चीन-ताइवान का विकल्प होगा मध्यप्रदेश: सेमीकंडक्टर हब में देश को करेगा आत्मनिर्भर
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी बनेगा सेमीकंडक्टर हब, विदेशी निर्भरता होगी कम।
- भोपाल या इंदौर में जल्द होगा निवेशक संवाद कार्यक्रम।
- पारस डिफेंस ने किया 6200 करोड़ का बड़ा निवेश।
- एक महीने में मिलेगी जमीन, फैक्ट्री लगाना होगा आसान।
- ईसीई छात्रों को मिलेगा सेमीकंडक्टर सेक्टर में सीधा मौका।
मध्य प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर हब बनाना चाहती है। इससे विदेशी चिप बाजार पर निर्भरता कम होगी। सरकार इसी महीने ग्लोबल निवेशक संवाद आयोजित करेगी। भोपाल या इंदौर में यह कार्यक्रम हो सकता है। पारस डिफेंस पहले ही 6,200 करोड़ का निवेश कर चुकी है।
मध्यप्रदेश अब देश के सेमीकंडक्टर मैप पर बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राज्य सरकार चाहती है कि माइक्रो चिप विदेश से मंगाने की जरूरत ही न पड़े। इसके लिए प्रदेश में ही चिप बनाने की योजना बनाई जा रही है। यह कदम भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।
निवेशकों को बुलाएगी सरकार
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश लाने के लिए राज्य सरकार इसी माह बड़ा कदम उठाएगी। भोपाल या इंदौर में एक ग्लोबल संवाद कार्यक्रम रखा जाएगा। इसमें दुनियाभर के निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में निवेशकों को मध्य प्रदेश की खासियतें बताई जाएंगी। साथ ही सेमीकंडक्टर नीति और सब्सिडी की पूरी जानकारी दी जाएगी। सरकार चाहती है कि निवेशक जल्द ही यहां फैक्ट्री लगाने का फैसला लें।
मानव संसाधन पर फोकस
इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती स्किल्ड मानव संसाधन की है। इसे देखते हुए सरकार खास एजेंसियों से संपर्क कर रही है। ये एजेंसियां पहले से ही प्रशिक्षित युवाओं की टीम तैयार रखेंगी।
इससे निवेशक कंपनियां जरूरत पड़ने पर सीधे इन्हें काम पर रख सकेंगी। कॉलेजों में ईसीई (ECE – Electronics and Communication Engineering) पढ़ रहे छात्रों से भी संपर्क किया जाएगा। इससे तकनीकी छात्रों को सीधा रोजगार मिलने की उम्मीद बनेगी।
जमीन और अनुमतियां तेज
सरकार चाहती है कि निवेशकों को एक महीने के भीतर जमीन मिल जाए। इसके साथ ही जरूरी अनुमतियां भी जल्दी दी जाएंगी। इससे कंपनियां बिना देरी अपनी यूनिट शुरू कर सकेंगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर्यावरण और फायर सेफ्टी जैसी अनुमतियां पहले से तैयार रखेगा। इससे निवेशक सीधे आकर अपना उद्योग स्थापित कर सकेंगे। नीति के अनुसार इन इकाइयों को सब्सिडी भी दी जाएगी।
पारस डिफेंस का निवेश
इस दिशा में एक बड़ा कदम पहले ही उठ चुका है। पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस लिमिटेड ने प्रदेश में एमओयू (MOU – Memorandum of Understanding) साइन किया है। यह निवेश 6,200 करोड़ रुपए का है।
इस निवेश से एक वर्ल्ड क्लास ओसेट (OSAT – Outsourced Semiconductor Assembly and Test) सेमीकंडक्टर यूनिट बनेगी। पारस सेमीकंडक्टर्स भारत की पहली अत्याधुनिक हेटेरोजीनियस पैकेजिंग ओसेट इकाई स्थापित कर रही है। यह प्रदेश के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है।
क्या मिलेगा फायदा
इस पूरी योजना से मध्य प्रदेश में रोजगार के नए मौके बनेंगे। तकनीकी छात्रों को सीधा करियर विकल्प मिलेगा। साथ ही राज्य की औद्योगिक छवि भी मजबूत होगी।
देश को भी विदेशी चिप आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में यह पहल भारत की सेमीकंडक्टर नीति के लिए मॉडल बन सकती है।
एक्सपर्ट कोट्स
"मप्र में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से निवेशकों को अवगत कराने के लिए ग्लोबल स्तर पर संवाद करेंगे। भोपाल या इंदौर में जल्द ही एक संवाद कार्यक्रम करेंगे। सरकार का प्रयास है कि निवेशक एक महीने के भीतर औद्योगिक इकाई स्थापित कर लें।"
-एम सेलवेंद्रन, प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग।
FAQ
- मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब क्यों बनाया जा रहा है?
विदेशी चिप बाजार पर निर्भरता घटाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। राज्य में ही माइक्रो चिप बनाने की योजना है। इससे तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। - निवेशक संवाद कार्यक्रम कहां होगा?
यह कार्यक्रम भोपाल या इंदौर में आयोजित हो सकता है। इसमें दुनियाभर के निवेशकों को बुलाया जाएगा। कार्यक्रम इसी महीने होने की संभावना है। - पारस डिफेंस ने कितना निवेश किया है?
पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस ने 6,200 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश ओसेट सेमीकंडक्टर यूनिट के लिए है। इसके लिए एमओयू पहले ही साइन हो चुका है।
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