MP में लाखों परिवारों को फ्री रजिस्ट्री, कपास मंडी शुल्क भी घटा, अध्यादेश जारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री का अध्यादेश जारी किया है।
- 48 लाख से अधिक लोगों को स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क में पूरी छूट मिलेगी।
- सरकार पर इस फैसले से 3800 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ आएगा।
- कपास पर मंडी शुल्क 1% से घटाकर 0.50% कर दिया गया है।
- सामान्य मंडी शुल्क 1% से बढ़ाकर 1.50% किया गया है।
गांव वालों को मिलेगी मुफ्त रजिस्ट्री
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। बता दें कि 02 जून को हुई कैबिनेट बैठक में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत स्वामित्व योजना में शामिल लोगों को अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए एक भी रुपया नहीं देना होगा। स्टॉम्प ड्यूटी (Stamp Duty) और पंजीयन शुल्क दोनों पूरी तरह माफ होंगे।
इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है। पंजीयन विभाग और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए हैं। सरकार मानसून सत्र में इससे जुड़े विधेयक भी विधानसभा में ला सकती है।
कितने लोगों को होगा सीधा फायदा
अब तक प्रदेश में कुल 68 लाख 11 हजार अधिकार अभिलेख बनाए जा चुके हैं। इनमें 48 लाख 32 हजार निजी संपत्ति के मामले हैं। इनमें नागरिकों की निजी जमीन, मकान, प्लॉट और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशासन द्वारा इन अभिलेखों का डिजिटलीकरण और पंजीयन की प्रक्रिया लगातार जारी है।
स्वामित्व योजना में अब तक क्या हुआ
प्रदेश के 42 हजार 55 गांवों में सर्वे किया गया है। इनमें से 40 हजार 536 गांवों में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। कुल 65 लाख 93 हजार अधिकार अभिलेख तैयार हो चुके हैं। 46 लाख 80 हजार हितग्राहियों को उनके अधिकार अभिलेख बांटे जा चुके हैं। अभी 19 लाख 12 हजार अभिलेखों का वितरण बाकी है। योजना का 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 16 लाख अभिलेखों के पंजीयन का अनुमान है।
लोन लेना होगा आसान
09 जून की कैबिनेट में यह भी तय किया गया कि स्वामित्व योजना में जिन लोगों के अधिकार अभिलेख बने हैं, उन्हें आसानी से लोन दिलाने के लिए इन अभिलेखों का पंजीयन जरूरी है। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस (Deed of Conveyance) की कमी पूरी की जाएगी।
पंजीयन होने के बाद नागरिक घर बनाने, व्यापार शुरू करने या खेती के लिए बैंक से लोन ले सकेंगे। इससे उनकी आजीविका और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इस पूरी योजना के क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास और एमपीएसईडीसी (MPSEDC- Madhya Pradesh State Electronics Development Corporation) के प्रबंध संचालक सदस्य होंगे। योजना के प्रचार-प्रसार और जन-जागरूकता के लिए 10 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए हैं।
कपास मंडी शुल्क में कटौती
किसानों और उद्योगों के लिए भी एक बड़ी राहत आई है। बता दें कि 09 जून की कैबिनेट बैठक में कपास पर मंडी शुल्क एक प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने का फैसला हुआ। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब कपास की कीमत के हर 100 रुपए पर केवल 50 पैसे मंडी शुल्क लगेगा।
प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग (Cotton Ginning) मिलें हैं। इनकी प्रोसेसिंग क्षमता करीब 13 लाख मीट्रिक टन है। महाराष्ट्र सरकार पहले से ही 0.50 प्रतिशत मंडी शुल्क ले रही थी। इसके चलते मध्य प्रदेश की जिनिंग मिलों का कारोबार प्रभावित हो रहा था। अब शुल्क घटने से इन मिलों का महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा। रोजगार में वृद्धि होगी और जीएसटी (GST- Goods and Services Tax) संग्रहण भी बढ़ेगा।
सामान्य मंडी शुल्क में बढ़ोतरी भी
इसके साथ ही कृषि उपज मंडियों में लगने वाला सामान्य मंडी शुल्क एक रुपए से बढ़ाकर 1.50 रुपए प्रति 100 रुपए किया गया है। इससे सरकार को 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होगी। इस बढ़ाए गए 50 पैसे का उपयोग तय किया गया है। जो इस प्रकार है-
- 20 पैसे किसान सड़क निधि से ग्रामीण सड़क विकास में जाएंगे
- 10 पैसे मंडियों की मूलभूत संरचनाओं पर खर्च होंगे
- 12 पैसे गौ-संवर्धन एवं संरक्षण निधि में लगेंगे
- 4.25 पैसे कृषि अनुसंधान एवं कृषि अधोसंरचना विकास निधि के लिए
- दो पैसे मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना के लिए
- 1.75 पैसे प्रचार-प्रसार एवं कृषक सम्मेलन के लिए उपयोग किए जाएंगे।
निराश्रित शुल्क पहले की तरह 20 पैसे ही रहेगा। इन पैसों से जिलों में कोल्डस्टोरेज (Cold Storage), वेयरहाउस (Warehouse) और लॉजिस्टिक सुविधाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
FAQ
- स्वामित्व योजना में मुफ्त रजिस्ट्री किसे मिलेगी और कैसे?
मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत जिन ग्रामीण नागरिकों के अधिकार अभिलेख तैयार हो चुके हैं, उन्हें मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ मिलेगा। इनमें 48.32 लाख निजी संपत्ति धारक शामिल हैं जिनकी जमीन, मकान, प्लॉट या अन्य संपत्तियां हैं। सरकार ने स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क दोनों पूरी तरह माफ कर दिए हैं।
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