MP मेडिकल एजुकेशन का नया ब्लूप्रिंट! अब बदलेगा मेडिकल कॉलेजों का पूरा कंट्रोल सिस्टम
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- प्रदेश में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने का ड्राफ्ट तैयार।
- कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।
- मेडिकल कॉलेजों का क्षेत्रवार पुनर्गठन होगा।
- जबलपुर और उज्जैन दो नए प्रशासनिक केंद्र बनेंगे।
- परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया को तेज करने पर फोकस।
- सरकार पर सालाना लगभग 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार।
मध्यप्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रही है। मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश की मौजूदा मेडिकल यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन कर दो अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही प्रदेश का मेडिकल एजुकेशन मैप बदल सकता है।
मेडिकल शिक्षा का नया कंट्रोल मॉडल
यह बदलाव केवल नई यूनिवर्सिटी बनाने तक सीमित नहीं है। असल मकसद मेडिकल कॉलेजों के बढ़ते नेटवर्क को बेहतर तरीके से मैनेज करना है।
सरकार मानती है कि एक ही विश्वविद्यालय के पास सभी कॉलेज होने से परीक्षा, रिजल्ट, संबद्धता और प्रशासनिक फैसलों में देरी हो रही है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिम्मेदारियां दो हिस्सों में बंट जाएंगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में एक ही विश्वविद्यालय के जरिए पूरे राज्य का संचालन चुनौती बनता जा रहा था। इसी वजह से सरकार ने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण का रास्ता चुना है।
पहले तीन का प्लान, अब दो पर सहमति
शुरुआती योजना जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में तीन मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने की थी। बाद में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से भी अलग विश्वविद्यालय की मांग उठी। सभी विकल्पों पर विचार के बाद सरकार फिलहाल दो मेडिकल यूनिवर्सिटी मॉडल पर आगे बढ़ रही है।
किसके अधीन कौन-सा क्षेत्र रहेगा?...
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी
इस यूनिवर्सिटी के अधीन महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज आएंगे। इनमें जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना, टीकमगढ़ समेत आसपास के जिले शामिल रहेंगे।
उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-चंबल, मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज इस यूनिवर्सिटी से संबद्ध होंगे। इसके दायरे में भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुना, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर और सागर संभाग के जिले शामिल किए गए हैं।
सरकार पर कितना बढ़ेगा खर्च?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य सरकार पर हर साल करीब 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि यह खर्च बेहतर मेडिकल शिक्षा प्रबंधन और तेज प्रशासनिक व्यवस्था के लिए निवेश साबित होगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद क्या बदलेगा?
यदि प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल जाती है तो प्रदेश के मेडिकल कॉलेज नई संबद्धता के अनुसार पुनर्गठित होंगे। इसके बाद परीक्षा, परिणाम, संबद्धता और शैक्षणिक संचालन दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों के माध्यम से किया जाएगा।
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