SPS से IPS प्रमोशन की दौड़ में 8 अफसर सफल, एक नाम जांच में अटका
मध्य प्रदेश के राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों के लिए लंबे समय से इंतजार की जा रही IPS प्रमोशन प्रक्रिया में बड़ा फैसला सामने आया है। आज यानी 25 जून को मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक में 27 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया। बैठक के बाद आठ अधिकारियों को IPS अवॉर्ड के लिए मंजूरी दे दी गई है। वहीं, जबकि एक अधिकारी का मामला विभागीय जांच के कारण फिलहाल अटक गया है।
मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक
राज्य पुलिस सेवा (SPS) से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति के लिए गुरुवार, 25 जून को मंत्रालय में अहम बैठक आयोजित की गई। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्य संजय वर्मा की अध्यक्षता में हुई डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रमोशन के लिए पात्र अधिकारियों के रिकॉर्ड और सेवा विवरण की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, समिति ने कुल 27 नामों पर विस्तार से चर्चा की और उपलब्ध नौ पदों के मुकाबले अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी की।
इन आठ अधिकारियों को मिली मंजूरी
बैठक के बाद जिन अधिकारियों के नामों को IPS प्रमोशन के लिए स्वीकृति मिली है, उनमें एक 1997 बैच और सात 1998 बैच के अधिकारी शामिल हैं।
चयनित अधिकारियों की सूची
- सीताराम सदभैया (1997 बैच)
- निमिषा पांडे (1998 बैच)
- मलय जैन (1998 बैच)
- अमित सक्सेना (1998 बैच)
- मनीषा पाठक सोनी (1998 बैच)
- सुमन गुर्जर (1998 बैच)
- एस.एस. सराफ (1998 बैच)
- समर वर्मा (1998 बैच)
समिति ने इन सभी नामों को हरी झंडी दे दी है। अब आगे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें IPS कैडर अलॉट कर दिया जाएगा।
क्यों अटका राजेश मिश्रा का मामला?
चयन प्रक्रिया के दौरान राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी राजेश मिश्रा का नाम भी विचाराधीन सूची में शामिल था। हालांकि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच के कारण समिति ने उनके मामले को सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) में रखने का निर्णय लिया गया है।
सरकारी प्रक्रियाओं के अनुसार, जब किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच लंबित होती है, तब उसके प्रमोशन संबंधी निर्णय को अंतिम रूप नहीं दिया जाता। जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही उनके मामले पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
चयन समिति की मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों की औपचारिक प्रक्रिया से गुजरेगा। इसके बाद चयनित अधिकारियों के नामों की अधिसूचना जारी होगी और उन्हें IPS कैडर आवंटित किया जाएगा। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। साथ ही, चयनित अधिकारियों को शीघ्र ही आधिकारिक तौर पर IPS का दर्जा मिल जाएगा।
FAQ
- राज्य सेवा के अधिकारी IPS कैसे बनते हैं?
राज्य पुलिस सेवा में काम कर रहे अधिकारियों को उनकी वरिष्ठता, गोपनीय रिपोर्ट और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर आईपीएस में पदोन्नत किया जाता है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार की संयुक्त समिति मिलकर डीपीसी की बैठक करती है। इस प्रक्रिया में हर बैच के एक निश्चित अनुपात में ही अधिकारियों को चुना जाता है। - DPC क्या होती है?
डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति एक आधिकारिक कमेटी होती है जो सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति तय करती है। इसमें यूपीएससी के प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव और संबंधित विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। समिति उम्मीदवारों की सीआर, विभागीय जांच, कोर्ट केस और अन्य रिकॉर्ड की समीक्षा करके अंतिम चयन करती है।
ये खबरें भी पढ़िए...
मध्यप्रदेश में पंचायत सचिवों की नई तबादला नीति जारी, गृहग्राम में नहीं रह सकेंगे पदस्थ
दूसरे राज्यों से भी सस्ता होगा एमपी सुगम बस सेवा का सफर, 400 रुपए तक की होगी बचत
MP में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त पर बवाल, CM ने नियम खारिज किया
MP News: बिना बैंक गारंटी करोड़ों के काम, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?