SEIAA में पर्यावरण मंजूरी का भ्रष्टाचार: बिना बैठक के ही 450 प्रोजेक्ट को दी सीधे मंजूरी
The Sootr | Jun 08, 2025, 18:22 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) में अरबों के घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि बिना बैठक के 450 परियोजनाओं को अवैध रूप से पर्यावरणीय मंजूरी दी गई। इनमें से 200 से ज्यादा खनिज विभाग से संबंधित हैं।
मध्य प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। भ्रष्टाचार भी कोई करोड़ दो करोड़ का नहीं, अरबों का हो सकता है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर, बिना बैठक और सामूहिक निर्णय के, सैकड़ों परियोजनाओं को अवैध रूप से पर्यावरणीय मंजूरी (EC) दे दी गई। इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार, खनन माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत, और पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ के गंभीर आरोप लगे हैं। बता दें कि इन 450 मामलों में से 200 से ज्यादा खनिज विभाग से जुड़े हैं।
दरअसल पर्यावरण संरक्षण कानून 1986 के तहत 8 प्रकार के प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य है। इनमें खनन, सिंचाई, सड़क-हाईवे आदि हैं। बता दें कि 250 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के प्रोजेक्ट में ईसी जारी करने के अधिकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और 250 हेक्टेयर से कम के प्रोजेक्ट में सिया के पास है। ऑफ द रिकार्ड सभी मानते हैं कि खनन, सिंचाई, सड़क-हाईवे आदि प्रोजेक्ट अरबों की लागत वाले होते हैं। इसलिए 25-50 लाख की दान- दक्षिणा के बिना कोई भी अनुमति इन प्रोजेक्ट को मिलती ही नहीं है। thesootr किसी भी तरह का आरोप नहीं लगा रहा है, मगर नीचे ग्राफ से समझेंगे तो संदेह अपने आप नजर आ ही जाएगा…
सिया चेयरमैन शिवनारायण चौहान का कहना है कि अथॉरिटी के अलावा किसी और को ईसी जारी करने का अधिकार नहीं है। फिर अस्थायी प्रभार संभालने के सिर्फ एक दिन बाद ही श्रीमन शुक्ला को अनुमतियां जारी करने की ऐसी कौन सी जल्दी थी?
आरोप है कि बिना तकनीकी मूल्यांकन, बिना चर्चा, बिना जरूरी दस्तावेजों के, परियोजनाओं को हरी झंडी मिल गई। कई मामलों में खनिज के नाम और मात्रा तक बदल दी गई।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के बजाय SEIAA को कमजोर करने, उस पर दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने का प्रयास किया।
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सदस्य सचिव, SEIAA:
SEIAA को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दिया, बल्कि उस पर दबाव बनाया।
खनन माफिया और दलाल:
मंजूरी देने के बदले कथित तौर पर आर्थिक लाभ लिए गए।
पर्यावरण को होगा भारी नुकसान
आपको बता दें कि Thesootr के पास इस भ्रष्टाचार से जुड़े मामले के सभी दस्तावेज मौजूद हैं। जिन प्रोजेक्ट को आंख बंद करके अनुमति दी गई हैं, उनमें से कई ऐसे हैं जो पर्यावरण के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल मुख्य सचिव के सामने भी है कि इस मामले की जानकारी के बाद क्या वे कोई ठोस कार्यवाही करेंगे? क्या ये अनुमतियां रद्द की जाएंगी या फिर इस मामले में चांज बैठाई जाएगी?
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इधर सिया चेयरमैन शिवनारायण चौहान ने 26 मई को केंद्र को इस मामले की रिपोर्ट भेज दी है। उसके मुताबिक, 17 मार्च से 15 मई के बीच उन्होंने 10 बार मेंबर सेक्रेटरी को नोटशीट लिखी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को भी 22 पत्र भेजे। इन पत्रों में मेंबर सेक्रेटरी की मनमानी और बैठक न बुलाने की शिकायत की गई थी। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई। चौहान का कहना है कि बिना बैठक के ईसी जारी करना नियमों के खिलाफ है।
इस खेल में अवैध खनन परियोजनाओं को मंजूरी दिलाई गई। जिन कंपनियों को नियमों के तहत मंजूरी नहीं मिल सकती थी, उन्हें भी फायदा पहुंचाया गया।
1. सदस्य सचिव, SEIAA: बिना सामूहिक निर्णय के, अकेले ही सैकड़ों मंजूरियां जारी कीं।
2. प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग, म.प्र. शासन: अवैध फैसलों को स्वीकृति दी, केंद्र सरकार के आदेशों की अनदेखी की।
3. SEIAA के अन्य अधिकारी: बैठक बुलाने के अनुरोध को नजरअंदाज किया, उच्च अधिकारियों के दबाव में काम किया।
4. खनन माफिया और दलाल: अधिकारियों से सांठगांठ कर अवैध मंजूरी दिलाई।
SEIAA में बिना बैठक, बिना सामूहिक निर्णय, अकेले ही सैकड़ों परियोजनाओं को मंजूरी देकर करोड़ों का घोटाला किया गया। इसमें सदस्य सचिव, प्रमुख सचिव, अन्य अधिकारी और खनन माफिया की मिलीभगत स्पष्ट है। पर्यावरणीय सुरक्षा और कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। अब इस मामले में तत्काल जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सभी अवैध मंजूरियों को निरस्त करने की मांग उठ रही है।
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स्टेट एनवायरोमेंट इम्पेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक राज्य स्तरीय निकाय है, जिसका मुख्य कार्य राज्यों में विभिन्न विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance - EC) देना है। इसका गठन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और EIA (Environmental Impact Assessment) अधिसूचना, 2006 के तहत किया गया है।
पर्यावरणीय मंजूरी देना:
SEIAA का मुख्य कार्य राज्य के भीतर आने वाली 'Category B' परियोजनाओं (जैसे छोटे-बड़े उद्योग, खनन, निर्माण, सड़क, पावर प्लांट आदि) को पर्यावरणीय मंजूरी देना है।
SEAC से सलाह लेना:
SEIAA के निर्णय लेने से पहले, राज्य पर्यावरण मूल्यांकन समिति (SEAC) तकनीकी मूल्यांकन करती है और अपनी सिफारिश देती है। SEIAA अंतिम मंजूरी देती है या अस्वीकार करती है।
जन सुनवाई और पारदर्शिता:
परियोजना क्षेत्र में जन सुनवाई आयोजित कराई जाती है, जिसमें स्थानीय लोगों की आपत्तियों और सुझावों को शामिल किया जाता है।
पर्यावरणीय शर्तों की निगरानी:
मंजूरी मिलने के बाद, परियोजना प्राधिकरण को हर छह महीने में अनुपालन रिपोर्ट देनी होती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पर्यावरणीय शर्तों का पालन हो रहा है।
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आईएएस श्रीमन शुक्ला | आईएएस नवनीत मोहन कोठारी | रिटायर्ड IAS शिव नारायण सिंह चौहान | आईएएस उमा महेश्वरी आर
चलिए विस्तार से समझते हैं कैसे हुआ भ्रष्टाचार?
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सिया चेयरमैन शिवनारायण चौहान का कहना है कि अथॉरिटी के अलावा किसी और को ईसी जारी करने का अधिकार नहीं है। फिर अस्थायी प्रभार संभालने के सिर्फ एक दिन बाद ही श्रीमन शुक्ला को अनुमतियां जारी करने की ऐसी कौन सी जल्दी थी?
सारा खेल 45 दिनों के नियम से किया…
दरअसल इस मामले में भारत सरकार के EIA Notification 2006 के तहत, हर परियोजना की मंजूरी SEIAA की सामूहिक बैठक में होनी चाहिए थी। लेकिन जानबूझकर बैठकें ही नहीं बुलाई गईं, जिससे फाइलें लंबित रहीं। फाइलें लंबित रखने के पीछे “45 दिनों का नियम” था। दरअसल नियम के मुताबिक, अगर 45 दिनों में किसी फाइल पर फैसला नहीं होता, तो EC (पर्यावरण मंजूरी) अपने आप मान ली जाती है। इसी का फायदा उठाकर, सचिव स्तर से अकेले ही सैकड़ों मंजूरियां जारी कर दी गईं।
फर्जी अनुमोदन कराया
बड़ा सवाल : आखिर गड़बड़ियां कैसे हुईं?
नियमों की अनदेखी और प्रक्रिया का दुरुपयोग
- EIA Notification 2006 के मुताबिक, हर परियोजना की मंजूरी SEIAA की सामूहिक बैठक में होनी चाहिए थी।
- अधिकारियों ने जानबूझकर बैठकें नहीं बुलाईं, जिससे फाइलें लंबित रहीं।
- 45 दिन की समयसीमा पूरी होते ही, सदस्य सचिव ने अकेले ही सैकड़ों परियोजनाओं को मंजूरी दे दी, जो पूरी तरह अवैध है।
- तकनीकी मूल्यांकन, जनसुनवाई और सामूहिक निर्णय जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।
- कई मामलों में खनिज के नाम और मात्रा तक बदल दी गई।
- फाइलों में जरूरी जानकारी छुपाई गई या बदल दी गई, जिससे अवैध खनन को कानूनी जामा पहनाया गया।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के बजाय SEIAA को कमजोर करने, उस पर दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने का प्रयास किया।
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किन अफसरों ने लापरवाही या मिलीभगत बरती?
- बिना बैठक और सामूहिक निर्णय के, अकेले ही सैकड़ों पर्यावरणीय मंजूरियां जारी कीं।
- अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लिए।
- सदस्य सचिव के अवैध फैसलों को स्वीकृति दी।
- केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी की।
- बार-बार बैठक बुलाने के अनुरोध को नजरअंदाज किया।
- उच्च अधिकारियों के दबाव में काम किया या चुप्पी साधे रखी।
SEIAA को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दिया, बल्कि उस पर दबाव बनाया।
किसको फायदा दिलाने की कोशिश हुई?
- अवैध खनन परियोजनाओं को बिना वैध प्रक्रिया के मंजूरी दिलाई गई।
- जिन कंपनियों को नियमों के तहत मंजूरी नहीं मिल सकती थी, उन्हें भी फायदा पहुंचाया गया।
- करोड़ों रुपये की रिश्वत और दलाली के आरोप।
मंजूरी देने के बदले कथित तौर पर आर्थिक लाभ लिए गए।
पर्यावरण को होगा भारी नुकसान
आपको बता दें कि Thesootr के पास इस भ्रष्टाचार से जुड़े मामले के सभी दस्तावेज मौजूद हैं। जिन प्रोजेक्ट को आंख बंद करके अनुमति दी गई हैं, उनमें से कई ऐसे हैं जो पर्यावरण के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल मुख्य सचिव के सामने भी है कि इस मामले की जानकारी के बाद क्या वे कोई ठोस कार्यवाही करेंगे? क्या ये अनुमतियां रद्द की जाएंगी या फिर इस मामले में चांज बैठाई जाएगी?
ये भी पढ़ें... एमपी में सामने आया एनवायरनमेंट क्लीयरेंस घोटाला, SEIAA की बैठक के बिना ही 450 प्रोजेक्ट को मिली मंज़ूरी
चेयरमैन की ओर से ये आपत्तियां
खुद चेयरमैन का बनना पड़ा व्हिसल ब्लोअर
किसको फायदा दिलाने की कोशिश हुई?
खनन माफिया और दलाल
इन योजनाओं को श्रीमन शुक्ला द्वारा दे दी गई डीम्ड परमिशन (PDF देखें...)
जिम्मेदार कौन हैं?
2. प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग, म.प्र. शासन: अवैध फैसलों को स्वीकृति दी, केंद्र सरकार के आदेशों की अनदेखी की।
3. SEIAA के अन्य अधिकारी: बैठक बुलाने के अनुरोध को नजरअंदाज किया, उच्च अधिकारियों के दबाव में काम किया।
4. खनन माफिया और दलाल: अधिकारियों से सांठगांठ कर अवैध मंजूरी दिलाई।
घोटाले की टाइमलाइन
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 7 जनवरी 2025 | केंद्र सरकार ने SEIAA के गठन और संचालन के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। |
| 9 जनवरी 2025 | म.प्र. सरकार ने सचिवालय व्यवस्था और सपोर्ट के आदेश जारी किए। |
| मार्च-अप्रैल 2025 | SEIAA में जानबूझकर बैठकें नहीं बुलाई गईं, फाइलें लंबित रखी गईं। |
| 28 मार्च - 21 अप्रैल | एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई, सैकड़ों फाइलें सचिव स्तर पर लंबित। |
| अप्रैल - मई 2025 | सिर्फ 3 बैठकें हुईं, जबकि सैकड़ों फाइलें अकेले सदस्य सचिव ने अप्रूव कर दीं। |
| मई 2025 | शिकायतें सामने आईं, घोटाले का खुलासा हुआ। |
| जून 2025 | मामले की जांच और कार्रवाई की मांग तेज, रिपोर्ट शासन को सौंपी गई। |
उड़ा दी नियमों की धज्जियां
ये भी पढ़ें... भारत में पर्यावरण और विकास की चुनौती, विश्व पर्यावरण दिवस पर जानें क्या कहते हैं CSE रिपोर्ट
स्टेट एनवायरोमेंट इम्पेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) क्या है?
SEIAA की संरचना
- अध्यक्ष: राज्य सरकार द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी।
- सदस्य: पर्यावरण, वन, जलवायु, खनन, भूगोल, रसायन, सामाजिक विज्ञान आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ।
- सदस्य सचिव: आमतौर पर राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ अधिकारी, जो प्रशासनिक कार्य देखता है।
सिया के मुख्य कार्य और जिम्मेदारियां
SEIAA का मुख्य कार्य राज्य के भीतर आने वाली 'Category B' परियोजनाओं (जैसे छोटे-बड़े उद्योग, खनन, निर्माण, सड़क, पावर प्लांट आदि) को पर्यावरणीय मंजूरी देना है।
SEAC से सलाह लेना:
SEIAA के निर्णय लेने से पहले, राज्य पर्यावरण मूल्यांकन समिति (SEAC) तकनीकी मूल्यांकन करती है और अपनी सिफारिश देती है। SEIAA अंतिम मंजूरी देती है या अस्वीकार करती है।
जन सुनवाई और पारदर्शिता:
परियोजना क्षेत्र में जन सुनवाई आयोजित कराई जाती है, जिसमें स्थानीय लोगों की आपत्तियों और सुझावों को शामिल किया जाता है।
पर्यावरणीय शर्तों की निगरानी:
मंजूरी मिलने के बाद, परियोजना प्राधिकरण को हर छह महीने में अनुपालन रिपोर्ट देनी होती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पर्यावरणीय शर्तों का पालन हो रहा है।
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