प्राथमिक शिक्षक भर्ती: RCI हां टिक करने वालों पर हाईकोर्ट के दो आदेशों से बढ़ा विवाद

Neel Tiwari | May 23, 2026, 16:30 IST
mp teacher rci hc
प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में RCI सर्टिफिकेट के कॉलम में हां टिक करने वाले हजारों अभ्यर्थियों की नौकरी खतरे में है। 6 मई 2026 को हाईकोर्ट ने कहा कि हां टिक करना जानबूझकर किया गया कृत्य माना जाएगा।

News In Short

  • 6 मई को हाईकोर्ट ने हां टिक जानबूझकर माना।
  • RCI विकल्प में डिप्लोमा अपलोड करना जरूरी कहा।
  • पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का लिंक अनुपलब्ध।
  • कोर्ट ने 15 दिनों के लिए पोर्टल खोलने का आदेश दिया।
  • हजारों अभ्यर्थी खुद को भेदभाव का शिकार बता रहे हैं।

News in detail

प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में RCI सर्टिफिकेट के कॉलम में हां टिक करने वाले हजारों अभ्यर्थियों की नौकरी खतरे में है। 6 मई को जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा कि यह गलती गंभीर मानी जाएगी क्योंकि सर्टिफिकेट अपलोड करना जरूरी था। 14 मई को उसी मामले में कोर्ट ने माना कि पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प मौजूद ही नहीं था और पोर्टल की 15 दिन की विंडो खोलने के निर्देश दिए। अब वे अभ्यर्थी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं जिन्हें सुधार का मौका नहीं मिला।



हजारों युवाओं की बढ़ी धड़कनें

मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 अब सिर्फ भर्ती नहीं रही बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य और न्याय से जुड़ा बड़ा विवाद बन गई है। RCI सर्टिफिकेट के कॉलम में हां टिक करने वाले अभ्यर्थियों के सामने अब नौकरी छिनने का खतरा खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाईकोर्ट के दो आदेशों ने क्यों यह स्थिति बनाई। कुछ अभ्यर्थियों को राहत मिली और कुछ अभी भी बाहर हैं।



6 मई को कोर्ट ने कहा कि यह मासूम गलती नहीं

जस्टिस विशाल धगत की एकलपीठ ने 6 मई 2026 के आदेश में कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने RCI योग्यता के लिए हां विकल्प चुना, उन्हें डिप्लोमा अपलोड करना अनिवार्य था। कोर्ट ने कहा कि हां का विकल्प गलती से टिक नहीं माना जा सकता क्योंकि दस्तावेज अपलोड करना जरूरी था।



अदालत ने यह भी कहा कि परिणाम आने के बाद यह कहना कि “गलती से हां टिक हो गया” ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती नियम परिणाम आने के बाद बदले नहीं जा सकते।





फिर 14 मई को बदला पूरा नजरिया

मामले में नया मोड़ तब आया जब 14 मई को संशोधन आवेदन पर सुनवाई हुई। कोर्ट के सामने बताया गया कि भर्ती पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का कोई लिंक उपलब्ध नहीं था।



कोर्ट ने यह दलील गंभीर मानी और कहा कि बिना लिंक अभ्यर्थी दस्तावेज कैसे अपलोड करते। अदालत ने MPESB को 15 दिन के लिए नया पोर्टल खोलने और योग्य अभ्यर्थियों से RCI डिप्लोमा अपलोड कराने के निर्देश दिए। गलती से हां टिक करने वाले अभ्यर्थियों को कोई फायदा नहीं मिला। पहले आदेश में राहत से इनकार का आधार अब कमजोर दिखने लगा और विवाद गहरा गया।





अब फूट रहा अभ्यर्थियों का दर्द

अब सबसे ज्यादा पीड़ा उन अभ्यर्थियों में दिखाई दे रही है जिन्होंने वास्तव में गलती से हाँ टिक कर दिया था। इनमें बड़ी संख्या दिव्यांग, पूर्व सैनिक और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों की बताई जा रही है।



ऐसे ही एक दिव्यांग अभ्यर्थी नरेंद्र सिंह परिहार ने बातचीत में बताया कि उसे RCI सर्टिफिकेट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जिस कियोस्क से उसने फॉर्म भरवाया, वहां ऑपरेटर ने उसे यह कहकर हां टिक करवा दिया कि वह दिव्यांग है, इसलिए यही विकल्प चुनना चाहिए।



अभ्यर्थी के मुताबिक उससे किसी प्रकार का RCI रजिस्ट्रेशन नंबर या सर्टिफिकेट भी नहीं मांगा गया। उसने भावुक होकर कहा कि फॉर्म भरने के बाद वह पूरी मेहनत से तैयारी में जुट गया। परीक्षा भी दी, लेकिन उसे यह तक पता नहीं चला कि मामला कोर्ट पहुंच चुका है और सुधार के लिए अवसर भी दिया गया था।



ईमेल आया, लेकिन फिर भी छूट गया मौका

जब उनसे पूछा गया कि MP Online की तरफ से भेजे गए मैसेज उसने क्यों नहीं देखे। तब उसने अपना मोबाइल खंगालना शुरू किया। व्हाट्सएप और सामान्य SMS में कुछ नहीं मिला, लेकिन बाद में ईमेल में नोटिफिकेशन दिखाई दिए तो उसकी आंखें भर आईं। उसने कहा कि गांव और सामान्य परिवारों में लोग रोज ईमेल चेक नहीं करते। सरकारी नौकरी की उम्मीद में दिन-रात पढ़ाई करने वाले हजारों युवाओं को यह तक समझ नहीं था कि एक टिक उनके भविष्य पर इतना भारी पड़ जाएगा।



अभ्यर्थियों का आरोप

अब यही सवाल सबसे बड़ा विवाद बन गया है। जिन अभ्यर्थियों के पास वास्तव में RCI डिप्लोमा था, उन्हें नया मौका मिल गया। लेकिन जिन्होंने गलती से हां टिक किया था और जिन्हें सुधार का अवसर नहीं मिल पाया, वे खुद को भेदभाव का शिकार बता रहे हैं।



अभ्यर्थियों का कहना है कि जब कोर्ट ने मान लिया कि पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड का विकल्प नहीं था तो उन्हें जानबूझकर गलत जानकारी देने वाला कैसे माना जा सकता है जिन्होंने केवल टिक किया था। उनका कहना है कि यदि 5 प्रतिशत बोनस गलत मिला है तो वह काट लिया जाए। लेकिन नौकरी और वर्षों की मेहनत न छीनी जाए।



5% बोनस काट लो साहब, पर नौकरी मत छीनो

इस मामले में ESB और एमपी ऑनलाइन यह तथ्य दे चुका है कि हर अभयार्थी को पोर्टल खोलने की सूचना प्रदान की गई थी। लेकिन केवल लगातार ईमेल चेक न करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ ही खिलवाड़ हो गया है। यह एक लाइन अब इस पूरी भर्ती विवाद का सबसे बड़ा भावनात्मक चेहरा बन चुकी है। हजारों युवाओं के लिए यह केवल अंक या तकनीकी गलती का मामला नहीं है, बल्कि परिवार, भविष्य और सम्मान का सवाल बन गया है।



कुछ अभ्यर्थी दिव्यांग हैं कुछ पूर्व सेना पृष्ठभूमि से हैं कुछ ऐसे गांव से हैं जहां सरकारी नौकरी परिवार की जिंदगी बदल देती है। अब ये अभ्यर्थी अदालत और सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि तकनीकी त्रुटि और सिस्टम की खामियों की सजा उनके सपनों को न दी जाए।



आरसीआई सर्टिफिकेट क्या है ?

आरसीआई सर्टिफिकेट भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा विशेष शिक्षकों और पेशेवरों को जारी किया जाता है। यह ऑडियोलॉजिस्ट और अन्य पुनर्वास कर्मियों को भी मिलता है। इसे केंद्रीय पुनर्वास रजिस्टर सर्टिफिकेट भी कहते हैं। यह दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले लोगों के साथ काम करने की मान्यता देता है।



ये खबरें भी पढ़ें...

प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में हुआ बड़ा घोटाला? बिना RCI रजिस्ट्रेशन 15 हजार ने ले लिया बोनस



प्राथमिक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दिया विकल्प सुधारने का मौका



MP शिक्षक भर्ती विवाद: प्रोबेशन पीरियड रोकने पर भड़के शिक्षक, CM तक पहुंचा मामला



एमपी में यूसीसी पर पहली बैठक, महापौर बोले देश में किसी को भी चार शादी, 24 बच्चे पैदा करने का अधिकार नहीं



Tags:
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • मध्य प्रदेश
  • प्राथमिक शिक्षक भर्ती
  • जस्टिस विशाल धगत
  • एमपी ऑनलाइन