बाघों की दहाड़, मंदिरों की कला और पोहा-जलेबी का स्वाद, ये है अपना मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश को देश का दिल कहा जाता है। यहां का खाना, जंगल, कला और इतिहास हर किसी को अपनी ओर खींचता है। यहां का हर कोना एक अलग कहानी कहता है। इन तस्वीरों में राज्य का स्वाद, संस्कृति और प्रकृति एक साथ दिखती है।
सुबह की शुरुआत इंदौर के पोहा-जलेबी से करना यहां की पुरानी आदत है। गरम पोहे में नींबू, सेव और धनिया डालकर खाया जाता है। साथ में कुरकुरी जलेबी हो, तो स्वाद दोगुना हो जाता है।
मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट के नाम से जाना जाता है। कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे टाइगर रिजर्व यहां जंगल सफारी के लिए मशहूर हैं। जंगल की शांति और बाघ को देखने का रोमांच यहां खास अनुभव देता है।
महेश्वर की माहेश्वरी साड़ी अपनी खूबसूरत बुनाई और खास किनारी के लिए मशहूर है। यह साड़ी हल्की होती है और पहनने में आरामदायक रहती है। रानी अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल में इसे खास बढ़ावा मिला था। आज भी इसकी पारंपरिक डिजाइन लोगों को पसंद आती है।
खजुराहो के मंदिर अपनी शानदार नक्काशी और खूबसूरत मूर्तियों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इनकी दीवारों पर बनी कलाकृतियां भारतीय कला और संस्कृति की झलक दिखाती हैं। इनकी बारीक नक्काशी देखकर पर्यटक भी हैरान रह जाते हैं। यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है।
रायसेन जिले में स्थित सांची स्तूप बौद्ध धर्म की अनमोल धरोहर है। यह अपनी शानदार वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। यहां बने तोरण द्वार बेहद खास हैं। इन पर पत्थरों से उकेरी गई कहानियां और कलाकृतियां देखने लायक हैं।
भोपाल के पास स्थित भीमबैठका अपनी प्राचीन शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की चट्टानों पर हजारों साल पुराने चित्र बने हैं। ये चित्र उस दौर के इंसानों की जिंदगी दिखाते हैं। इनमें उनकी दिनचर्या और रहन-सहन की झलक मिलती है। भीमबैठका को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी मिला है।
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां होने वाली भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण है। मंदिर के दर्शन के साथ शिप्रा नदी के घाटों पर जाना भी एक यादगार अनुभव होता है।