सिया में ठप हुईं बैठकें, सचिव ट्रेनिंग पर, अध्यक्ष बेखबर

Sourabh Bhatnagar | May 15, 2026, 10:15 IST
mp SEIAA meeting delay environment approval issue
मध्यप्रदेश में पर्यावरण मंजूरी देने वाली संस्था सिया (State Impact Assessment Authority) की दो अहम बैठकें इसलिए नहीं हो सकीं क्योंकि सदस्य सचिव बिना जानकारी दिए ट्रेनिंग पर चले गए। अध्यक्ष ने एसीएस को पत्र लिखकर जवाब मांगा है।

    समझें क्या है पूरा मामला

    1. मध्यप्रदेश की सिया संस्था पर्यावरण मंजूरी देने का काम करती है।
    2. सदस्य सचिव सुधीर कोचर 10 मई को ट्रेनिंग पर मसूरी चले गए।
    3. 12 और 13 मई की दो बैठकें बिना किसी फैसले के रद्द हो गईं।
    4. सिया अध्यक्ष को प्रभारी अधिकारी की कोई सूचना नहीं दी गई।
    5. अध्यक्ष ने एसीएस पर्यावरण विभाग को नाराजगी भरा पत्र लिखा।

    सिया में क्यों ठप हुआ काम

    मध्यप्रदेश में खनन और बड़े विकास प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी लेनी होती है। यह काम करती है सिया यानी राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (State Level Environment Impact Assessment Authority)। इस संस्था में बैठकें होती हैं, आवेदनों पर सुनवाई होती है और फिर मंजूरी मिलती है या नहीं, यह तय होता है।



    लेकिन 12 और 13 मई को कुछ अलग ही हुआ। SEIAA के अध्यक्ष रिटायर्ड IAS शिव नारायण सिंह चौहान और सदस्य डॉ. सुनंदा सिंह रघुवंशी पूरे कार्यालयीन समय अपनी कुर्सियों पर बैठे रहे। 949वीं और 950वीं बैठकें होनी थीं। एजेंडा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर पहले से दर्ज था। प्रोजेक्ट से जुड़े लोग भी सिया कार्यालय के चक्कर काटते रहे। पर दोनों दिन बैठक हुई ही नहीं।



    सचिव कहां थे, किसी को खबर नहीं

    असल में सिया के सदस्य सचिव सुधीर कुमार कोचर 10 मई से एक महीने के लिए मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में मिड-करियर ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। यह बात सिया के अध्यक्ष को खुद पता करनी पड़ी। पर्यावरण विभाग ने न कोई सूचना दी और न ही कोई वैकल्पिक अधिकारी नियुक्त किया।



    बिना सदस्य सचिव के बैठक नहीं हो सकती। यही वजह है कि दो दिन बर्बाद हो गए। न सुनवाई हुई, न कोई फैसला हुआ।



    एसीएस को लिखा सख्त पत्र

    इसके बाद सिया अध्यक्ष और सदस्य ने पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) आईएएस अशोक बर्णवाल को पत्र लिखा। पत्र में साफ कहा गया कि सदस्य सचिव के जाने की जानकारी पहले से थी। फिर भी सिया को कोई सूचना नहीं दी गई। न ही यह बताया गया कि उनकी गैरमौजूदगी में कौन सा अधिकारी प्रभार संभालेगा। पत्र में मांग की गई है कि जल्द से जल्द किसी अधिकृत अधिकारी का नाम बताया जाए ताकि लंबित प्रोजेक्टों पर काम शुरू हो सके।



    वहीं जब एसीएस अशोक बर्णवाल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं है।



    सिया ने केंद्र को भी लिखा

    यह पत्र सिर्फ राज्य सरकार को नहीं भेजा गया। सिया ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी इसकी प्रति भेजी है। यह कदम बताता है कि मामले को अब सिया गंभीरता से ले रही है। संस्था का कहना है कि इस अव्यवस्था से मध्य प्रदेश सरकार और सिया दोनों की छवि खराब हो रही है।



    प्रोजेक्ट लटके, विकास बाधित

    जो बैठकें नहीं हुईं, उनमें दर्जनों प्रोजेक्टों पर सुनवाई होनी थी। इनमें खनन और अन्य विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इन प्रोजेक्टों के प्रस्तावक पहले से ही परिवेश पोर्टल पर एजेंडा देखकर सिया कार्यालय पहुंचे थे। अब उन्हें फिर से इंतजार करना होगा। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।



    सिया ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि समय पर बैठकें न होने से प्रदेश का विकास बाधित हो रहा है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं है। इसका असर जमीन पर काम करने वाले लोगों तक पहुंच रहा है।



    क्या है आगे की राह

    अब सबकी नजर पर्यावरण विभाग के जवाब पर है। एसीएस अशोक बर्णवाल को जल्द यह तय करना होगा कि सुधीर कोचर की गैरमौजूदगी में प्रभार किसे सौंपा जाए। जब तक यह नहीं होता, सिया की बैठकें ठप रहेंगी और प्रोजेक्ट अटके रहेंगे।



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