पीरियड्स में साफ टॉयलेट-पानी नहीं मिलता, इसलिए मध्य प्रदेश के स्कूलों को छोड़ रहीं बेटियां
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के स्कूलों में साफ शौचालय की भारी कमी है।
- पानी न होने से छात्राएं पीरियड्स में स्कूल नहीं जाती हैं।
- नीति आयोग के मुताबिक 16.8% लड़कियां स्कूल छोड़ चुकी हैं।
- भोपाल एम्स के सर्वे में भी यह सच सामने आया है।
- एक्सपर्ट्स ने स्कूलों में चार बुनियादी सुविधाएं देने की मांग की।
आज मासिक धर्म स्वच्छता दिवस है और इसी दिन मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिस वजह से बेटियां अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।
नीति आयोग ने मई 2026 में एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसके आंकड़े काफी डराने वाले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में नौवीं और दसवीं की छात्राएं तेजी से स्कूल छोड़ रही हैं।
क्या कहती है नीति आयोग की नई रिपोर्ट?
नीति आयोग के मुताबिक एमपी में 16.8% छात्राएं स्कूल छोड़ देती हैं। लड़कियों के स्कूल छोड़ने के पीछे मासिक धर्म एक बड़ी वजह है। स्कूलों में स्वच्छता और जरूरी इंतजाम न होने से वे परेशान हैं। हालांकि इसके पीछे कुछ अन्य सामाजिक कारण भी जिम्मेदार हैं। मध्य प्रदेश के 11.4% स्कूलों में आज भी शौचालय की सुविधा नहीं है। केवल 88.6% स्कूलों में ही छात्राओं के लिए टॉयलेट बने हैं।
स्कूलों में क्यों असुरक्षित महसूस करती हैं छात्राएं?
राष्ट्रीय औसत से पीछे छूटा मध्य प्रदेश
शौचालय के सुधार के मामले में मध्य प्रदेश काफी पीछे है। देश में स्कूलों के टॉयलेट का राष्ट्रीय औसत 94% है। लेकिन मध्य प्रदेश इस आंकड़े को छू भी नहीं पाया है। साल 2024-25 के आंकड़ों में एक और कमी सामने आई है। राज्य के स्कूलों में केवल 80% से 90% टॉयलेट ही चालू हैं।
नीति आयोग ने सरकार के काम पर अपनी टिप्पणी की है। रिपोर्ट के मुताबिक केवल टॉयलेट की इमारत खड़ी करना काफी नहीं है। टॉयलेट्स में साफ पानी का होना भी बहुत जरूरी है। वहां सैनिटरी पैड डिस्पोजल सिस्टम का होना भी बेहद जरूरी है। इन सुविधाओं की कमी किशोरियों को स्कूल से दूर कर रही है।
भोपाल एम्स के सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
भोपाल एम्स और जीएमसी ने एक बड़ा हेल्थ सर्वे किया था। यह सर्वे साल 2021 से 2023 के बीच हुआ था। इसके नतीजे भी नीति आयोग की रिपोर्ट जैसे ही हैं। भोपाल के कुछ इलाकों में 50.6% छात्राएं पीरियड्स में स्कूल नहीं जाती हैं। वे हर महीने औसतन 2 से 3 दिन अनुपस्थित रहती हैं।
सर्वे में लड़कियों ने स्कूल न आने की असली वजह बताई। करीब 74.8% लड़कियों को कपड़ों पर दाग लगने का डर रहता है। वे समाज की लोक-लाज के कारण घर पर बैठती हैं। करीब 40% लड़कियों ने शारीरिक दर्द को बड़ी वजह बताया। स्कूलों में आराम करने के लिए कोई सिक रूम नहीं है।
11वीं-12वीं की छात्राओं की स्थिति और भी खराब
मध्य प्रदेश में 11वीं और 12वीं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। इन कक्षाओं की करीब 53% लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। इसके पीछे पीरियड्स और स्कूल की दूरी मुख्य कारण हैं।
प्राथमिक स्तर पर भी लड़कियों का ग्राफ तेजी से गिरा है। साल 2014-15 में प्राथमिक जीईआर 107.43% दर्ज हुआ था। साल 2024-25 में यह ग्राफ घटकर 76.4% रह गया है। पिछले एक दशक में इसमें बड़ी गिरावट देखी गई है। यह स्थिति राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। अब इस संकट को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। नीति आयोग ने इसके लिए कुछ जरूरी सुझाव भी दिए हैं।
नीति आयोग ने क्या सुझाव दिए?
नीति आयोग के अनुसार स्कूलों में रनिंग वॉटर बहुत जरूरी है। हर अलग शौचालय में साफ पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। शिक्षकों को मासिक धर्म के प्रति संवेदनशील बनाना भी जरूरी है। पढ़ाई छोड़ चुकी लड़कियों के लिए दोबारा दाखिले की नीति बने। इससे लड़कियां फिर से स्कूल आकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी।
डॉक्टर ने बताईं स्कूल के लिए चार जरूरी चीजें
आईएमए वुमन विंग की चेयरमैन डॉ. वरुणा पाठक ने राय दी है। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में चार चीजें अनिवार्य होनी चाहिए। पहला हर स्कूल में इंडियन टॉयलेट जरूर बना हो। दूसरा टॉयलेट के अंदर पानी का नल होना जरूरी है। तीसरा पानी इस्तेमाल करने के लिए मग्गा जरूर रखा हो।
डॉक्टर के अनुसार चौथा सबसे जरूरी इंतजाम डस्टबिन का है। सैनिटरी पैड्स फेंकने के लिए अलग से डस्टबिन होना चाहिए। ये चार चीजें बेटियों को स्कूल में सुरक्षित माहौल देंगी। इन छोटे बदलावों से लड़कियों का स्कूल छोड़ना कम हो सकता है। सरकार को इन बुनियादी जरूरतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
सोर्स:
- केंद्रीय नीति आयोग रिपोर्ट (मई 2026)
- भोपाल एम्स और जीएमसी कम्युनिटी मेडिसिन विभाग हेल्थ सर्वे (2021-2023)
FAQ
- नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में कितनी छात्राएं स्कूल छोड़ देती हैं?
नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में माध्यमिक स्तर यानी नौवीं और दसवीं कक्षा की 16.8 फीसदी छात्राएं स्कूल छोड़ देती हैं। इसके पीछे स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता की कमी और साफ शौचालय न होना एक सबसे बड़ी और मुख्य वजह माना गया है। - भोपाल एम्स और GMC के सर्वे में छात्राओं के स्कूल न जाने का क्या कारण सामने आया?
भोपाल एम्स और जीएमसी के हेल्थ सर्वे के अनुसार भोपाल के कुछ क्षेत्रों में 50.6 फीसदी छात्राएं पीरियड्स के दौरान स्कूल नहीं जाती हैं। इसमें 74.8 फीसदी छात्राओं ने कपड़ों पर दाग लगने के डर और लोक-लाज को वजह बताया, जबकि 40 फीसदी लड़कियों ने टॉयलेट में साफ पानी और आराम के लिए सिक रूम न होने की बात कही।
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