एमपी के दो कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान: राष्ट्रपति ने निधि चोपड़ा और रवींद्र रॉय को किया सम्मानित
कौन हैं निधि चोपड़ा?
निधि चोपड़ा (Nidhi Chopra) का जन्म नई दिल्ली में हुआ था। अब वह भोपाल में रहकर कला के क्षेत्र में काम करती हैं। उन्होंने जयपुर से मूर्तिकला में ललित कला स्नातक की पढ़ाई की है। उनकी कला में स्मृतियों और पहचान जैसे विषयों की झलक मिलती है। वह सिरेमिक और मूर्तिकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सिरेमिक में पकी हुई मिट्टी से कलाकृतियां तैयार की जाती हैं। उनकी कलाकृतियां ललित कला अकादमी और भारत भवन में प्रदर्शित हो चुकी हैं।
ऑपरेशन सिंदूर को ग्रैंड प्राइज
मध्यप्रदेश के दूसरे कलाकार रवींद्र रॉय ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी कलाकृति ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को ग्रैंड प्राइज मिला है। यह सम्मान थर्ड प्रिंट बिनाले इंडिया-2026 की प्रिंट मेकिंग प्रतियोगिता में मिला। इस आयोजन में भारतीय और विदेशी कलाकारों की कलाकृतियां शामिल थीं। रॉय की कलाकृति ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वाले मंच पर अपनी पहचान बनाई।
देश-विदेश के शिविरों में भागीदारी
निधि ने 2004 में ललित कला अकादमी के अंतरराष्ट्रीय सिरेमिक शिविर में भाग लिया। वर्ष 2006 में वह जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन (JSW Foundation) के सिरेमिक शिविर में शामिल हुईं। उन्होंने वर्ष 2010 में राष्ट्रीय टेराकोटा शिविर में हिस्सा लिया। साल 2015 में वह भारत-दक्षिण कोरिया सिरेमिक शिविर से जुड़ीं। उन्होंने वर्ष 2024 में चीन के लोंगक्वान में सिरेमिक रेजिडेंसी की। साल 2025 में भोपाल के भारत भवन में आयोजित राष्ट्रीय सिरेमिक शिविर में शामिल हुईं। वह मध्यप्रदेश के कई कला महाविद्यालयों में व्याख्यान भी दे चुकी हैं। यह पुरस्कार उनकी कला यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
तीन विशेष सम्मान भी मिले
समारोह में ग्रैंड प्राइज के अलावा तीन विशेष उल्लेख सम्मान भी दिए गए। मध्यप्रदेश के रविंद्र रॉय को ग्रैंड प्राइज से सम्मानित किया गया। अन्य कलाकारों को उनकी कलाकृतियों और विशेष तकनीकों के लिए सम्मान मिला।
2,495 प्रविष्टियों में 270 चुनी गईं
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिए करीब 2,495 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। ये प्रविष्टियां 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आई थीं। इनके तहत 6,175 से ज्यादा कलाकृतियां नामांकन के लिए भेजी गई थीं। इतनी कलाकृतियों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन दो चरणों में किया गया। निर्णायक मंडल ने इस प्रक्रिया के बाद 270 उत्कृष्ट कलाकृतियां चुनीं। इनमें से 20 कलाकारों को राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार मिले।
प्रदर्शनी में मूर्तिकला और चित्रकला सहित विभिन्न विधाओं की कलाकृतियां शामिल थीं। इनमें रेखांकन और प्रिंट मेकिंग की कृतियां भी थीं। निधि चोपड़ा की ‘टैंजिबल ड्रीम्स’ सिरेमिक माध्यम से बनी मूर्तिकला है। उनकी इस कलाकृति को मूर्तिकला श्रेणी में पुरस्कार मिला।
कला के पीछे वर्षों की साधना
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कलाकारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कलाकृति के पीछे केवल रंग और तकनीक नहीं होती। उसमें कलाकार की संवेदना और विचार भी शामिल होते हैं। हर कलाकृति के पीछे वर्षों की साधना होती है। कला समाज के महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाती है। यह दुनिया को नए नजरिए से देखने का अवसर भी देती है।
शेखावत ने कहा कि सरकार कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय कला जगत से जोड़ रही है। कलाकारों को कला संग्राहकों से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे उन्हें पहचान के साथ आर्थिक अवसर भी मिल सकेंगे। उन्होंने नई पीढ़ी को कला साधना से जोड़ने की जरूरत बताई।
यह समारोह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आयोजित हुआ। इसमें देशभर के कलाकारों को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश के लिए यह आयोजन खास रहा। प्रदेश के दो कलाकारों को उनकी कलाकृतियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।
प्रिंट मेकिंग क्या है?
प्रिंट मेकिंग को हिंदी में छापांकन कहा जाता है। इस कला में किसी सतह या प्लेट पर छवि तैयार की जाती है। इसके बाद उस छवि को कागज या दूसरे माध्यम पर छापा जाता है। कलाकार रेखाओं और रंगों के जरिए अपने विचार व्यक्त करते हैं। सतह की बनावट भी इस कला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
FAQ
- निधि चोपड़ा को कौन-सा पुरस्कार मिला है?
निधि चोपड़ा को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार उन्हें मूर्तिकला श्रेणी में दिया गया। उनकी सिरेमिक कलाकृति का नाम टैंजिबल ड्रीम्स है। - राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में कितने कलाकारों को पुरस्कार मिले?
कुल 20 कलाकारों को राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार मिले। प्रदर्शनी के लिए करीब 2,495 प्रविष्टियां आई थीं। दो चरणों की चयन प्रक्रिया के बाद 270 कलाकृतियां चुनी गईं।