एमपी खजुराहो का मतंगेश्वर महादेव मंदिर, यहां हर साल तिल बराबर बढ़ता है शिवलिंग
Kaushiki | Aug 07, 2026, 16:35 IST
Matangeshwar Temple Khajuraho
खजुराहो का मतंगेश्वर महादेव मंदिर अपने रहस्यमयी शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यह शिवलिंग हर साल बढ़ता है। चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर आज भी पूजा-पाठ के लिए सक्रिय है। श्रद्धालु यहां दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।
Matangeshwar Temple Khajuraho: क्या आपने किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां स्थापित शिवलिंग हर साल किसी जीवित प्राणी की तरह थोड़ा बढ़ जाता है? मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खजुराहो का मतंगेश्वर महादेव मंदिर अपने इसी अकल्पनीय रहस्य के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि हर साल शरद पूर्णिमा पर जब पुजारी इस शिवलिंग की नाप लेते हैं, तो इसका आकार तिल के बराबर बढ़ा हुआ मिलता है।
खजुराहो के अन्य मंदिर जहां केवल ऐतिहासिक स्मारक बनकर रह गए हैं। वहीं मतंगेश्वर महादेव का गर्भगृह पिछले हजार सालों से निरंतर पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार से गुंजायमान है। आखिर क्या है इसके आकार बढ़ने की असली वजह? क्या यह इसके नीचे दबी पौराणिक मरकत मणि की शक्ति है या फिर जियोलॉजी का कोई अनसुलझा नियम? आइए, इस रहस्यमयी मंदिर से जुड़े इतिहास को गहराई से जानें...
![Matangeshwar Mahadev Khajuraho]()
मतंगेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग कोई साधारण प्रतिमा नहीं है। यह लगभग नौ फीट से भी अधिक ऊंचा और विशालकाय पीतल की चमक जैसा आभा देने वाला शिवलिंग है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह है कि यह समय के साथ आकार बदलता है।
स्थानीय परंपराओं के मुताबिक, हर साल शरद पूर्णिमा की रात को मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग मिलकर इस दिव्य शिवलिंग की ऊंचाई और मोटाई की नाप लेते हैं। हर साल जब नाप ली जाती है, तो पाया जाता है कि शिवलिंग का आकार पिछले साल के मुकाबले एक तिल के बराबर बढ़ गया है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह शिवलिंग सिर्फ ऊपर आकाश की ओर ही नहीं बढ़ रहा। बल्कि इसका उतना ही हिस्सा नीचे जमीन की गहराई यानी पाताल की ओर भी धंसता जा रहा है। इस घटना को देखने और महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए शरद पूर्णिमा पर यहां हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
![Suveer Singh Sikarwar on X: "The Matangeshwar Temple Khajuraho is a ninth century sanctuary. This temple is also famous for being counted among one of the oldest temples in India.@MPTourism @incredibleindia @MPIntltourism #]()
मरकत मणि की
इस मंदिर के नाम मतंगेश्वर और शिवलिंग के गुणों के पीछे एक बहुत ही रोचक पौराणिक कथा छिपी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, सृष्टि के पालनहार भगवान शिव के पास एक दिव्य मरकत मणि हुआ करती थी। यह मणि साधारण पत्थरों या रत्नों जैसी नहीं थी, बल्कि इसमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा का भंडार था।
माना जाता था कि इस मणि के संपर्क में आने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती थीं। जिस स्थान पर इसे रखी जाती थी, वहां कभी दरिद्रता नहीं आ सकती थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर यह मरकत मणि अपने परम भक्त मातंग ऋषि को दान में दे दी थी। मातंग ऋषि ने इस परम पवित्र मणि का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया। कालांतर में जब ऋषि मातंग का समय पूरा होने लगा, तो उन्होंने इस मणि की सुरक्षा का दायित्व धर्मनिष्ठ राजा हर्षवर्धन को सौंप दिया।
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राजा हर्षवर्धन जानते थे कि इस मणि की शक्ति इतनी विशाल है कि अगर यह किसी अधर्मी या पापी इंसान के हाथ लग गई, तो अनर्थ हो सकता है। इसलिए राजा ने एक सुरक्षित उपाय खोजा। उन्होंने इस मरकत मणि को जमीन के नीचे गहराई में गाड़ दिया। उसकी रक्षा तथा पवित्रता बनाए रखने के लिए उस मणि के ठीक ऊपर एक विशाल शिवलिंग की स्थापना कर दी।
मान्यता है कि इसी मरकत मणि की ऊर्जा और किरणों के कारण यह शिवलिंग आज भी आकार में बढ़ता है। मातंग ऋषि द्वारा पूजे जाने और मणि के रक्षक होने के कारण ही इस मंदिर का नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा। श्रद्धालुओं का आज भी अटूट विश्वास है कि वह चमत्कारी मरकत मणि आज भी शिवलिंग के ठीक नीचे पाताल में सुरक्षित मौजूद है।
![मंगतेश्वर महादेव मंदिर:एक ऐसा रहस्यमय शिव मंदिर जहां हर साल बढ़ती है शिवलिंग की लंबाई - Tripoto]()
इतिहास के पन्नों में झांकें तो खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजवंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था। मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण काल 900 ईस्वी से 925 ईस्वी के मध्य माना जाता है। चंदेल वंश के राजा परम शिवभक्त थे।
उन्होंने खजुराहो में दर्जनों भव्य मंदिरों का निर्माण कराया था, जिनमें से अधिकांश मंदिर अपनी कामुक और सुंदर मूर्तियों के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन मतंगेश्वर मंदिर की बात ही कुछ अलग है। जहां खजुराहो के पश्चिमी और पूर्वी मंदिर समूहों के अधिकांश मंदिरों में मूर्तियां खंडित होने या ऐतिहासिक कारणों से पूजा-अर्चना बंद हो चुकी है।
वहीं मतंगेश्वर मंदिर एक हजार वर्षों से अखंड रूप से पूजा का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत एक संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। ASI इसके ऐतिहासिक ढांचे की सुरक्षा करता है, जबकि स्थानीय ट्रस्ट और श्रद्धालु इसके धार्मिक कार्यों को संचालित करते हैं।
![Sawan First Monday | Khajuraho Matangeshwar Mahadev Temple Darshan]()
अगर आप खजुराहो के कंदारिया महादेव या लक्ष्मण मंदिर को देखें, तो उनकी दीवारों पर हजारों बारीक नक्काशीदार और कामुक मूर्तियां उकेरी गई हैं। लेकिन मतंगेश्वर मंदिर इन सबसे बिल्कुल अलग है।
![Photo: मतंगेश्वर महादेव मंदिर की रहस्यमयी कहानी, यहां हर साल बढ़ती है शिवलिंग की लंबाई - Prabhat Khabar]()
यदि आप मतंगेश्वर महादेव के दर्शन करने और इस चमत्कारी शिवलिंग का साक्षी बनने की योजना बना रहे हैं, तो खजुराहो पहुँचना बेहद आसान है:
![सदियों से बढ़ता जा रहा है ये शिवलिंग, जानें कहां है - matangeshwar mahadev temple-mobile]()
मतंगेश्वर महादेव मंदिर केवल एक ऐतिहासिक इमारत या पर्यटन स्थल नहीं है। यह स्थान करोड़ों सनातन धर्मियों की आस्था और विश्वास का बड़ा केंद्र है। शिवलिंग के बढ़ने का रहस्य चाहे जो भी हो, लोगों की श्रद्धा अटूट है।
अगर आप खजुराहो जाएं तो मतंगेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक परिवेश आपको एक अलग अनुभव देगा। यह मंदिर भारत की प्राचीन धरोहर और संस्कृति का सुंदर प्रतीक है।
हर साल महाशिवरात्रि के त्योहार पर यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने खजुराहो पहुंचते हैं। लोग पवित्र नदी में स्नान करके महादेव का जलाभिषेक करते हैं।
माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मंदिर का वातावरण बहुत ही शांत, भक्तिमय और ऊर्जा से भरा रहता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक अनोखी आत्मिक शांति महसूस होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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खजुराहो के अन्य मंदिर जहां केवल ऐतिहासिक स्मारक बनकर रह गए हैं। वहीं मतंगेश्वर महादेव का गर्भगृह पिछले हजार सालों से निरंतर पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार से गुंजायमान है। आखिर क्या है इसके आकार बढ़ने की असली वजह? क्या यह इसके नीचे दबी पौराणिक मरकत मणि की शक्ति है या फिर जियोलॉजी का कोई अनसुलझा नियम? आइए, इस रहस्यमयी मंदिर से जुड़े इतिहास को गहराई से जानें...
Matangeshwar Mahadev Khajuraho
शरद पूर्णिमा पर होती है शिवलिंग की नाप
स्थानीय परंपराओं के मुताबिक, हर साल शरद पूर्णिमा की रात को मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग मिलकर इस दिव्य शिवलिंग की ऊंचाई और मोटाई की नाप लेते हैं। हर साल जब नाप ली जाती है, तो पाया जाता है कि शिवलिंग का आकार पिछले साल के मुकाबले एक तिल के बराबर बढ़ गया है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह शिवलिंग सिर्फ ऊपर आकाश की ओर ही नहीं बढ़ रहा। बल्कि इसका उतना ही हिस्सा नीचे जमीन की गहराई यानी पाताल की ओर भी धंसता जा रहा है। इस घटना को देखने और महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए शरद पूर्णिमा पर यहां हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
Suveer Singh Sikarwar on X: "The Matangeshwar Temple Khajuraho is a ninth century sanctuary. This temple is also famous for being counted among one of the oldest temples in India.@MPTourism @incredibleindia @MPIntltourism #
मरकत मणि की पौराणिक कथाएं
माना जाता था कि इस मणि के संपर्क में आने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती थीं। जिस स्थान पर इसे रखी जाती थी, वहां कभी दरिद्रता नहीं आ सकती थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर यह मरकत मणि अपने परम भक्त मातंग ऋषि को दान में दे दी थी। मातंग ऋषि ने इस परम पवित्र मणि का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया। कालांतर में जब ऋषि मातंग का समय पूरा होने लगा, तो उन्होंने इस मणि की सुरक्षा का दायित्व धर्मनिष्ठ राजा हर्षवर्धन को सौंप दिया।
45ac5b52-b39
राजा हर्षवर्धन जानते थे कि इस मणि की शक्ति इतनी विशाल है कि अगर यह किसी अधर्मी या पापी इंसान के हाथ लग गई, तो अनर्थ हो सकता है। इसलिए राजा ने एक सुरक्षित उपाय खोजा। उन्होंने इस मरकत मणि को जमीन के नीचे गहराई में गाड़ दिया। उसकी रक्षा तथा पवित्रता बनाए रखने के लिए उस मणि के ठीक ऊपर एक विशाल शिवलिंग की स्थापना कर दी।
मान्यता है कि इसी मरकत मणि की ऊर्जा और किरणों के कारण यह शिवलिंग आज भी आकार में बढ़ता है। मातंग ऋषि द्वारा पूजे जाने और मणि के रक्षक होने के कारण ही इस मंदिर का नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा। श्रद्धालुओं का आज भी अटूट विश्वास है कि वह चमत्कारी मरकत मणि आज भी शिवलिंग के ठीक नीचे पाताल में सुरक्षित मौजूद है।
मंगतेश्वर महादेव मंदिर:एक ऐसा रहस्यमय शिव मंदिर जहां हर साल बढ़ती है शिवलिंग की लंबाई - Tripoto
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
उन्होंने खजुराहो में दर्जनों भव्य मंदिरों का निर्माण कराया था, जिनमें से अधिकांश मंदिर अपनी कामुक और सुंदर मूर्तियों के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन मतंगेश्वर मंदिर की बात ही कुछ अलग है। जहां खजुराहो के पश्चिमी और पूर्वी मंदिर समूहों के अधिकांश मंदिरों में मूर्तियां खंडित होने या ऐतिहासिक कारणों से पूजा-अर्चना बंद हो चुकी है।
वहीं मतंगेश्वर मंदिर एक हजार वर्षों से अखंड रूप से पूजा का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत एक संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। ASI इसके ऐतिहासिक ढांचे की सुरक्षा करता है, जबकि स्थानीय ट्रस्ट और श्रद्धालु इसके धार्मिक कार्यों को संचालित करते हैं।
Sawan First Monday | Khajuraho Matangeshwar Mahadev Temple Darshan
मंदिर की वास्तुकला की खासियत
- वर्गाकार योजना:
यह मंदिर एक बहुत ही ऊंचे और मजबूत वर्गाकार चबूतरे पर बनाया गया है। - सरल और भव्य गर्भगृह:
मंदिर की बनावट में अत्यधिक जटिल नक्काशी के बजाय मजबूती और सादगी पर जोर दिया गया है। इसका गर्भगृह बहुत विशाल है, जिसके मध्य में यह विशालकाय शिवलिंग स्थापित है। - पीतल जैसा चमकता पत्थर:
शिवलिंग जिस पाषाण से बना है, उस पर जलाभिषेक और घर्षण के बाद भी ऐसी अद्भुत चमक है कि वह दूर से देखने पर पीतल या किसी कीमती धातु जैसा प्रतीत होता है। - सुंदर छत और खंभे:
मंदिर के अंदरूनी खंभों और छत पर उकेरी गई जालियां और ज्यामितीय डिजाइन्स चंदेल स्थापत्य कला की सादगी भरी सुंदरता को दर्शाती हैं।
Photo: मतंगेश्वर महादेव मंदिर की रहस्यमयी कहानी, यहां हर साल बढ़ती है शिवलिंग की लंबाई - Prabhat Khabar
पर्यटकों के लिए मतंगेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे
- हवाई मार्ग (By Air):
खजुराहो का अपना सिविल एयरपोर्ट है, जो दिल्ली, वाराणसी और मुंबई जैसे बड़े शहरों से सीधी या कनेक्टिंग फ्लाइट्स से जुड़ा हुआ है। - रेल मार्ग (By Train):
खजुराहो रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख रेल नेटवर्क से जुड़ा है। इसके अलावा निकटतम बड़ा जंक्शन सतना (लगभग 115 किमी) और झांसी (लगभग 175 किमी) है, जहां से आसानी से ट्रेनें और टैक्सियां मिल जाती हैं। - सड़क मार्ग (By Road):
छतरपुर, झांसी, सतना, भोपाल और ग्वालियर से खजुराहो के लिए नियमित राज्य परिवहन और प्राइवेट बसें चलती हैं। - घूमने का सबसे अच्छा समय: खजुराहो और मतंगेश्वर मंदिर आने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। यदि आप विशेष धार्मिक अनुभव चाहते हैं, तो शरद पूर्णिमा या महाशिवरात्रि के दौरान यात्रा का प्लान बनाएं।
सदियों से बढ़ता जा रहा है ये शिवलिंग, जानें कहां है - matangeshwar mahadev temple-mobile
भक्ति और अध्यात्म का जीवित केंद्र
अगर आप खजुराहो जाएं तो मतंगेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक परिवेश आपको एक अलग अनुभव देगा। यह मंदिर भारत की प्राचीन धरोहर और संस्कृति का सुंदर प्रतीक है।
हर साल महाशिवरात्रि के त्योहार पर यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने खजुराहो पहुंचते हैं। लोग पवित्र नदी में स्नान करके महादेव का जलाभिषेक करते हैं।
माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मंदिर का वातावरण बहुत ही शांत, भक्तिमय और ऊर्जा से भरा रहता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक अनोखी आत्मिक शांति महसूस होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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