सेना में जाति के नाम पर रेजिमेंट क्यों बनीं, एमपी से है खास कनेक्शन
CHAKRESH | Jul 28, 2026, 12:21 IST
Indian Army Regiments History
भारतीय सेना में सिख, मराठा और महार जैसे नाम अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं। साल 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने मार्शल रेस थ्योरी बनाई थी। आजादी के बाद नई जातिगत रेजिमेंट बनाने पर रोक लगा दी गई, लेकिन पुरानी परंपराएं आज भी जारी हैं।
Indian Army Regiments History: वैसे तो कहा जाता है कि सेना का कोई धर्म या जाति नहीं होती। सेना सिर्फ देश के लिए होती है तो फिर सिख रेजीमेंट, मराठा या महार रेजीमेंज जैसे नाम क्यों? चलिए बस्तर रेजीमेंट बनने की चर्चाओं के बीच आज इस पहेली को भी सुलझाते हैं।
दरअसल ये व्यवस्था अंग्रेजों ने बनाई थी। आजादी के 78 साल बाद भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई। आखिर एक धर्मनिरपेक्ष देश की फौज में जाति और क्षेत्र के नाम पर रेजिमेंट क्यों हैं?
आजादी के बाद भारत सरकार ने साफ नीति बनाई कि किसी भी नई जाति के नाम पर रेजिमेंट नहीं बनेगी। लेकिन अंग्रेजों के जमाने की पुरानी व्यवस्था और उनकी ऐतिहासिक पहचान को भंग नहीं किया गया।
वहीं, पैराशूट रेजिमेंट जैसी नई यूनिट्स में सर्व-जाति ढांचा अपनाया गया। आज भी जब अहीर या चमार रेजिमेंट की मांग उठती है, तो 1857 की यह ब्रिटिश नीति फिर चर्चा में आ जाती है। आइए इसे डिटेल से समझें...
![Indian Army Regiments History]()
भारतीय सेना में रेजीमेंट एक मजबूत प्रशासनिक और युद्ध इकाई होती है। आसान शब्दों में समझें तो ये एक ऐसा ग्रुप या फैमिली है, जहां एक जैसे बैकग्राउंड, लिगेसी या ट्रेनिंग वाले सैनिकों को एक साथ एकजुट किया जाता है।
हर रेजीमेंट का अपना एक अलग इतिहास, मोटो, वॉर क्राई, वर्दी का बैज और गौरवशाली परंपरा होती है। उदाहरण के लिए- राजपूत रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट या महार रेजीमेंट। रेजीमेंट मेनली दो तरह की होती हैं- इन्फैंट्री (पैदल सेना) और आर्मर्ड/आर्टिलरी (टैंक और तोपखाना)।
हालांकि युद्ध के मैदान में रेजीमेंट की अलग-अलग बटालियन अलग-अलग जगहों पर तैनात होती हैं। उनकी पहचान और ब्रदरहुड (Brotherhood) हमेशा उनकी मूल रेजीमेंट से ही जुड़ी रहती है।
![वो रेजिमेंट... जो जंग में सबसे पहले जाती है और आखिरी में आती है! क्या है मद्रास सेपर्स का काम? - madras sappers indian army Engineers Group tstsd - AajTak]()
भारतीय सेना में कई रेजिमेंट जाति, समुदाय या क्षेत्र के नाम पर बनी हैं। इसकी शुरुआत 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद हुई। अंग्रेजों ने भारतीयों को मार्शल और गैर मार्शल जातियों में बांट दिया। यानी फाइटर और नॉन फाइटर।
इसी बेस पर जाट, राजपूत, महार, डोगरा जैसी रेजिमेंट बनीं। हालांकि आजादी के बाद सरकार ने नई जातिगत रेजिमेंट न बनाने की नीति अपनाई, लेकिन पुरानी रेजिमेंट आज भी वैसी ही हैं।
![regiment]()
आपको बता दें कि, अंग्रेजों से पहले भारतीय सेनाओं में इस तरह का जातिगत बंटवारा नहीं था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल आर्मी में शुरू में मिलाजुला ढांचा था। लेकिन 1857 के विद्रोह ने सब बदल दिया।
असल बात ये है कि विद्रोह बंगाल, अवध और मध्य भारत के हिस्सों से उठा था। इसने अंग्रेजों को डरा दिया। अब अंग्रेज समझ ही नहीं पा रहे थे कि सेना में भर्ती करने के लिए किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं।
इस विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने जोनाथन पील की अध्यक्षता में एक कमीशन बनाया। इस कमीशन का काम था वफादार समूहों की पहचान करना। इस कमीशन को वफादार सैनिकों की भर्ती के लिए सामाजिक समूहों और क्षेत्रों की पहचान करने का काम सौंपा गया था।
यहीं से पैदा हुई मार्शल रेस थ्योरी। इसका मतलब था कुछ जातियां लड़ाकू मानी गईं, बाकी को कमजोर करार दे दिया गया। आजादी का विद्रोह भारत के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों से था। इसलिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सेना में भर्ती करना बंद कर दिया। भर्ती का केंद्र उत्तर भारत में शिफ्ट कर दिया।
इसी सोच से तीन तरह की रेजिमेंट बनीं। पहली जाति आधारित, जिसमें राजपूत, जाट, डोगरा और महार शामिल हैं। दूसरी क्षेत्र आधारित, जिसमें बिहार, कुमाऊं, मद्रास और असम रेजिमेंट आती हैं। तीसरी समुदाय आधारित, जिसमें गोरखा और मराठा रेजिमेंट शामिल हैं।
![अब अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग... सेना में क्या है जाट, राजपूत आदि रेजिमेंट का मतलब?]()
एमपी के
महार जाति का सेना में इतिहास काफी अलग रहा है। शुरुआत में महारों को नॉन-मार्शल (गैर-लड़ाकू) माना गया और भर्ती से दूर रखा गया था। लेकिन आगे चलकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष और प्रयासों के बाद 1941 में महार रेजिमेंट का फिर से गठन हुआ।
आज इस रेजिमेंट का रेजिमेंटल सेंटर मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है। इतिहास के कुछ सोर्स इसका शुरुआती गठन 1917 भी बताते हैं। लेकिन ज्यादातर ऑफिशियल रिकॉर्ड्स 1941 की ही पुष्टि करते हैं। ऐसा ही एक और उदाहरण चमार रेजिमेंट का है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान 1 मार्च 1943 को मेरठ छावनी में यह रेजिमेंट बनाई गई थी।
कोहिमा की प्रसिद्ध लड़ाई में इस रेजिमेंट के जवानों ने कमाल का पराक्रम दिखाया, जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। हालांकि, साल 1946 में इसे भंग कर दिया गया। बस यही वह टर्निंग पॉइंट था। इसके बाद से आज तक इस रेजिमेंट को दोबारा शुरू करने की मांग उठती आ रही है।
![Agnipath Scheme: भारतीय सेना में जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित 26 रेजिमेंट, अग्निवीरों की 'जाति' पूछे जाने पर बेवजह विरोध - Agnipath Scheme 26 Regiment based on caste ...]()
अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि जब अंग्रेज देश छोड़कर चले गए, तो यह पुरानी व्यवस्था खत्म क्यों नहीं हुई? जवाब सीधा है। आजादी के बाद भारत सरकार ने पुरानी और ऐतिहासिक रेजिमेंट्स को भंग करने के बजाय उन्हें बनाए रखने का फैसला किया।
हालांकि, सरकार की यह नई पॉलिसी भी तय हुई कि भविष्य में किसी भी नई जाति, समुदाय या क्षेत्र के नाम पर कोई नई रेजिमेंट नहीं बनाई जाएगी। यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था आज भी सेना का हिस्सा बनी हुई है।
![Agnipath Scheme: भारतीय सेना में जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित 26 रेजिमेंट, अग्निवीरों की 'जाति' पूछे जाने पर बेवजह विरोध - Agnipath Scheme 26 Regiment based on caste ...]()
आपके गांव या शहर से जो लड़का सेना में भर्ती होता है, उसकी रेजिमेंट अक्सर उसकी जाति या इलाके से तय होती है। मध्य प्रदेश के सागर और जबलपुर में सेना के दो बड़े रेजिमेंटल सेंटर हैं।
यहां से हर साल हजारों जवान ट्रेन होकर सीमा पर जाते हैं। तो यह सिर्फ इतिहास की किताब का विषय नहीं, आपके इलाके की असल कहानी भी है।
![eaeebcc3-a25]()
इसे रक्षा मंत्रालय नीति तय करता है। सेना ट्रेनिंग और भर्ती संभालती है। हर रेजिमेंट के पीछे वो समुदाय है जो उसे अपनी पहचान मानता ह। चाहे वो अहीरवाल के यादव हों या पंजाब के जाट।
![2d1607ee-92b]()
हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग बरसों से चल रही है। जनवरी 2023 में रक्षा राज्यमंत्री ने संसद में साफ कहा था कि अहीर रेजिमेंट बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यही रुख चमार रेजिमेंट की बहाली की मांग पर भी दोहराया जाता रहा है।
![2a7c7bcc-ede]()
मध्य प्रदेश का इस पूरे इतिहास से सीधा नाता है। महार रेजिमेंट (सागर का महार रेजिमेंट सेंटर) का रेजिमेंटल सेंटर सागर में है, जहां से अब तक बीस हजार से ज्यादा जवान सेना में गए हैं। ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट का सेंटर जबलपुर में स्थित है। यानी मध्य प्रदेश आज भी देश की दो बड़ी रेजिमेंट को जवान और ट्रेनिंग दोनों देता है।
राजस्थान का जुड़ाव नाम से है। राजपूताना राइफल्स का नाम पुराने राजपूताना क्षेत्र यानी आज के राजस्थान से आया है। और अहीर रेजिमेंट की मांग को राजस्थान के कई सांसदों का भी समर्थन मिला है। अब सुगबुगाहट है कि छत्तीसगढ़ से भी बस्तर रेजीमेंट बनाने की तैयारी में केंद्र सरकार है।
![How regiments were formed in the Indian Army what is its relation with castes | भारतीय सेना में रेजिमेंट कैसे बनाए गए, इसका जातियों से क्या है संबंध]()
पैराशूट रेजिमेंट और ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स जैसी यूनिट आजादी के बाद खासतौर पर इसलिए बनाई गईं ताकि सेना में एक मिश्रित, सर्व जाति ढांचा भी मौजूद रहे। यानी सेना खुद इस पुराने मॉडल से आगे बढ़ने की कोशिश कर चुकी है, सिर्फ पूरी तरह नहीं।
क्या लौट रहा 1991 जैसा दौर? जानिए हमारे सामने कैसी होगी आगे की आर्थिक राह
सड़क नहीं, अब स्क्रीन पर लड़ी जा रही gen z की लड़ाई
टाइगर स्कूल: जहां पढ़कर 20 अनाथ बाघ शावक जंगल में लौटे, कई बने राजा
दरअसल ये व्यवस्था अंग्रेजों ने बनाई थी। आजादी के 78 साल बाद भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई। आखिर एक धर्मनिरपेक्ष देश की फौज में जाति और क्षेत्र के नाम पर रेजिमेंट क्यों हैं?
आजादी के बाद भारत सरकार ने साफ नीति बनाई कि किसी भी नई जाति के नाम पर रेजिमेंट नहीं बनेगी। लेकिन अंग्रेजों के जमाने की पुरानी व्यवस्था और उनकी ऐतिहासिक पहचान को भंग नहीं किया गया।
वहीं, पैराशूट रेजिमेंट जैसी नई यूनिट्स में सर्व-जाति ढांचा अपनाया गया। आज भी जब अहीर या चमार रेजिमेंट की मांग उठती है, तो 1857 की यह ब्रिटिश नीति फिर चर्चा में आ जाती है। आइए इसे डिटेल से समझें...
Indian Army Regiments History
क्या होती है रेजीमेंट
हर रेजीमेंट का अपना एक अलग इतिहास, मोटो, वॉर क्राई, वर्दी का बैज और गौरवशाली परंपरा होती है। उदाहरण के लिए- राजपूत रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट या महार रेजीमेंट। रेजीमेंट मेनली दो तरह की होती हैं- इन्फैंट्री (पैदल सेना) और आर्मर्ड/आर्टिलरी (टैंक और तोपखाना)।
हालांकि युद्ध के मैदान में रेजीमेंट की अलग-अलग बटालियन अलग-अलग जगहों पर तैनात होती हैं। उनकी पहचान और ब्रदरहुड (Brotherhood) हमेशा उनकी मूल रेजीमेंट से ही जुड़ी रहती है।
वो रेजिमेंट... जो जंग में सबसे पहले जाती है और आखिरी में आती है! क्या है मद्रास सेपर्स का काम? - madras sappers indian army Engineers Group tstsd - AajTak
सेना में क्यों बनीं धर्म, जाति और स्थानों के नाम पर रेजीमेंट
इसी बेस पर जाट, राजपूत, महार, डोगरा जैसी रेजिमेंट बनीं। हालांकि आजादी के बाद सरकार ने नई जातिगत रेजिमेंट न बनाने की नीति अपनाई, लेकिन पुरानी रेजिमेंट आज भी वैसी ही हैं।
regiment
मार्शल रेस थ्योरी क्या है, जिसने बदल दी सेना की पहचान
असल बात ये है कि विद्रोह बंगाल, अवध और मध्य भारत के हिस्सों से उठा था। इसने अंग्रेजों को डरा दिया। अब अंग्रेज समझ ही नहीं पा रहे थे कि सेना में भर्ती करने के लिए किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं।
इस विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने जोनाथन पील की अध्यक्षता में एक कमीशन बनाया। इस कमीशन का काम था वफादार समूहों की पहचान करना। इस कमीशन को वफादार सैनिकों की भर्ती के लिए सामाजिक समूहों और क्षेत्रों की पहचान करने का काम सौंपा गया था।
यहीं से पैदा हुई मार्शल रेस थ्योरी। इसका मतलब था कुछ जातियां लड़ाकू मानी गईं, बाकी को कमजोर करार दे दिया गया। आजादी का विद्रोह भारत के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों से था। इसलिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सेना में भर्ती करना बंद कर दिया। भर्ती का केंद्र उत्तर भारत में शिफ्ट कर दिया।
इसी सोच से तीन तरह की रेजिमेंट बनीं। पहली जाति आधारित, जिसमें राजपूत, जाट, डोगरा और महार शामिल हैं। दूसरी क्षेत्र आधारित, जिसमें बिहार, कुमाऊं, मद्रास और असम रेजिमेंट आती हैं। तीसरी समुदाय आधारित, जिसमें गोरखा और मराठा रेजिमेंट शामिल हैं।
अब अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग... सेना में क्या है जाट, राजपूत आदि रेजिमेंट का मतलब?
एमपी के सागर में है महार रेजीमेंट
आज इस रेजिमेंट का रेजिमेंटल सेंटर मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है। इतिहास के कुछ सोर्स इसका शुरुआती गठन 1917 भी बताते हैं। लेकिन ज्यादातर ऑफिशियल रिकॉर्ड्स 1941 की ही पुष्टि करते हैं। ऐसा ही एक और उदाहरण चमार रेजिमेंट का है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान 1 मार्च 1943 को मेरठ छावनी में यह रेजिमेंट बनाई गई थी।
कोहिमा की प्रसिद्ध लड़ाई में इस रेजिमेंट के जवानों ने कमाल का पराक्रम दिखाया, जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। हालांकि, साल 1946 में इसे भंग कर दिया गया। बस यही वह टर्निंग पॉइंट था। इसके बाद से आज तक इस रेजिमेंट को दोबारा शुरू करने की मांग उठती आ रही है।
Agnipath Scheme: भारतीय सेना में जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित 26 रेजिमेंट, अग्निवीरों की 'जाति' पूछे जाने पर बेवजह विरोध - Agnipath Scheme 26 Regiment based on caste ...
अंग्रेज गए, पर यह सिस्टम क्यों नहीं बदला
हालांकि, सरकार की यह नई पॉलिसी भी तय हुई कि भविष्य में किसी भी नई जाति, समुदाय या क्षेत्र के नाम पर कोई नई रेजिमेंट नहीं बनाई जाएगी। यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था आज भी सेना का हिस्सा बनी हुई है।
Agnipath Scheme: भारतीय सेना में जाति, धर्म और क्षेत्र आधारित 26 रेजिमेंट, अग्निवीरों की 'जाति' पूछे जाने पर बेवजह विरोध - Agnipath Scheme 26 Regiment based on caste ...
यह आपसे क्यों जुड़ा है
यहां से हर साल हजारों जवान ट्रेन होकर सीमा पर जाते हैं। तो यह सिर्फ इतिहास की किताब का विषय नहीं, आपके इलाके की असल कहानी भी है।
eaeebcc3-a25
अब कौन तय करता है कौन सी रेजीमेंट बनेगी
2d1607ee-92b
अब हम आते हैं आज की मांगों पर
2a7c7bcc-ede
रेजीमेंट्स का MP, RJ और CG कनेक्शन
राजस्थान का जुड़ाव नाम से है। राजपूताना राइफल्स का नाम पुराने राजपूताना क्षेत्र यानी आज के राजस्थान से आया है। और अहीर रेजिमेंट की मांग को राजस्थान के कई सांसदों का भी समर्थन मिला है। अब सुगबुगाहट है कि छत्तीसगढ़ से भी बस्तर रेजीमेंट बनाने की तैयारी में केंद्र सरकार है।
ये खबर भी पढ़ें....
How regiments were formed in the Indian Army what is its relation with castes | भारतीय सेना में रेजिमेंट कैसे बनाए गए, इसका जातियों से क्या है संबंध
एक बात जो आप नहीं जानते थे
FAQ
- भारतीय सेना में जाति आधारित रेजिमेंट कब शुरू हुईं?
इनकी शुरुआत 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद हुई। अंग्रेजों ने मार्शल रेस थ्योरी के आधार पर भर्ती नीति बदल दी। - क्या आज भी सेना में नई जातिगत रेजिमेंट बनती है?
नहीं। आजादी के बाद से सरकार ने किसी नई जाति, समुदाय या क्षेत्र के नाम पर रेजिमेंट न बनाने की नीति अपनाई है। - भारतीय सेना में आज कुल कितनी इन्फैंट्री रेजिमेंट हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय भारतीय सेना में 27 इन्फैंट्री रेजिमेंट हैं, जिनमें से कई आज भी जाति या क्षेत्र आधारित पहचान रखती हैं।
Thesootr Prime से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें...
सड़क नहीं, अब स्क्रीन पर लड़ी जा रही gen z की लड़ाई
टाइगर स्कूल: जहां पढ़कर 20 अनाथ बाघ शावक जंगल में लौटे, कई बने राजा
सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By Umeshwari Baghel
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
By Arohi Raj
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड
By Umeshwari Baghel
बंटी नागर सुसाइड केस: रियल एस्टेट कारोबारी की मौत पर तीन महिलाएं पुलिस के राडार पर
By Sanjay Gupta