MP में आधी रात बदल जाता है एंबुलेंस का काम, मरीज छोड़ ढो रहीं सब्जियां
Amresh Kushwaha | Sept 22, 2026, 14:45 IST
एंबुलेंस का काम, मरीज छोड़ ढो रहीं सब्जियां
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में 108 एंबुलेंस मरीज की जगह सब्जियां ढोते वीडियो में कैद हुई। सीएमएचओ ने इसे शर्मनाक बताया और कार्रवाई का भरोसा दिया। जानें पूरा मामला।
समझें क्या है पूरा मामला...
- नर्मदापुरम में 108 एंबुलेंस से सब्जियां ढोने का मामला सामने आया है।
- रविवार रात हीरो होंडा चौराहे पर एंबुलेंस में सब्जियां लादी गईं।
- एक युवक ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया।
- सोमवार को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
- सीएमएचओ ने घटना को शर्मनाक बताते हुए कार्रवाई की बात कही है।
एंबुलेंस बनी मालगाड़ी
सोमवार, 21 सितंबर को इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो देखने के बाद लोगों में गुस्सा फैल गया। स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सीएमएचओ ने इस घटना को शर्मनाक और गंभीर बताया है।
यह पूरा मामला नर्मदापुरम जिले का है। घटना हीरो होंडा चौराहे के पास हुई। रविवार देर रात एक 108 एंबुलेंस बीच सड़क पर खड़ी की गई। इसके पीछे के दरवाजे खोले गए। अंदर बने स्ट्रेचर पर सब्जियों से भरे कट्टे रखे गए। साथ ही कैरेट और बड़ी बोरियां भी ठूंस-ठूंस कर लादी गईं। यह नजारा देखकर वहां से गुजर रहे लोग हैरान रह गए।
कैसे हुआ पूरा खेल
वीडियो में क्या दिखा
घटना सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों में इसे लेकर बेचैनी देखी गई। 108 एंबुलेंस सेवा की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आपातकालीन सेवा की निगरानी कौन करता है। यदि ऐसी लापरवाही होती रही, तो मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इस घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।
सीएमएचओ ने क्या कहा
सीएमएचओ ने यह भी बताया कि पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। उनके मुताबिक कई बार एंबुलेंस देरी से पहुंचने की शिकायत आई थी। ऐसी लापरवाही की जानकारी अब वरिष्ठ कार्यालय को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। दोषी कर्मचारी या ऑपरेटर पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अभी कितनी एंबुलेंस चालू
पहले भी उठे सवाल
आपातकालीन एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए जीवनरक्षक मानी जाती है। ऐसे में इसका गलत इस्तेमाल बड़ी लापरवाही की श्रेणी में आता है। यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न हो, तो जान को खतरा हो सकता है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि निगरानी तंत्र कमजोर है। लोगों की मांग है कि इस पर जल्द सख्त कदम उठाए जाएं।
स्वास्थ्य विभाग कर रही जांच
ग्रामीण इलाकों में 108 एंबुलेंस सेवा पर लोगों की निर्भरता ज्यादा होती है। कई गांवों में निजी वाहन आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में मरीज सिर्फ सरकारी एंबुलेंस के भरोसे रहते हैं। अगर यही सेवा दुरुपयोग की भेंट चढ़ जाए, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। लोगों की मांग है कि हर एंबुलेंस की जीपीएस (Global Positioning System) निगरानी हो। इससे किसी भी गड़बड़ी का तुरंत पता चल सकेगा।
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