4 वर्ष बाद भी अधूरी पड़ताल! पोषण आहार घोटाले में कार्रवाई की रफ्तार पर उठे नए सवाल
समझें क्या है पूरा मामला...
- 2022 की सीएजी रिपोर्ट में टेक होम राशन योजना में अनियमितताएं सामने आई थीं।
- 62 अधिकारियों को कारण-बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
- केवल 37 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकी।
- 73 अधिकारियों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई का दावा है।
- कई मामलों में जांच पूरी, लेकिन अंतिम फैसला अब भी लंबित है।
- लोकायुक्त संगठन भी मामले की समानांतर जांच कर रहा है।
- विपक्ष ने जांच की धीमी रफ्तार पर सरकार को घेरा है।
सीएजी की रिपोर्ट आई, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी
टेक-होम राशन योजना में कथित अनियमितताओं का मामला वर्ष 2022 में सीएजी रिपोर्ट के जरिए सामने आया था। इसके बाद सरकार ने कई अधिकारियों को नोटिस तो भेजे, लेकिन चारवर्ष बीतने के बाद भी पूरी जांच समाप्त नहीं हो सकी। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
62 नोटिस, लेकिन जांच केवल 37 अधिकारियों तक
विधानसभा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने लिखित जवाब में बताया कि 62 अधिकारियों को कारण-बताओ नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, अब तक केवल 37 अधिकारियों के खिलाफ ही विभागीय जांच शुरू हो सकी है। बाकी अधिकारियों के जवाबों की जांच के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।
73 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा, फिर भी कई फाइलें अटकी
सरकार के अनुसार अब तक 73 अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है। इनमें 11 जिला कार्यक्रम अधिकारी भी शामिल हैं।
स्थिति यह है कि-
- 10 मामलों का निस्तारण हो चुका है।
- 6 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम आदेश लंबित है।
- 8 अधिकारियों की फाइलें शासन के पास विचाराधीन हैं।
- 13 मामलों में विभागीय जांच अब भी जारी है।
यानी कार्रवाई का दावा बड़ा है, लेकिन कई अहम फैसले अभी भी अधूरे हैं।
लोकायुक्त की जांच भी जारी, 31 अगस्त पर नजर
यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं है। पूर्व विधायक पारस सखलेचा की शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन भी इसकी जांच कर रहा है।
सरकार ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी 31 अगस्त को लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होंगी। इससे पहले व्यस्तता के कारण उनके उपस्थित न होने की जानकारी दी गई थी। लोकायुक्त संगठन उन्हें पहले भी कई बार नोटिस जारी कर चुका है।
सबसे बड़ा सवाल: जवाबदेही तय होने में इतनी देरी क्यों?
विधानसभा में दिए गए जवाब ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सीएजी रिपोर्ट वर्षों पहले अनियमितताओं की ओर इशारा कर चुकी थी, तब भी जिम्मेदारी तय करने और अंतिम कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
जब तक लंबित जांच पूरी नहीं होती और दोष सिद्ध नहीं होते, तब तक इस बहुचर्चित मामले पर सवाल बने रहने की संभावना है।
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