आज से MP में शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, पहले दिन चलेंगी 351 बसें, दो रुपए/किमी होगा किराया

Amresh Kushwaha | Sept 23, 2026, 09:08 IST
सुगम परिवहन सेवा
मध्य प्रदेश में आज यानी 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू हो रही है। पहले दिन सात शहरों में 351 बसें चलेंगी, जबकि 2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क स्थापित करने का लक्ष्य है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • आज यानी 25 सितंबर से भोपाल से सुगम परिवहन सेवा शुरू हो रही है।
  • पहले दिन 7 शहरों से 351 बसें चलना शुरू होंगी।
  • मार्च 2027 तक 1006 बसों के संचालन का लक्ष्य है।
  • सितंबर 2031 तक प्रदेश में करीब 15 हजार बसें चलेंगी।
  • 7 शहरों में सहायक कंपनियों की भर्ती भी शुरू हो गई है।

आज से शुरू होगी बस सेवा

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा आज यानी 25 सितंबर से शुरू हो रही है। इसकी शुरुआत भोपाल से की जाएगी। पहले ही दिन प्रदेश के सात शहरों से बसें चलने लगेंगी। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, भिंड और कटनी शामिल हैं।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज भोपाल के BHEL दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नई बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।



कैबिनेट बैठक में मंगलवार, 22 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने परिवहन विभाग ने रोडमैप पेश किया था। यह पूरा प्रजेंटेशन योजना के भविष्य को लेकर था। सरकार चाहती है कि बड़े निजी बस ऑपरेटरों को भी पूरा प्रतिनिधित्व मिले। सरकार खुद कोई बस नहीं खरीदेगी। सारी बसें निजी ऑपरेटरों की ही होंगी। सरकार सिर्फ रूट तय करेगी और पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी सेवा के लिए दो रुपए प्रति किलोमीटर किराया तय किया है।



सीएम ने कहा- यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में 21 साल बाद फिर से सरकारी बस सेवा शुरू होना एक बड़ा फैसला है। धीरे-धीरे सभी शहरों और जिलों तक आधुनिक इलेक्ट्रिक और आरामदायक बसों का जाल बिछाया जाएगा। इसके लिए नए बस स्टैंड, बस स्टॉप, ऑनलाइन सुविधाएं और बसों की सही निगरानी की व्यवस्था बनाई जाएगी।



पहले दिन कहां कितनी बसें

पहले दिन कुल 351 बसें सड़कों पर उतरेंगी। इनमें सबसे ज्यादा बसें इंदौर और भोपाल रूट पर चलेंगी। इंदौर से दूसरे शहरों के लिए 50 बसें चलेंगी। इंदौर शहर के अंदर 40 बसें चलेंगी। इंदौर से पीएम ई-बस सेवा की 55 बसें भी जुड़ेंगी। भोपाल से दूसरे शहरों के लिए 23 बसें चलेंगी।



भोपाल शहर के अंदर 38 बसें चलेंगी। भोपाल में पीएम ई-बस की 45 बसें भी शामिल होंगी। जबलपुर से दूसरे शहरों के लिए 14 बसें चलेंगी। जबलपुर शहर के अंदर 27 बसें चलेंगी। यहां पीएम ई-बस की 26 बसें भी जुड़ेंगी। रीवा से 18 बसें, देवास से 10 बसें चलेंगी। इसके अलावा कटनी से 3 और भिंड से 2 बसें शुरू होंगी।



5 साल में 15 हजार बसें

विभाग की योजना पूरी तरह चरणबद्ध तरीके से बनाई गई है। पहले छह महीने यानी मार्च 2027 तक 1006 बसों का संचालन लक्ष्य है। सितंबर 2027 तक यह संख्या बढ़कर करीब ढाई हजार हो जाएगी। ठीक आंकड़ों में यह लक्ष्य 2591 बसों का है। सितंबर 2028 तक कुल 5164 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। सितंबर 2029 तक यह आंकड़ा 8161 बसों तक पहुंचेगा।



सितंबर 2030 तक करीब 11 हजार 949 बसें सड़कों पर होंगी। आखिरकार सितंबर 2031 तक कुल 14 हजार 981 बसें चलेंगी। यानी पांच साल में करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार होगा। मंत्री ने बताया कि यह देश का पहला ऐसा मॉडल है। पहले सिर्फ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी। अब मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था शुरू हो रही है।



रूटों का पूरा गणित समझें

योजना के तहत रूटों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा सिटी रूट का है, जो शहर से उपनगरीय इलाकों तक जाएगा। ऐसे कुल 252 सिटी रूट तय किए गए हैं। दूसरा हिस्सा दूरस्थ रूट का है। ये रूट एक क्षेत्रीय मुख्यालय से दूसरे क्षेत्रीय मुख्यालय तक जाएंगे। ऐसे कुल 3000 दूरस्थ रूट बनाए गए हैं।



तीसरा हिस्सा इंटरस्टेट रूट का है। ये रूट मध्य प्रदेश से दूसरे राज्यों तक जाएंगे। ऐसे कुल 436 इंटरस्टेट रूट तय किए गए हैं। शहरवार रूटों की बात करें तो इंदौर से सबसे ज्यादा 27 रूट हैं। भोपाल से 9 रूट, जबलपुर से 8 रूट तय हुए हैं। रीवा से 4, सागर से 3 रूट बनाए गए हैं। वहीं ग्वालियर और उज्जैन से 5-5 रूट तय हुए हैं।



सुरक्षा पर रहेगी पैनी नजर

हर बस में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम भी लगेंगे। इससे हर बस की लोकेशन ऑनलाइन पता चलती रहेगी। सुरक्षा और निगरानी के लिए विभाग ने चार बड़े बिंदु तय किए हैं। पहला बिंदु है मांग आधारित शेड्यूलिंग। इसमें निजी बस ऑपरेटरों के अनुभव का भी इस्तेमाल होगा। दूसरा बिंदु है इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम। इसके तहत लाइव लोकेशन, स्पीड और ड्राइविंग के तरीके पर नजर रहेगी।



सीसीटीवी की मदद से ड्राइवर की जवाबदेही तय होगी। तीसरा बिंदु यात्री सुविधाओं का है। इसमें बस टर्मिनल, डिपो, स्टॉप और सड़क किनारे बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। चौथा बिंदु जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति का है। यह समिति जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में काम करेगी। इसमें जनप्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे और जमीनी निगरानी करेंगे।



7 शहरों में भर्ती शुरू

योजना को लागू करने के लिए सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाई गई हैं। ये कंपनियां भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन और सागर में काम करेंगी। सभी सातों कंपनियों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।



विभाग का अनुमान है कि यह भर्ती तीन से चार महीने में पूरी होगी। इसमें तकनीकी स्टाफ सहित कुल 700 पदों पर भर्ती होनी है। अभी तक इन पदों के लिए 2000 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। इससे साफ है कि युवाओं में इस योजना को लेकर उत्साह है।



ग्रामीण और शहरी दोनों के लिए फायदेमंद

यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। अभी कई छोटे शहरों और कस्बों में अच्छी बस सुविधा नहीं है। नई योजना लागू होने के बाद यह कमी दूर हो सकती है। इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर नौकरी और पढ़ाई के लिए रोज आने-जाने वालों को फायदा होगा। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए भी यह सेवा उपयोगी साबित होगी। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।



फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर 25 सितंबर की शुरुआत पर टिकी है। भोपाल से होने वाला यह शुभारंभ बड़ा कार्यक्रम माना जा रहा है। इसके बाद अगले पांच साल तक इस योजना का विस्तार होता रहेगा। परिवहन विभाग का दावा है कि हर चरण की निगरानी सख्ती से होगी। आने वाले समय में यह योजना परिवहन ढांचा पूरी तरह बदल सकती है।



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