PGI-D Report: भोपाल, इंदौर, जबलपुर सब फिसड्डी, सीधी ने बचाई सरकारी शिक्षा व्यवस्था की लाज

Aman Vaishnav | Aug 29, 2026, 08:46 IST
Share
सीधी ने बचाई सरकारी शिक्षा व्यवस्था की लाज
सीधी ने बचाई सरकारी शिक्षा व्यवस्था की लाज

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पीजीआई-डी रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। तमाम पैमानों पर भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर पीछे छूट गए हैं, जबकि सीधी जैसे छोटे जिलों में हालात कहीं बेहतर हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पीजीआई-डी 2025-26 रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में मध्य प्रदेश का कोई भी जिला 60 प्रतिशत अंक भी नहीं छू पाया। सीधी राज्य में टॉप पर रहा, फिर भी नेशनल टॉप 200 से बाहर है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर छोटे जिलों से पीछे रह गए हैं।

राज्य के तमाम सरकारी दावों के बीच केंद्र सरकार की रिपोर्ट म.प्र. की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख रही है। विडंबना देखिए कि टॉप 200 जिलों में म.प्र. का एक भी जिला शामिल नहीं है।

पीजीआई-डी रिपोर्ट क्यों जरूरी है

अगर आपके बच्चे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर या जबलपुर के सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, तो यह रिपोर्ट सीधे आपसे जुड़ी है। स्कूल सेफ्टी और लर्निंग आउटकम जैसे पैमानों पर बड़े शहरों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं निकला, जितना उम्मीद की जाती है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, आपके बच्चे की पढ़ाई की गुणवत्ता का सवाल भी है।

क्या होती है ये पीजीआई-डी रिपोर्ट?

पीजीआई-डी यानी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स, शिक्षा मंत्रालय का वह टूल है जो हर जिले के स्कूली शिक्षा तंत्र को 600 अंकों के पैमाने पर परखता है। यह 74 इंडिकेटर्स पर आधारित है, जिसमें लर्निंग आउटकम, क्लासरूम प्रैक्टिस, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल सेफ्टी, डिजिटल लर्निंग और गवर्नेंस शामिल हैं। पिछली रिपोर्टों में भी मध्य प्रदेश का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है। इस रिपोर्ट को विस्तार से समझने के लिए आप खबर के सबसे नीचे दिए गए संदर्भ (रिफ्रेश) लिंक्स पर जाकर देख सकते हैं।

क्या हुआ और क्यों

इस रिपोर्ट में सीधी जिले ने 333 अंक हासिल किए हैं। यानी कुल स्कोर का 55.5 प्रतिशत। यह मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा है, फिर भी 60 प्रतिशत के बेंचमार्क से दूर है। उज्जैन को 323, शाजापुर को 318, दमोह को 312 और नरसिंहपुर को 307 अंक मिले हैं।

ग्राफिक्स में देखिए सरकारी शिक्षा की हकीकत-

c94cc4c1-024
c94cc4c1-024


अब सवाल यह है, फिर भोपाल और इंदौर कहां खड़े हैं?

जवाब चौंकाने वाला है। भोपाल को सिर्फ 285 अंक मिले, इंदौर को 284। ग्वालियर 277 और जबलपुर सिर्फ 267 पर सिमट गया। यानी राजधानी और सबसे बड़ा व्यावसायिक शहर, दोनों टॉप 5 जिलों से करीब 20 से 50 अंक पीछे रह गए।

इसे यूं समझिए। मान लीजिए एक परीक्षा में 600 में से पास होने के लिए 360 अंक चाहिए। कोई भी जिला, चाहे सीधी हो या भोपाल, यह आंकड़ा नहीं छू पाया। पूरी क्लास फेल है, बस कोई थोड़ा कम फेल हुआ है।

भोपाल का लर्निंग आउटकम स्कोर करीब 47 प्रतिशत रहा, जबकि स्कूल सेफ्टी और चाइल्ड प्रोटेक्शन सिर्फ 37 प्रतिशत पर अटका रहा। दूसरी तरफ सबसे कमजोर प्रदर्शन झाबुआ का रहा, जहां कुल स्कोर सिर्फ 226 अंक यानी 37.7 प्रतिशत रहा। अलीराजपुर, खरगोन और बड़वानी भी सबसे नीचे की सूची में शामिल हैं।

mp school education report
mp school education report


कौन कौन शामिल है

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस रिपोर्ट को हर साल जारी करता है। राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग जमीनी क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है।

दोनों साइड की बात

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस रिपोर्ट को सरकार का "गंभीर रिपोर्ट कार्ड" बताया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े कांग्रेस के नहीं, बल्कि खुद केंद्र सरकार के सर्वे सिस्टम से आए हैं। पटवारी ने जिलावार सार्वजनिक समीक्षा और समयबद्ध सुधार योजना की मांग की है।

राज्य सरकार की तरफ से अभी इस रिपोर्ट पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पहले माना है कि राष्ट्रीय बेंचमार्क के मुकाबले कमी है और लर्निंग आउटकम, स्कूल सेफ्टी व गवर्नेंस पर फोकस्ड सुधार की योजना बन रही है।

अब आगे क्या होगा

राज्य सरकार पर अब दबाव है कि वह जिलावार सुधार योजना सार्वजनिक करे। खासकर बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर और झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल जिलों में लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है। अगली पीजीआई-डी रिपोर्ट में यह देखना दिलचस्प होगा कि भोपाल और इंदौर जैसे शहर सुधार कर पाते हैं या नहीं।

एक बात जो आप नहीं जानते थे

आम धारणा यह है कि बड़े शहरों के स्कूल छोटे जिलों से बेहतर होते हैं। पीजीआई-डी डेटा इसे पूरी तरह गलत साबित करता है। सीधी, उज्जैन, शाजापुर, दमोह और नरसिंहपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले भोपाल और इंदौर से आगे निकल गए हैं। यानी संसाधन और शहरी सुविधाएं होने के बावजूद बड़े शहरों का स्कूल तंत्र उतना असरदार नहीं निकला।

अब आप क्या करें

अब आप क्या करें: अपने जिले का पीजीआई-डी स्कोर udiseplus.gov.in पर चेक करें।

क्यों अभी: यह रिपोर्ट सीधे आपके बच्चे के स्कूल की गुणवत्ता से जुड़ी है।

आगे देखें: राज्य सरकार की जिलावार सुधार योजना, जिसकी मांग कांग्रेस ने की है।

यह खबर क्यों जरूरी है

शिक्षा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत मौलिक अधिकार है। पीजीआई-डी जैसी सरकारी रिपोर्ट पारदर्शिता का जरिया है, जिससे नागरिक अपने जिले के स्कूल तंत्र की सच्चाई जान सकते हैं। स्कूल सेफ्टी और चाइल्ड प्रोटेक्शन जैसे कम स्कोर वाले पैमाने सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े हैं, इसलिए यह सिर्फ शैक्षणिक नहीं, नैतिक सवाल भी है।

संदर्भ:

https://spgi.udiseplus.gov.in/
https://dpgi.udiseplus.gov.in/
https://www.dsel-education.gov.in/documents

FAQ

  1. पीजीआई-डी रिपोर्ट में मध्य प्रदेश का सबसे अच्छा जिला कौन सा है?
    सीधी जिला 333 अंकों के साथ मध्य प्रदेश में सबसे आगे है, यानी कुल स्कोर का 55.5 प्रतिशत।
  2. क्या भोपाल और इंदौर टॉप जिलों में शामिल हैं?
    नहीं। भोपाल को 285 और इंदौर को 284 अंक मिले, जो राज्य के टॉप 5 जिलों से पीछे हैं।
  3. मध्य प्रदेश का कोई जिला 60 प्रतिशत क्यों नहीं छू पाया?
    रिपोर्ट के अनुसार लर्निंग आउटकम, स्कूल सेफ्टी और डिजिटल लर्निंग जैसे पैमानों पर राज्य के सभी 55 जिलों का प्रदर्शन राष्ट्रीय बेंचमार्क से नीचे रहा।

ये खबरें भी पढ़िए...

Gen-Z और Gen-Alpha के अभियान का असर, स्कूलों की सूरत बदलेगी सरकार

gen z protest के बाद Gen Alpha अपने हक के लिए बेखौफ, मंत्री से आंख मिलाकर कर रहे सवाल

आधी रात खिड़की से कूदी 40 छात्राएं, पैदल पहुंची थाने, कहा...

Gen Alpha Protest, उज्जैन में छात्राओं के सराफा स्कूल की शिफ्टिंग पर लगा ब्रेक

Tags:
  • जीतू पटवारी
  • केंद्र सरकार
  • Gen Alpha
  • gen z protest
  • Gen Alpha Protest
अटक सकती है लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त, 1500 रुपए आने से पहले इन पांच बातों का रखें ध्यान

By Sourabh Bhatnagar

अटक सकती है लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त, 1500 रुपए आने से पहले इन पांच बातों का रखें ध्यान
Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!

By Amresh Kushwaha

Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!
Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!

By Amresh Kushwaha

Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!
Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!

By Amresh Kushwaha

Weather Update: MP के 8 जिलों में फिर बरसेंगे बादल, राजस्थान में गुलाबी ठंड की दस्तक, CG से मानसून की विदाई!
आज यूथ कॉन्क्लेव 2026 में 20 हजार युवाओं से संवाद करेंगे सीएम मोहन यादव, रोजगार और स्टार्टअप पर चर्चा होगी चर्चा

By Aman Vaishnav

आज यूथ कॉन्क्लेव 2026 में 20 हजार युवाओं से संवाद करेंगे सीएम मोहन यादव, रोजगार और स्टार्टअप पर चर्चा होगी चर्चा
News Strike: एक कचौड़ी दो समोसा...’ शिवराज ने क्यों दोहराया वायरल नारा, क्या BJP में फिर उठे उपेक्षा के सवाल?

By Harish Divekar

News Strike: एक कचौड़ी दो समोसा...’ शिवराज ने क्यों दोहराया वायरल नारा, क्या BJP में फिर उठे उपेक्षा के सवाल?
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कारंजा ही क्यों जा रहे? बालासाहेब देवरस के गांव में सेवा की नई कसौटी

By Ramanand Tiwari

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कारंजा ही क्यों जा रहे? बालासाहेब देवरस के गांव में सेवा की नई कसौटी