एमपी में गहराया TET विवाद, शिक्षक संघों ने किया प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान
News In Short
- मध्यप्रदेश में TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करने पर विवाद खड़ा हो गया है।
- 12 शिक्षक संगठनों ने मिलकर अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा बनाया है।
- 8 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा जो 18 अप्रैल तक चलेगा।
- सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने और DPI का आदेश रद्द करने की मांग है।
- डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षक इस विवाद से सीधे प्रभावित हैं।
News In Detail
TET विवाद अब निर्णायक मोड़ पर
मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नाराजगी अब सड़क पर उतर आई है। TET (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता और सेवा अवधि की गणना को लेकर चल रहा विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य के 12 प्रमुख शिक्षक संगठन एक साथ आए हैं और उन्होंने एकजुट होकर अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन कर लिया है।
मोर्चा ने साफ कर दिया है कि अब अलग-अलग विरोध नहीं, एक मंच से लड़ाई लड़ी जाएगी। संगठनों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों की नौकरी और भविष्य की सुरक्षा की है।
8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन का पूरा रोडमैप
मोर्चे ने चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रणनीति तय कर ली है। आठ अप्रैल को जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन होंगे। वहीं, ब्लॉक स्तर पर 11 अप्रैल को धरना दिया जाएगा और जनप्रतिनिधियों का ध्यान खींचने की कोशिश होगी। भोपाल में 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक राजधानी में जुटेंगे।
मोर्चा सदस्य उपेन्द्र कौशल ने बताया कि यह संघर्ष सिर्फ किसी प्रशासनिक आदेश के खिलाफ नहीं है। यह शिक्षकों के भविष्य की रक्षा के लिए है।
1995 से 2011 के बीच नियुक्त शिक्षक सबसे ज्यादा परेशान
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रांताध्यक्ष राकेश दुबे ने सीधे शब्दों में कहा कि यह विवाद नीति और न्याय का सवाल है। उनका कहना है कि 1995 से 2011 के बीच जो शिक्षक उस समय के नियमों के तहत नियुक्त हुए थे, उन पर 27 साल बाद नया नियम लागू करना सही नहीं है।
राकेश दुबे ने इसे रेट्रोस्पेक्टिव बदलाव यानी पिछली तारीख से नियम बदलना कहा। उनके मुताबिक यह कानूनी नजरिए से भी कमजोर है और नैतिक रूप से भी गलत है।
डेढ़ लाख शिक्षकों में असमंजस और डर
DPI (Directorate of Public Instructions) के आदेश में कई जरूरी बातें साफ नहीं की गई हैं। किन शिक्षकों को TET देना होगा और कौन इससे बाहर रहेंगे, यह आदेश में स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में असुरक्षा और भ्रम का माहौल है।
शिक्षक संगठनों का यह भी कहना है कि इस अस्पष्टता का असर स्कूलों में पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। जब शिक्षक खुद परेशान हों तो बच्चों की शिक्षा कैसे बेहतर होगी?
रिव्यू पिटीशन और आदेश रद्द करने की मांग
मोर्चे की मुख्य मांग है कि मध्यप्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन (Review Petition) दायर करे। संगठनों का कहना है कि कई अन्य राज्य यह काम पहले ही कर चुके हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इसके साथ ही DPI द्वारा जारी आदेश को तुरंत रद्द करने की भी मांग है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक यह मामला अदालत में है, तब तक इस आदेश को लागू नहीं किया जाना चाहिए।
वरिष्ठता और सेवा अवधि का मुद्दा भी उठेगा
TET के अलावा संयुक्त मोर्चा सेवा अवधि की गणना पर भी सरकार से जवाब मांग रहा है। आजाद अध्यापक संघ की प्रदेश अध्यक्ष शिल्पी शिवान ने कहा कि नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता का मामला लंबे समय से लटका हुआ है। यह मुद्दा भी आंदोलन का हिस्सा होगा।
FAQ
- क्या है TET?
TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सरकारी शिक्षकों के लिए जरूरी परीक्षा है। इसे केंद्र और राज्य सरकार अलग-अलग आयोजित करती हैं। केंद्र स्तर पर CTET (Central Teacher Eligibility Test) और राज्य स्तर पर STET (State Teacher Eligibility Test) होता है। इसमें दो पेपर होते हैं। पेपर-1 कक्षा 1 से 5 के लिए और पेपर-2 कक्षा 6 से 8 के लिए होता है।
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