एमपी में कुपोषण: मंत्री ने माना, 33% बच्चों में वजन कम, आठ साल से नहीं बढ़ी पोषण आहार की दर

मध्य प्रदेश में 33% बच्चे कम वजन वाले और 36% ठिगने हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने यह स्वीकार किया कि कुपोषण का मुद्दा लगातार बना हुआ है।

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Jitendra Shrivastava
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Photograph: (thesootr)

News In Short

  • मध्यप्रदेश में 33% बच्चे कम वजन वाले हैं।
  • 36% बच्चे ठिगने और 19% दुबले हैं।
  • कुपोषण रोकने के लिए सरकार ने योजना बनाई है।
  • पोषण आहार राशि पिछले आठ सालों से नहीं बढ़ी।
  • सरकार ने पोषण आहार की दरों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं बनाई।

News In Detail

मध्य प्रदेश में कुपोषण एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जहां 33% बच्चे कम वजन वाले और 36% बच्चे ठिगने हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में यह स्वीकार किया है।

इसके बावजूद, सरकार द्वारा बच्चों के लिए पोषण आहार की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। यह आंकड़े राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 से लिए गए हैं, जो कुपोषण के बढ़ते संकट को उजागर करते हैं।

मध्यप्रदेश में कुपोषण का संकट

मध्य प्रदेश में बच्चों के कुपोषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 33% बच्चे कम वजन वाले हैं, जबकि 36% बच्चे ठिगने (stunted) हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, कुपोषण के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में इस बात को स्वीकार किया है।

कुपोषण के कारण और स्थिति

कुपोषण के कारण बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट आती है। यह बच्चों के भविष्य पर भी गंभीर असर डाल सकता है। सरकार द्वारा कुपोषण रोकने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन हालात में ज्यादा सुधार नहीं दिख रहा है।

सरकार का कुपोषण से निपटने का तरीका

सरकार ने बच्चों के लिए पोषण आहार का एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत कुपोषित बच्चों को कम से कम 8 रुपए प्रतिदिन और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को 12 रुपए प्रतिदिन दिया जाता है। हालांकि, इन राशियों में पिछले आठ सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

विपक्ष का सवाल और मंत्री का जवाब

विधानसभा में विपक्ष ने कुपोषण और पोषण आहार की राशि में वृद्धि की मांग की थी। विपक्षी नेताओं ने यह सवाल उठाया कि क्या सरकार कुपोषण के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि इस राशि का निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है और राज्य सरकार के स्तर पर इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं का कितना असर 

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए कुपोषण से निपटने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के तहत सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, पोषण आहार की दरें कम होने से बच्चों का कुपोषण कम होने में मुश्किल हो रही है।

FAQ

मध्य प्रदेश में कुपोषण की समस्या क्यों बढ़ रही है?
कुपोषण की समस्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि राज्य में पोषण आहार की राशि में पिछले आठ सालों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं की प्रभावी कार्यान्वयन की कमी भी एक कारण है।
कुपोषण से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
राज्य सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम और आंगनवाड़ी योजनाएं शुरू की हैं। इसके तहत कुपोषित बच्चों को पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है।
भारत सरकार पोषण आहार की दर में वृद्धि क्यों नहीं करती?
पोषण आहार की दर का निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है, और राज्य सरकार के स्तर पर इसमें कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, कुछ योजनाओं के जरिए इस दर में वृद्धि की जा सकती है।

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