सरकार का डॉक्टर्स के लिए लुभावना ऑफर, गांव में ड्यूटी करो और मनचाही सैलरी पाओ
Pawan Modiya | Aug 02, 2026, 17:43 IST
डॉक्टर्स के लिए नीति
मध्य प्रदेश के गांव और आदिवासी इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 'यू कोट, वी पे' नीति बनाई है। इसमें डॉक्टर खुद सैलरी बताएंगे। साथ ही राज्य को 14 नए मेडिकल कॉलेज भी मिले हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकार ने गांवों के लिए 'यू कोट, वी पे' नीति बनाई है।
- इसमें डॉक्टर खुद अपनी सैलरी बताएंगे, सरकार वही देगी।
- ग्रामीण सेवा देने वाले डॉक्टरों को पीजी में सीधा फायदा मिलेगा।
- मध्य प्रदेश में 14 नए मेडिकल कॉलेज मंजूर हुए हैं, 6 आदिवासी जिलों में।
- यह जानकारी लोकसभा में सांसद के सवाल पर सरकार ने दी।
अक्सर गांव और कस्बों के सरकारी अस्पतालों में बड़े डॉक्टर नहीं जाते। वे वहां सेवा देने से मना कर देते हैं। महिला रोग विशेषज्ञ, बच्चों के डॉक्टर और सर्जन जैसे पद अक्सर खाली रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह तय सरकारी वेतन है। शहरों में प्राइवेट प्रैक्टिस से डॉक्टर कहीं ज्यादा कमा लेते हैं। इसी वजह से गांव के मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता।
यू कोट, वी पे नीति क्या है
डॉक्टरों को मिलेंगे ये फायदे
सिजेरियन के लिए खास इंतजाम
एएनएम और स्टाफ को भी बोनस
मल्टी-स्किल ट्रेनिंग शुरू
जिम्मेदारी किसकी कितनी
सांसद अनिता नागर सिंह ने उठाया मुद्दा
नए मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज से बड़ा फायदा
नए मेडिकल कॉलेज कहां खुलते हैं
फंडिंग का पूरा गणित
आने वाले समय में उम्मीद है कि गांवों में डॉक्टरों की कमी कम होगी। मरीजों को अपने घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। सरकार की यह नीति सफल हुई तो बड़ा बदलाव आएगा।
जरूरी FAQ
यह मध्य प्रदेश सरकार की एक नई नीति है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर गांव या आदिवासी इलाके में सेवा देने के लिए खुद अपनी मनचाही सैलरी बता सकते हैं। सरकार आपसी सहमति के बाद डॉक्टर की मांग के हिसाब से ही उनका वेतन तय करती है। इसका मकसद बड़े डॉक्टरों को दूरदराज इलाकों में काम करने के लिए तैयार करना है, ताकि गांव के मरीजों को भी विशेषज्ञ इलाज मिल सके।
गांव में सेवा देने वाले डॉक्टरों को और क्या फायदे मिलेंगे?
ऐसे डॉक्टरों को दुर्गम क्षेत्र भत्ता और रहने के लिए बेहतर क्वार्टर मिलेंगे। इसके अलावा पीजी कोर्स में एडमिशन के दौरान उन्हें सीधी प्राथमिकता और बोनस अंकों का लाभ भी दिया जाएगा। सिजेरियन ऑपरेशन करने वाले महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया डॉक्टरों को अलग से मानदेय भी मिलेगा।
मध्य प्रदेश को कितने नए मेडिकल कॉलेज मिले हैं?
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए कुल 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है। इनमें से 6 मेडिकल कॉलेज सीधे आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जा रहे हैं। इनका निर्माण खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगे, जिसमें मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में केंद्र 60 प्रतिशत हिस्सा देगा।
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