सरपंच पति की प्रथा खत्म करने के लिए केंद्र सरकार का नया कैंपेन

केंद्र सरकार ने 'Say No To Proxy Sarpanch' अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य महिला सरपंचों को असली शक्ति देना और 'सरपंच पति' की प्रथा को समाप्त करना है। यह अभियान महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Sanjay Dhiman
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • केंद्र सरकार ने ‘Say No To Proxy Sarpanch’ अभियान शुरू किया है।
  • इस अभियान का उद्देश्य ‘सरपंच पति’ की प्रथा को खत्म करना है।
  • महिला सरपंचों के नाम पर उनके पति फैसले लेते हैं, जिससे उनका अधिकार कमजोर होता है।
  • मंत्रालय ने पंचायत स्तर पर इस अभियान को जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किया है।
  • अभियान 18 मार्च तक चलेगा, और महिला सरपंचों को सशक्त बनाने का उद्देश्य है। 

News in Detail

केंद्र सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ‘Say No To Proxy Sarpanch’ अभियान शुरू किया है। यह अभियान ‘सरपंच पति’ की प्रथा को खत्म करने के लिए है, जिसमें महिला सरपंच के नाम पर उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य सारे फैसले करते हैं। इस प्रथा के कारण महिला सरपंचों का नेतृत्व कमजोर होता है और उन्हें अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करने का अवसर नहीं मिलता।

सरपंच पति की प्रथा को खत्म करने की जरूरत

‘सरपंच पति’ की प्रथा एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जहां महिला सरपंच के नाम पर पुरुष सदस्य पंचायत में फैसले लेते हैं। इससे महिला सरपंचों को अपमानित किया जाता है और उनका नेतृत्व कमतर दिखाया जाता है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह प्रथा महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ है और लोकतंत्र को कमजोर करती है। मंत्रालय का कहना है कि यह प्रथा महिला सरपंचों के अधिकारों का उल्लंघन करती है और उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने से रोकती है।

अभियान की शुरुआत और राज्य स्तर पर सहयोग

इस अभियान की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर की गई। मंत्रालय ने राज्य पंचायती राज विभागों और पंचायत स्तर के अधिकारियों से अपील की है कि वे इस अभियान को बढ़ावा दें और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करें। यह अभियान 18 मार्च तक चलेगा और इसका उद्देश्य है कि महिला सरपंचों को पूरी स्वतंत्रता मिले ताकि वे पंचायतों का प्रभावी नेतृत्व कर सकें।

मध्यप्रदेश में जनपद और जिला पंचायतों की स्थिति

मध्यप्रदेश में भी जनपद पंचायत और जिला पंचायतों में विवाद की स्थिति अक्सर सामने आती है। कई जिले जहां अध्यक्ष प्रतिनिधि और सदस्य प्रतिनिधि के बीच बैठकों में समस्याएं होती हैं। सीईओ इन प्रतिनिधियों को बैठकों में शामिल नहीं होने देते। इससे राज्य में पंचायत स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया बाधित होती है।

सरकार अब इस अभियान के तहत महिला सरपंचों की आवाज को सही दिशा में लाने का प्रयास कर रही है। महिला सरपंचों को सशक्त बनाने और उनकी पहचान को समाज में मान्यता दिलाने के लिए यह कदम एक महत्वपूर्ण पहल है।

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