एमपी में 22 हजार मंदिरों का होगा डिजिटल हिसाब-किताब, जमीन से पुजारी तक सबका बनेगा डेटाबेस

Sourabh Bhatnagar | Aug 15, 2026, 07:27 IST
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मध्य प्रदेश सरकार पहली बार प्रदेश के करीब 22 हजार सरकारी देखरेख वाले मंदिरों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल करने जा रही है। इसमें मंदिरों की जमीन-जायदाद, पुजारियों की जानकारी और संपत्तियों का ब्यौरा एक ही जगह दर्ज होगा।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • मध्य प्रदेश सरकार 22 हजार मंदिरों का डिजिटल डेटाबेस बना रही है।
    • इसमें संपत्ति, पुजारी और जमीन की जानकारी दर्ज होगी।
    • धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग यह काम कर रहा है।
    • पायलट प्रोजेक्ट ग्वालियर और उज्जैन तहसील से शुरू होगा।
    • इससे मंदिरों की जमीन पर कब्जे और विवाद रोकने में मदद मिलेगी।

    क्यों बन रहा डेटाबेस

    मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के मंदिरों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करा रही है। यह काम पहली बार हो रहा है। शासन के नियंत्रण में करीब 22 हजार मंदिर और देवस्थान चलते हैं। इन सभी को इस डेटाबेस में शामिल किया जाएगा।



    धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग यह पूरा काम देख रहा है। डेटाबेस में हर मंदिर की संपत्ति दर्ज होगी। पुजारी का नाम और मंदिर की मौजूदा स्थिति भी दर्ज होगी। इसे विभाग के पोर्टल पर आम लोगों के लिए भी खोला जाएगा। यानी कोई भी व्यक्ति यह जानकारी देख सकेगा।



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    प्रदेश में अभी 22 हजार 098 मंदिर सूचीबद्ध हैं। ये सभी शासन के नियंत्रण में आते हैं। इनमें 2 ज्योतिर्लिंग भी शामिल हैं। साथ ही 4 देवी शक्तिपीठ भी इस सूची में हैं। अभी तक इन मंदिरों की देखरेख जिला कलेक्टर के स्तर पर होती रही है। हर जिले का रिकॉर्ड अलग अलग रहता था। इस वजह से पूरे प्रदेश की साफ तस्वीर नहीं मिल पाती थी।



    नया डेटाबेस बनने के बाद स्थिति बदल जाएगी। पहली बार सभी मंदिरों की संपत्ति का राज्य स्तरीय रिकॉर्ड एक जगह मिलेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की शुरुआत ग्वालियर और उज्जैन तहसील से होगी। शुरुआत में यह एक पायलट प्रोजेक्ट रहेगा। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।



    मंत्री ने क्या कहा

    धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इस पर बात रखी। पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधीबताया कि सभी शासन-संधारित मंदिरों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। इसी सूची के आधार पर अब डिजिटल डेटाबेस तैयार हो रहा है।



    माना जा रहा है कि यह कदम मंदिरों के प्रबंधन (Madhya Pradesh News) को साफ और पारदर्शी बनाएगा। इससे संपत्ति की निगरानी आसान होगी। दावा है कि आम लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। यह काम विभाग की टीमें कर रही हैं। हर जिले से जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद उसे एक ही पोर्टल पर जोड़ा जाएगा।



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    किस जिले में कितने मंदिर

    आंकड़ों के मुताबिक उज्जैन जिले (एमपी मंदिर संपत्ति) में सबसे ज्यादा 2536 मंदिर सूचीबद्ध हैं। मंदसौर में 2236 मंदिर हैं। रतलाम जिले में 1653 मंदिर दर्ज हैं। नीमच जिले में 1421 मंदिर सूचीबद्ध हैं। धार जिले में 1320 मंदिर हैं। इंदौर में 1225 मंदिर और ग्वालियर में 1165 मंदिर दर्ज हैं।



    इन आंकड़ों से साफ पता चलता है। मालवा क्षेत्र में सबसे ज्यादा शासन-संधारित मंदिर हैं। इस सूची में उज्जैन और मंदसौर सबसे आगे हैं। इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहर भी इस सूची में शामिल हैं।



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    मंदिरों की जमीन का हिसाब

    प्रदेश के 1320 मंदिरों के नाम 10 एकड़ से ज्यादा जमीन दर्ज है। इन मंदिरों के पास कुल मिलाकर करीब 4500 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस जमीन पर खेती के लिए समय-समय पर नीलामी होती है। यह नीलामी संबंधित जिला कलेक्टर कराते हैं। नीलामी से मिलने वाली राशि उसी मंदिर के कोष में जमा होती है। जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से कम जमीन है, वहां व्यवस्था अलग है। ऐसी जमीन के प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित पुजारी पर होती है। डिजिटल डेटाबेस बनने से सरकार को साफ जानकारी मिलेगी। हर मंदिर की जमीन का असल उपयोग पता चलेगा। कई बार शिकायत आती है कि मंदिर की जमीन पर कब्जा हो गया है। नए रिकॉर्ड से ऐसी शिकायतों की जांच आसान होगी। कब्जे से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई भी हो सकेगी।



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    आगे बनेगी कैसी नीति

    सरकार इस डेटाबेस के आधार पर आगे की नीति भी बनाएगी। पहला काम यह देखना है कि किन मंदिरों को मरम्मत की जरूरत है। मरम्मत को जीर्णोद्धार भी कहा जाता है। दूसरा काम यह पता लगाना है कि कहां विवाद की स्थिति है। कहां संपत्ति पर अवैध कब्जे की शिकायत है, यह भी देखा जाएगा। इन जानकारियों के आधार पर बेहतर प्रबंधन का रास्ता तय होगा। अफसरों का कहना है कि इससे मंदिरों की आय भी बढ़ सकती है। साथ ही अवैध कब्जे रोकने में मदद मिलेगी। लंबे समय से लंबित संपत्ति विवाद भी सुलझ सकते हैं।



    आगे की राह क्या है

    पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यह पूरे प्रदेश में लागू होगा। मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से निगरानी आसान होगी। आम लोग पोर्टल पर जाकर मंदिर की जानकारी देख सकेंगे। इससे मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। साथ ही लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। आगे चलकर यह डेटाबेस राज्य के धार्मिक स्थलों का आधार बन सकता है। इसके जरिए हर मंदिर की जानकारी एक क्लिक पर मिलेगी।



    सरकार का लक्ष्य है कि हर मंदिर की संपत्ति सुरक्षित रहे। साथ ही उसका सही उपयोग भी हो सके। विभाग के अफसरों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट जल्द पूरा होगा। इसके नतीजों के आधार पर आगे का काम तेज होगा। कुल मिलाकर यह कदम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकता है। श्रद्धालुओं का भरोसा भी इससे मजबूत होगा।



    FAQ

    1. प्रश्न 1: मध्य प्रदेश में कितने मंदिरों का डेटाबेस बनाया जा रहा है?
      उत्तर: मध्य प्रदेश में शासन के नियंत्रण में करीब 22 हजार 098 मंदिर और देवस्थान सूचीबद्ध हैं। इन सभी का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग तैयार करा रहा है। इसमें मंदिर की संपत्ति, पुजारी का नाम और जमीन की मौजूदा स्थिति दर्ज होगी। यह डेटाबेस विभाग के पोर्टल पर आम लोगों के लिए भी उपलब्ध होगा।
    2. प्रश्न 2: मंदिरों की जमीन की नीलामी कैसे होती है?
      उत्तर: जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि है, उस जमीन की खेती के लिए संबंधित जिला कलेक्टर समय-समय पर नीलामी कराते हैं। इससे मिलने वाली राशि उसी मंदिर के कोष में जमा होती है। जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से कम जमीन है, वहां जमीन के प्रबंधन की जिम्मेदारी मंदिर के पुजारी पर रहती है।

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