MP शिक्षक भर्ती विवाद: प्रोबेशन पीरियड रोकने पर भड़के शिक्षक, CM तक पहुंचा मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बीएड धारक शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
- विभाग ने प्रोबेशन पीरियड खत्म करने के लिए ब्रिज कोर्स अनिवार्य कर दिया है।
- सरकार की जिम्मेदारी होने के बाद भी तीन साल से कोर्स नहीं कराया गया।
- टीडब्ल्यूटीए एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस नीति का विरोध किया है।
- प्रोबेशन पूरा न होने से शिक्षकों के ट्रांसफर और इंक्रीमेंट रुक गए हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां नए शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग ने एक नया नियम लागू किया है। इस नियम के कारण हजारों प्राथमिक शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। विभाग ने बीएड धारक शिक्षकों के प्रोबेशन पीरियड पर अड़ंगा लगा दिया है।
तीन साल बाद भी कोर्स अधूरा रहा
शिक्षकों की नियुक्ति को अब तीन साल का लंबा समय बीत चुका है। नियमानुसार अब उनका प्रोबेशन पीरियड यानी परिवीक्षा अवधि समाप्त हो जानी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने इसके सामने छह महीने के ब्रिज कोर्स की शर्त रख दी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह कोर्स कराना खुद विभाग की जिम्मेदारी थी। लेकिन तीन साल में विभाग यह कोर्स नहीं करा सका।
एसोसिएशन ने उठाई मजबूत आवाज
विभाग के इस फैसले का अब जमीन पर पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन यानी TWTA इस लड़ाई में आगे आया है। एसोसिएशन ने सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संबंध में एक पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड तुरंत समाप्त किया जाए। शासन की गलती की सजा गरीब शिक्षकों को बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।
ट्रांसफर और इंक्रीमेंट पूरी तरह अटके
प्रोबेशन पीरियड समय पर खत्म नहीं होने से शिक्षक बेहद परेशान हैं। वे इस समय भारी आर्थिक और मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं। अवधि लंबित होने के कारण उन्हें पूरा वेतनमान नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही उनकी सालाना वेतन वृद्धि यानी इंक्रीमेंट भी रोक दी गई है। शिक्षक इस वजह से अपनी मनपसंद जगहों पर ट्रांसफर भी नहीं करा पा रहे हैं।
शिक्षकों ने खुद जमा की अपनी फीस
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र में एक और महत्वपूर्ण बात बताई है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षकों ने इस कोर्स के लिए खुद ही नामांकन करा लिया था। उन्होंने अपनी जेब से इसकी फीस भी जमा कर दी थी। इससे साफ पता चलता है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। विभाग की सुस्ती के कारण ही यह पूरा मामला अब तक लटका हुआ है।
एसोसिएशन ने सरकार को दिया सुझाव
एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके सिंगौर ने सरकार को एक व्यावहारिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने फीस जमा कर दी है उनका प्रोबेशन खत्म हो। सरकार उनके आदेश में एक छोटी सी शर्त जोड़ सकती है। तय समय में कोर्स पास न करने पर उनकी सेवा समाप्त मानी जाए। इससे शासन के नियम भी सुरक्षित रहेंगे और शिक्षकों को भी राहत मिलेगी।
प्रमुख सचिवों को भी भेजा गया पत्र
शिक्षकों का यह मांग पत्र अब बहुत आगे तक पहुंच चुका है। यह पत्र स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग को भेजा गया है। एसोसिएशन ने इसके प्रमुख सचिवों और आयुक्तों को भी इसकी प्रतिलिपि सौंपी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या फैसला लेता है। इस फैसले पर प्रदेश के हजारों परिवारों की खुशियां टिकी हुई हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश में बीएड धारक प्राथमिक शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड क्यों अटक गया है?
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त बीएड धारक प्राथमिक शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड यानी परिवीक्षा अवधि पूरी होने में एक तकनीकी पेंच आ गया है। शिक्षा विभाग के नियमानुसार इन शिक्षकों के लिए नौकरी जॉइन करने के बाद 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य था। शिक्षकों की नियुक्ति के तीन साल बीत जाने के बाद भी विभाग ने इस कोर्स का आयोजन नहीं कराया। अब विभाग कह रहा है कि जब तक यह कोर्स पूरा नहीं होगा, तब तक प्रोबेशन पीरियड समाप्त नहीं किया जाएगा। - प्रोबेशन पीरियड समाप्त न होने से शिक्षकों को किस तरह का नुकसान हो रहा है?
परिवीक्षा अवधि यानी प्रोबेशन पीरियड लंबित रहने के कारण हजारों शिक्षकों को गंभीर आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि उन्हें सरकार द्वारा तय पूरा वेतनमान नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा उनकी सालाना मिलने वाली वेतन वृद्धि पर भी रोक लगी हुई है। साथ ही प्रोबेशन पूरा न होने के कारण वे वर्तमान स्थानांतरण नीति का लाभ उठाकर अपना तबादला भी नहीं करवा पा रहे हैं। - ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने इस समस्या के समाधान के लिए क्या मांग की है?
ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन (TWTA) ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर एक व्यावहारिक समाधान सुझाया है। एसोसिएशन की मांग है कि जिन शिक्षकों ने ब्रिज कोर्स के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है और फीस जमा कर दी है, उनका प्रोबेशन पीरियड तत्काल प्रभाव से सशर्त समाप्त किया जाए। आदेश में यह शर्त जोड़ी जा सकती है कि यदि कोई शिक्षक तय समय-सीमा में इस कोर्स को पास नहीं कर पाता है, तो उसकी सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी के सरकारी स्कूलों में मिलेगी फ्री NEET-JEE की ट्रेनिंग, 9वीं से ही शुरू होगा फाउंडेशन क्लास
शिक्षा की स्थिति बदतर, MP 15 साल में बंद हुए 49 हजार सरकारी स्कूल, क्या ऐसे बढ़ेगा एमपी?