MP में UCC लागू करने की कवायद, 23 मई को इंदौर जाएगी कमेटी, उज्जैन का भी दौरा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी में है।
- इसके लिए 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है।
- कमेटी 23 मई को इंदौर में धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों से मिलेगी।
- सरकार ने दिवाली 2025 तक UCC लागू करने का लक्ष्य रखा है।
- कमेटी को 60 दिन में रिपोर्ट और ड्राफ्ट सरकार को सौंपना है।
इंदौर में होगी बड़ी बैठक
मध्य प्रदेश में यूसीसी (Uniform Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिशें अब तेज हो गई हैं। इसके लिए बनाई गई 6 सदस्यीय कमेटी शनिवार 23 मई को इंदौर का दौरा करेगी। यहां कमेटी के सामने शहर के तमाम जनप्रतिनिधि, सभी धर्मगुरु और आम नागरिक अपनी बात रखेंगे।
इंदौर के बाद कमेटी उज्जैन का भी दौरा करने वाली है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई कर रही हैं।
कमेटी कैसे बनी?
विधि और विधायी कार्य विभाग ने 27 अप्रैल को एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इसके जरिए राज्य में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए यह उच्च स्तरीय समिति गठित की गई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि छह महीने के भीतर यूसीसी बिल का मसौदा तैयार हो जाना चाहिए। सरकार का इरादा इस साल दिवाली तक इसे लागू करने का है।
कमेटी में कौन-कौन हैं?
कमेटी की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस (Indian Administrative Service) अधिकारी शत्रुघ्न सिंह भी इसमें शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह भी इस समिति के सदस्य हैं। यह टीम कानून, समाज और शिक्षा, तीनों नजरियों से यूसीसी का मसौदा तैयार करेगी।
60 दिन में रिपोर्ट देनी होगी
समिति को सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट सरकार को सौंपना होगा। यह समिति उत्तराखंड और गुजरात के यूसीसी मॉडल का भी गहराई से अध्ययन करेगी। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात यूसीसी लागू कर चुके हैं। मध्यप्रदेश इस कदम को उठाने वाला तीसरा राज्य बन सकता है।
किन कानूनों की होगी समीक्षा?
समिति राज्य में मौजूद तमाम व्यक्तिगत कानूनों को खंगालेगी। इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, गोद लेना और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा वाले प्रावधानों की भी जांच होगी।
उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण यानी गोद लेने से जुड़ी व्यवस्थाओं को सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक नजरिए से परखा जाएगा। कमेटी यह भी देखेगी कि प्रस्तावित कानून को लागू करने में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर क्या-क्या चुनौतियां आ सकती हैं।
जनता की राय भी ली जाएगी
समिति यह काम सिर्फ कागजों पर नहीं करेगी। धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी। आम नागरिकों को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा।
इंदौर दौरे में यही प्रक्रिया शुरू हो रही है। यहां कमेटी के सामने सभी पक्ष अपनी बात रख सकेंगे। इससे ड्राफ्ट तैयार करने में जमीनी हकीकत का भी ध्यान रखा जा सकेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
यूसीसी देश के सबसे संवेदनशील और बहस वाले संवैधानिक विषयों में से एक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य से अपेक्षा की गई है कि वह पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करे। मध्यप्रदेश का यह कदम संविधान की इस भावना को राज्य स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूसीसी का सीधा असर विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे करोड़ों लोगों की जिंदगी से जुड़े मामलों पर पड़ेगा। खासकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के नजरिए से यह कानून बड़े बदलाव ला सकता है। सामाजिक और धार्मिक विविधता वाले राज्य में इसे लागू करने की प्रक्रिया कितनी समावेशी है, यह देखना जरूरी है। इस खबर से जनता को पता चलता है कि सरकार किस दिशा में जा रही है और उनके पास अपनी बात रखने का मौका कब और कहां है।
जरूरी FAQ
मध्यप्रदेश में UCC क्या है और इसे क्यों लागू किया जा रहा है?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) एक ऐसा कानून है जो सभी धर्मों और समुदायों के लोगों पर समान रूप से लागू होगा। इसमें विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेना और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए एक ही कानून होगा। अभी अलग-अलग धर्मों के अपने-अपने पर्सनल लॉ हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में इसे लागू करने की बात कही गई है। मध्यप्रदेश सरकार इसे दिवाली 2025 तक लागू करना चाहती है।
UCC कमेटी इंदौर में किनसे मिलेगी और क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय कमेटी 23 मई को इंदौर आएगी। यहां जनप्रतिनिधि, सभी धर्मों के धर्मगुरु, कानूनी विशेषज्ञ और आम नागरिक अपनी राय रख सकेंगे। इसके बाद कमेटी उज्जैन भी जाएगी।
UCC लागू होने से आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा?
यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक जैसा कानून लागू होगा, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। इससे महिलाओं को संपत्ति और तलाक के मामलों में समान अधिकार मिल सकते हैं। लिव-इन संबंधों के लिए भी कानूनी प्रावधान होंगे। उत्तराखंड और गुजरात में यह कानून पहले से लागू है, मध्यप्रदेश तीसरा राज्य बन सकता है।
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