MP में ई-अटेंडेंस का अजब खेल! पास में ही लगा 5G टावर, कागजों में बताया नो नेटवर्क
Aman Vaishnav | Sept 10, 2026, 11:15 IST
MP में ई-अटेंडेंस का अजब खेल
मध्य प्रदेश के 200 स्कूलों को कागजों में नो-नेटवर्क दिखाकर शिक्षकों को ई-अटेंडेंस से बचाने का खेल सामने आया है। जब जांच की गई तो स्कूलों के पास ही 5G टावर और फुल सिग्नल मिले हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को पक्का करने के लिए ऑनलाइन ई-अटेंडेंस व्यवस्था शुरू की गई थी। वहीं सिस्टम में बैठे कुछ लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है।
संकुल प्राचार्यों और अफसरों की मिलीभगत से पूरे प्रदेश के करीब 200 स्कूलों को कागजों में जीरो नेटवर्क बता दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि नर्मदापुरम जिले के सिवनीमालवा ब्लॉक में भावंदा गांव के मिडिल स्कूल की दीवार से सिर्फ 50 मीटर दूर बीएसएनएल का मोबाइल टावर लगा हुआ है। फोन की स्क्रीन पर जियो और बीएसएनएल के फुल सिग्नल आते हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की फाइलों में इसी स्कूल पर सन्नाटा पसरा दिखाया गया है।
कागजों में नो-नेटवर्क दिखाने के पीछे एक बहुत बड़ा खेल चल रहा था। शिक्षकों को स्कूल जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। वे रास्ते में किसी दूसरे स्कूल या नेटवर्क वाले इलाके में खड़े होकर मोबाइल से पंच करते थे। इसके बाद वहीं से सीधे अपने घर लौट जाते थे। इस तरह घर बैठे-बैठे ही पूरी सरकारी तनख्वाह बन रही थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 11 जिलों के 14 तथाकथित नेटवर्क-विहीन स्कूलों की जांच की गई, तो सभी स्कूलों के गेट पर 4G और 5G की तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी चालू मिली।
सागर जिले के धुरा राजीव टोला प्राथमिक स्कूल के संकुल प्राचार्य ने डीईओ (DEO) को लिखित रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट में लिखा था कि स्कूल के 200 मीटर के दायरे में किसी भी कंपनी का सिग्नल नहीं आता है।
वहीं जब हकीकत की जांच की गई तो स्कूल के मेन गेट पर ही जियो का तेज नेटवर्क काम कर रहा था। मामला सामने आने के बाद डीईओ अरविंद जैन ने जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
उधर नर्मदापुरम में ई-अटेंडेंस न लगाने वाले 98 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। विभाग ने सख्त लहजे में साफ किया है कि समय पर हाजिरी पंच न करना मप्र सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। स्कूलों में नेटवर्क होने के बावजूद अगर जिलों से नो-नेटवर्क की झूठी रिपोर्ट भेजी गई है, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले अफसरों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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संकुल प्राचार्यों और अफसरों की मिलीभगत से पूरे प्रदेश के करीब 200 स्कूलों को कागजों में जीरो नेटवर्क बता दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि नर्मदापुरम जिले के सिवनीमालवा ब्लॉक में भावंदा गांव के मिडिल स्कूल की दीवार से सिर्फ 50 मीटर दूर बीएसएनएल का मोबाइल टावर लगा हुआ है। फोन की स्क्रीन पर जियो और बीएसएनएल के फुल सिग्नल आते हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की फाइलों में इसी स्कूल पर सन्नाटा पसरा दिखाया गया है।
बिना स्कूल गए कैसे लग रही थी हाजिरी?
कहां मिला कौन सा नेटवर्क?
- नर्मदापुरम (भावंदा गांव मिडिल स्कूल): स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी पर BSNL का टावर मौजूद है। फोन पर जियो व बीएसएनएल दोनों के फुल सिग्नल आते हैं।
- छतरपुर (शाहपुरा और ईमलीचौक स्कूल): दोनों स्कूलों के मेन गेट पर ही जियो का पर्याप्त नेटवर्क चालू मिला।
- बैतूल (सलाईढाना स्कूल): यहां सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं।
- राजगढ़ (दयाखेड़ी स्कूल): स्कूल परिसर में मोबाइल कनेक्टिविटी पूरी तरह से उपलब्ध पाई गई।
- मुरैना (सपछोली गांव स्कूल): यहां भी सभी निजी और सरकारी कंपनियों के मोबाइल नेटवर्क सक्रिय हैं।
- दतिया (मलौआ स्कूल): इस स्कूल के पास जियो का तेज नेटवर्क मिल रहा है।
- रायसेन (पोनिया
सरकारी स्कूल ): यहां बीएसएनएल का नेटवर्क सुचारू रूप से काम कर रहा है। - शिवपुरी (पवैयापुरा, रायपहाड़ी और बेंहटा स्कूल): पवैयापुरा में एयरटेल का नेटवर्क मौजूद है, वहीं रायपहाड़ी और बेंहटा में जियो व एयरटेल दोनों कंपनियों के मजबूत सिग्नल मिले।
- गुना (लालपुरा स्कूल): इस स्कूल परिसर में एयरटेल का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है।
- सागर (धुरा राजीव टोला प्राथमिक स्कूल): स्कूल के मेन गेट पर ही जियो का पर्याप्त नेटवर्क काम करता पाया गया।
सागर में प्राचार्य की झूठी रिपोर्ट पकड़ी गई
वहीं जब हकीकत की जांच की गई तो स्कूल के मेन गेट पर ही जियो का तेज नेटवर्क काम कर रहा था। मामला सामने आने के बाद डीईओ अरविंद जैन ने जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
उधर नर्मदापुरम में ई-अटेंडेंस न लगाने वाले 98 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। विभाग ने सख्त लहजे में साफ किया है कि समय पर हाजिरी पंच न करना मप्र सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। स्कूलों में नेटवर्क होने के बावजूद अगर जिलों से नो-नेटवर्क की झूठी रिपोर्ट भेजी गई है, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले अफसरों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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