ACS दीपाली रस्तोगी लोकायुक्त के सामने होंगी पेश, विभाग की अनदेखी पर होंगे सवाल

Sourabh Bhatnagar | Jul 21, 2026, 13:02 IST
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मध्य प्रदेश के पोषण आहार घोटाले की जांच में अब एसीएस दीपाली रस्तोगी को लोकायुक्त के सामने पेश होना होगा। कैग रिपोर्ट और विभाग के जवाब में तारीखों को लेकर विरोधाभास सामने आया है। लोकायुक्त ढाई साल से पालन रिपोर्ट मांग रहा है, लेकिन जवाब अधूरा मिल रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में पोषण आहार घोटाले की जांच तेज हो गई है।
  • एसीएस दीपाली रस्तोगी को लोकायुक्त के सामने पेश होना होगा।
  • कैग रिपोर्ट और विभागीय जवाब में बड़ा फर्क मिला है।
  • ढाई साल से लोकायुक्त पालन रिपोर्ट मांग रहा है।
  • पूर्व अफसरों को बचाने का आरोप विधायक ने लगाया है।

मध्य प्रदेश के पोषण आहार घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। यह मामला महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा है। इसमें टेक होम राशन यानी टीएचआर (MP Take Home Ration Scam) के नाम पर अरबों रुपए की गड़बड़ी का आरोप है। लोकायुक्त ने अब कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।



किन अफसरों पर है नजर

जांच के दायरे में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का नाम भी शामिल है। इसके अलावा तत्कालीन एसआरएलएम यानी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ ललित मोहन बेलवाल भी जांच के घेरे में हैं। विधानसभा में सरकार के जवाब और लोकायुक्त के रिकॉर्ड में अंतर मिलने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।



एसीएस को पेश होने का निर्देश

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव यानी एसीएसआईएएस दीपाली रस्तोगी को कई बार नोटिस भेजे गए। हर बार उन्होंने कार्यालयीन व्यस्तता का हवाला देकर पेशी टाल दी।



विधानसभा में सरकार ने भी यह बात मान ली कि व्यस्तता के चलते वे लोकायुक्त कार्यालय नहीं जा सकीं। अब लोकायुक्त ने उन्हें खुद पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।



कैग रिपोर्ट और जवाब में अंतर

महिला एवं बाल विकास विभाग ने लोकायुक्त के सामने जो आंकड़े रखे, वे कैग यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General) की ऑडिट रिपोर्ट से मेल नहीं खाते।



लोकायुक्त ने 23 जून को आदेश जारी कर 24 अगस्त 2026 को पेशी की तारीख तय की थी। वहीं विधानसभा में मंत्री प्रहलाद पटेल के लिखित जवाब में 31 अगस्त की तारीख दर्ज है। इस अंतर को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।



कैसे खुला था पूरा मामला

यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत से सामने आया था। शिकायत में आरोप है कि एलएम बेलवाल की नियुक्ति आपत्तियों के बावजूद संविदा पर की गई। इसके बाद कैबिनेट के जरिए पोषण आहार बनाने वाले सात संयंत्र एसआरएलएम को सौंप दिए गए। पहले ये संयंत्र कृषि उद्योग विकास निगम के पास थे। इसी बदलाव से बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का रास्ता खुला।



आईएएस अफसर ने पकड़ी थी गड़बड़ी

मप्र पोषण आहार घोटाला की पहली परतें आईएएस नेहा मारव्या की जांच में सामने आई थीं। उन्होंने राशन वितरण में गंभीर खामियां पकड़ी थीं। बाद में साल 2022 की कैग रिपोर्ट (मध्यप्रदेश सरकार पर कैग रिपोर्ट) में भी इसकी पुष्टि हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि स्टॉक में राशन नहीं होने के बावजूद फर्जी चालानों के जरिए आपूर्ति दिखाई गई। इसके लिए गलत वाहन नंबरों का भी इस्तेमाल हुआ।



ढाई साल से अटकी है रिपोर्ट

विधानसभा में विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब से बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि लोकायुक्त संगठन पिछले ढाई साल से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग रहा है। नवंबर 2023 से यह पालन रिपोर्ट मांगी जा रही थी। लेकिन अप्रैल 2026 में भी यह अधूरी दी गई। लोकायुक्त ने विभाग के दस्तावेजों और कैग की मूल आपत्तियों में मिले फर्क पर सख्त आपत्ति जताई है।



विधायक ने लगाया संरक्षण का आरोप

विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूर्व मुख्य सचिव और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अशोक शाह जैसे कई वरिष्ठ अफसरों को बचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी तकनीकी संस्था सीटीईवी (CTEV) को भंग कर नई संस्था एमपीडब्ल्यूक्यूसी (MPWQC) बना दी गई। उनके मुताबिक इसमें चहेते अधिकारियों की नियुक्ति की गई। विधायक का दावा है कि यह पूरा खेल मामले पर पर्दा डालने के लिए किया गया।



अब क्या होगा आगे

एमपी लोकायुक्तकी सख्ती के बाद अब सबकी नजर एसीएस रस्तोगी की पेशी पर टिकी है। कैग रिपोर्ट और सरकारी जवाब में मिला फर्क जांच को और पेचीदा बना सकता है। अगर पेशी में देरी जारी रही तो लोकायुक्त और कड़ा रुख अपना सकता है। पोषण आहार जैसी बुनियादी योजना में गड़बड़ी का सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।



FAQ

  1. सवाल: एमपी का पोषण आहार घोटाला क्या है?
    जवाब: यह मामला टेक होम राशन यानी टीएचआर योजना में हुई वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा है। आरोप है कि स्टॉक में राशन नहीं होने के बावजूद फर्जी चालानों के जरिए आपूर्ति दिखाई गई। कैग की 2022 की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई थी।
  2. सवाल: एसीएस दीपाली रस्तोगी को लोकायुक्त क्यों बुला रहा है?
    जवाब: लोकायुक्त ने कई बार नोटिस भेजे, लेकिन दीपाली रस्तोगी कार्यालयीन व्यस्तता बताकर पेश नहीं हुईं। अब लोकायुक्त ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

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