश जारी हो सके। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल आगे भी अपनाया जाएगा। यदि यह तरीका कामयाब रहा, तो बाकी विभाग भी इसे अपना सकते हैं।



फिलहाल विभाग का पूरा ध्यान बचे हुए मामलों पर है। बुधवार यानी आज जारी होने वाले 190 आदेशों पर सबकी नजर है। इसके बाद बाकी बचे मामलों की समीक्षा भी जल्द होगी। परिवारों को उम्मीद है कि उनका इंतजार अब जल्द खत्म होगा। आने वाले दिनों में विभाग की तरफ से और जानकारी सामने आ सकती है।



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