पीएम मोदी के मिशन पर MP में एक्शन, यूसीसी लागू करेगी मोहन सरकार!

Jitendra Shrivastava | Apr 06, 2026, 19:00 IST
Share
madhya pradesh ucc (2)
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सीएम मोहन यादव ने इसे मिशन मोड में लेकर प्रशासनिक तैयारियों की शुरुआत कर दी है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर मध्यप्रदेश में बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की जमीन तैयार होने लगी है। अब प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरे मामले को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के मूड में हैं। वे जल्द ही शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। राज्य सरकार बिना जल्दबाजी के ठोस और टिकाऊ मॉडल तैयार करना चाहती है, इसलिए जिन राज्यों ने यूसीसी लागू किया है या जहां इस पर काम चल रहा है, उनकी स्टडी की जाएगी। उसके बाद ही मध्यप्रदेश के लिए रोडमैप तैयार होगा। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस (6 अप्रैल) पर यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को पार्टी के अगले मिशन के रूप में देश के सामने रखा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) और वन नेशन-वन इलेक्शन पार्टी का अगला मिशन है। पीएम के इस ऐलान के बाद मध्यप्रदेश में कवायद तेज हो गई है।

क्या है यूसीसी, क्यों हो रही इतनी चर्चा?

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी का सीधा अर्थ है देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून। शादी, तलाक, गोद लेना, विरासत और संपत्ति के बंटवारे जैसे निजी मामलों में एक कानून लागू होगा, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से जुड़ा हो। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के अपने-अपने पर्सनल लॉ हैं। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदाय अपने धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के आधार पर निजी मामलों का निपटारा करते हैं। यही वजह है कि एक ही देश में समान परिस्थितियों में अलग-अलग कानून लागू होते हैं। यूसीसी लागू होने के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी। सभी नागरिक एक ही ‘इंडियन सिविल कोड’ के दायरे में आएंगे। इससे कानून की व्याख्या और उसका पालन दोनों सरल होंगे।

गोवा मॉडल: देश में पुराना उदाहरण

भारत में यूसीसी कोई नई अवधारणा नहीं है। गोवा ऐसा राज्य है, जहां आजादी के समय से ही एक समान नागरिक संहिता लागू है। इसे ‘गोवा सिविल कोड’ कहा जाता है, जो 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है। गोवा में सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी, तलाक और संपत्ति के नियम एक जैसे हैं। यह मॉडल लंबे समय से देश में एक उदाहरण के रूप में देखा जाता रहा है और अक्सर यूसीसी की बहस में इसका जिक्र होता है।

उत्तराखंड ने बनाया नया रास्ता

हाल के वर्षों में यूसीसी को लेकर सबसे बड़ा कदम उत्तराखंड ने उठाया है। उत्तराखंड देश का पहला स्वतंत्र राज्य बन गया है, जिसने अपना यूसीसी बिल (2024) विधानसभा से पारित किया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे 9 नवंबर 2025 से लागू भी कर दिया गया है। उत्तराखंड का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए संदर्भ बिंदु बन चुका है।

कई राज्यों में तैयारी, बढ़ता दायरा

यूसीसी को लेकर देश के कई राज्यों में हलचल तेज है। असम, राजस्थान और गुजरात ने इस दिशा में समितियां गठित कर दी हैं और मसौदा तैयार करने का काम चल रहा है। यूपी में भी UCC को लागू करने के लिए प्रस्तावित किया गया है और सरकार इस पर चर्चा कर रही है। हिमाचल प्रदेश में UCC लागू करने पर विचार किया जा रहा है, और मुख्यमंत्री ने इस पर काम करने का निर्णय लिया है।

अब मध्यप्रदेश की बारी

इन सबके बीच अब मध्यप्रदेश में भी यूसीसी को लेकर प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। सरकार जल्द ही शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे का रास्ता तय करेगी। यह बैठक अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें यह तय होगा कि प्रदेश किस मॉडल को अपनाएगा, किन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और किन वर्गों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

यूसीसी लागू होने पर क्या बदल जाएगा?

यदि यूसीसी लागू होता है तो आम लोगों के जीवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ा असर बहुविवाह पर पड़ेगा। किसी भी धर्म में एक से अधिक विवाह पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। हर शादी का पंजीकरण अनिवार्य होगा। चाहे विवाह किसी भी रीति-रिवाज से हुआ हो, उसे कानूनी रूप से दर्ज कराना जरूरी होगा। इससे विवाद की स्थिति में स्पष्टता बनी रहेगी।
तलाक के मामलों में पति और पत्नी दोनों के लिए समान नियम लागू होंगे। अभी अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन यूसीसी आने के बाद एक समान कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। संपत्ति के अधिकारों में बड़ा बदलाव आएगा। बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा, जिससे लंबे समय से चली आ रही असमानता खत्म होगी।

यूसीसी के फायदे: क्यों इसे जरूरी बताया जा रहा?

यूसीसी को लेकर समर्थकों का मानना है कि इससे समाज में कई सकारात्मक बदलाव आएंगे। सबसे बड़ा फायदा लैंगिक समानता के रूप में देखा जा रहा है। महिलाओं को उन भेदभावपूर्ण प्रावधानों से राहत मिलेगी, जो कई पर्सनल लॉ में मौजूद हैं। राष्ट्रीय एकता को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून होने से जो दूरी बनती है, वह कम हो सकती है। कानूनी प्रक्रिया सरल होगी। अभी अदालतों में पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में जटिलता के कारण हजारों केस लंबित हैं। एक समान कानून आने से इनका निपटारा तेज हो सकता है।

पहले भी उठी थी बात, फिर ठंडी पड़ गई

मध्यप्रदेश में यूसीसी का मुद्दा पहली बार नहीं उठा है। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस दिशा में विशेषज्ञ समिति बनाने का ऐलान किया था। उस समय यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आया, लेकिन बाद में सत्ता परिवर्तन और लोकसभा चुनावों के माहौल में यह विषय धीरे-धीरे पीछे चला गया। अब जब प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल कर दिया है तो प्रदेश स्तर पर इसे फिर से गति मिल गई है। इस बार संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इसे अधूरा छोड़ने के बजाय ठोस नतीजे तक ले जाने की तैयारी में है।

बड़ी चुनौती: विविधता का संतुलन

मध्यप्रदेश जैसे राज्य में यूसीसी लागू करना आसान नहीं होगा। यहां सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता गहरी है। खासकर आदिवासी समुदायों की अपनी परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिन्हें एक समान कानून में समाहित करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इसी कारण सावधानी के साथ आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही राजनीतिक समीकरण भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 47 सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में किसी भी बड़े कानूनी बदलाव का असर सीधे इन क्षेत्रों पर पड़ेगा और सरकार इस गणित को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

क्या है कानूनी प्रक्रिया

UCC को लागू करने की प्रक्रिया संवेदनशील और जटिल काम है, क्योंकि यह विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को प्रभावित करता है। इसे लागू करने के लिए एक ठोस और विस्तृत प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। निम्नलिखित प्रमुख चरण होते हैं, जो आमतौर पर इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

1. समिति का गठन

UCC लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों में सरकारें विशेष समिति गठित करती हैं। यह समिति आम तौर पर विशेषज्ञों और प्रमुख व्यक्तियों को शामिल कर सकती है- • कानूनी विशेषज्ञ (जैसे जज, वकील) • धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषज्ञ (जो विभिन्न धार्मिक प्रथाओं को समझते हों) • सरकारी अधिकारी (जो कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को देख सकें) • संविधानिक विशेषज्ञ (जो भारतीय संविधान के सिद्धांतों और प्रावधानों के तहत विचार कर सकें)

2. सर्वेक्षण और अध्ययन

समिति को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों के कानूनी प्रावधानों का गहन अध्ययन करना होता है। इसके लिए मौजूदा परिवारिक कानूनों और व्यक्तिगत कानूनों का विश्लेषण किया जाता है, जैसे हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन, सिख, पारसी आदि के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान होते हैं। समाज के विभिन्न हिस्सों के दृष्टिकोण को जानने के लिए सर्वेक्षण और जन सुनवाई की जाती है।

3. प्रस्ताव और मसौदा तैयार करना

समिति एक मसौदा तैयार करती है, जिसमें व्यक्तिगत अधिकारों जैसे शादी, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार आदि को लेकर समान कानून बनाए जाते हैं। धार्मिक प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ धार्मिक या सांस्कृतिक विशेषताओं को संरक्षण देने की संभावना पर विचार किया जाता है। मसौदे को सार्वजनिक राय के लिए प्रस्तुत किया जाता है।

4. प्रस्ताव को अंतिम रूप देना

सार्वजनिक राय और विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखते हुए समिति अंतिम मसौदा तैयार करती है। इस मसौदे में संभावित सुधार किए जाते हैं और फिर इसे कानूनी रूप से मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाता है। अंतिम मसौदे को विधानसभा के समक्ष पेश किया जाता है। इसके बाद यदि विधायिका इसे मंजूरी देती है तो यह कानून बन जाता है। इसके लिए बहुमत का समर्थन जरूरी होता है। ये खबरें भी पढ़ें... बीजेपी का स्थापना दिवस: सीएम मोहन यादव बोले- भाजपा की विचारधारा अटल-अमर, मोदी के नेतृत्व में धुरंधर-2 का दौर विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट ने दिया हाजिर होने का आदेश, कोर्ट में मांगी बिना शर्त माफी 25 हजार रोजगार सहायकों के नियमितीकरण पर सरकार की चुप्पी, हाईकोर्ट की सख्ती भोपाल के सरकारी हॉस्टल के खाने में कीड़े और पत्थरबाजी, उमंग सिंघार की CM से मांग

Tags:
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • मध्यप्रदेश
  • प्रधानमंत्री मोदी
  • यूनिफॉर्म सिविल कोड
  • यूसीसी
  • स्थापना दिवस
  • राज्य सरकार
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती