सड़क नहीं, अब स्क्रीन पर लड़ी जा रही gen z की लड़ाई
Pawan Modiya | Jul 27, 2026, 08:30 IST
जेन जी प्रोटेस्ट
दुनियाभर में जेन-जी के प्रदर्शन का तरीका बदल गया है। नेपाल, मोरक्को और भारत में सोशल मीडिया के दम पर बड़े आंदोलन खड़े हुए। जानें कैसे स्क्रीन बनी नई पीढ़ी का सबसे बड़ा हथियार।
नेपाल में गिरी सरकार
नेपाल के युवा
सितंबर 2025 में नेपाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बैन कर दिए थे। यूट्यूब और एक्स समेत कई प्लेटफॉर्म बंद कर दिए गए। सरकार का मकसद भ्रष्टाचार विरोधी आवाजों को दबाना था। लेकिन नतीजा उल्टा निकला। इस बैन के खिलाफ जेन-जी सड़कों पर उतर आई। लोगों ने सरकारी जवाबदेही की भी मांग की। पांच दिनों तक हिंसक आंदोलन चला।
आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इस दौरान संसद और राष्ट्रपति भवन तक में आग लगाई गई। अंत में सरकार को सोशल मीडिया बैन भी वापस लेना पड़ा।
मोरक्को में युवाओं का गुस्सा
मोरक्को में प्रदर्शन
यह सिलसिला सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहा। कार्नेगी एंडाउमेंट की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल तकनीक ने युवाओं को नई ताकत दी है। इससे लाखों युवा एकजुट हो पाए हैं। इससे कई देशों में सरकारों के खिलाफ भारी असंतोष पैदा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार कई सरकारों ने मुद्दे सुलझाने के बजाय दमन का रास्ता चुना।
मोरक्को में भी ऐसा ही देखने को मिला। युवाओं ने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की मांग रखी। उन्होंने ये मांगें सीधे सोशल मीडिया पर उठाईं। यहां भी किसी पारंपरिक यूनियन या पार्टी का सहारा नहीं लिया गया। सोशल मीडिया ही इस आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार बना।
भारत में मीम फेस्ट प्रदर्शन
भारत में प्रदर्शन
अब बात भारत की स्थिति की। जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ। हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। मांग थी कि नीट पेपरलीक मामले में शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। यह प्रदर्शन इंटरनेट पर एक मीम फेस्ट जैसा बन गया। दिल्ली की सड़कें किसी इंस्टाग्राम फीड जैसी लगने लगीं। पोस्टर और ग्रैफिटी से सड़कें सज गईं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर तीखे वन-लाइनर्स से तंज कसे।
एक 20 साल की प्रदर्शनकारी ने बड़ी बात कही। उसने कहा कि सरकार युवाओं के प्रति जिम्मेदारी से लीक कर रही है। यह शब्द सीधे पेपरलीक विवाद पर तंज था। एक अन्य युवती ने प्रदर्शन का वीडियो इंस्टाग्राम पर डाला। उसने लिखा, आज हमने संसद की घंटी बजाई और भाग गए। इस पीढ़ी का प्रदर्शन गुस्से से भरा है। लेकिन इसका अंदाज पूरी तरह डिजिटल और देसी है।
जेन-जी की गहरी बेचैनी
यह बेचैनी व्यवस्था, सरकार और भविष्य को लेकर है। इस पीढ़ी की आदत है, हर चीज पर रील बनाना और शेयर करना। किताब के मुताबिक यह सिर्फ जुनून से नहीं आता। यह एक गहरी बेचैनी से भी आता है। कई युवाओं को लगता है, बिना शेयर किए उनकी आवाज नहीं सुनी जाएगी।
क्या टिकाऊ है यह बदलाव
सरकारें अब सोशल मीडिया को हथियार बना रही हैं। सरकारें इसके जरिए दुष्प्रचार फैला रही हैं। सरकारें प्रदर्शनकारियों में फूट डालने की कोशिश भी कर रही हैं। कुछ मामलों में सरकारें ताकत के दम पर प्रदर्शनकारियों को डरा भी रही हैं।
ये तो शुरुआत भर है
असली सवाल यह है कि सरकारें इस पीढ़ी को कैसे समझेंगी। इस पीढ़ी की भाषा मीम्स, रील्स और हैशटैग की है। सरकारें अब भी लाठी और इंटरनेट बैन से जवाब दे रही हैं। इस पीढ़ी ने विरोध का पूरा तरीका बदल दिया है। यह गुस्सा अब सड़क से स्क्रीन तक पहुंच चुका है।
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